आईन ए सूरत पर होती है,

1
158
आईन ए सूरत पर होती है,
आईन ए सूरत पर होती है,

आईन ए सूरत पर होती है,

आईन ए सूरत पर होती है ग़ज़ल ऐसी ,

रु ब रु ए इश्क़ में हूबहू सनम जैसी ।

तस्बीह फेरते ग़र ख़ुदा मिलता ,

मेहबूब ए इलाही हर इब्न ए इंसान के माथे पर गुदा मिलता ।

उफ़ भी नहीं कहते सोचने का मौका भी नहीं देते ,

सीधा तीर ए जिगर के पार रखते हैं ।

आज जो उंगलियां उठाते हैं तेरे जज़्बे पर ,

कल ज़माना तेरे बाब ए सुखन को सलाम ठोकेगा

तहरीर ए वक़्त की इबारतें लिखते ,

आदम ए खुल्द की सूरतें बदल जाती हैं ।

 

जहां के ज़र्रे ज़र्रे में मोहब्बत की ख्वाहिश है ,

दिल ए नाचीज़ को वादे वफ़ा की आज़माइश है

शब् ए फुरक़त में नींद आती नही ,

ख़्वाब आँखों में सजाकर सोता है कौन ।

नींद भर के आँख सोती नहीं ,

तेरे ख़्वाबों को तह ए दिल का मेहमान करके

आँखों के रास्ते वीरान पड़े हैं सारे ,

न ख़्वाबों का कारवां न नींदों का सिलसिला ।

खार ख़्वाबों के ग़र सुकून देते ,

फसल ए गुल बाद ए मौसम के भी खिला करते

 

http://www.pushpendradwivedi.com/%e0%a5%9e%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a5%9b%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4/

 

होता जहां का हर मंज़र हसीन ,

ग़र ख़्वाब तेरे मेरी नींदें न लूट लिए होते ।

दिल के ज़ख्मों को न छेड़ो नासेह ,

गोया सोयी पड़ी रात दर्द के गीत गुनगुनायेंगे ।

जुगनुओं सी जलती आँखें ,

जाने किसकी राहों में नज़र रखती हैं ।

नयी सुबह आगाज़ ए बिश्मिल के वास्ते ,

क्या ज़िन्दगी सिमटी है महज़ ख़ाक ए सुपुर्दगी के रास्ते ।

मन चंचल विचलित है नभ पर ,

कोई अनंत बत्तखों की श्रृंखलाएं ,

विद्यमान हैं जल पर

रात्रि के चारों प्रहर निर्भीक निडर निश्छल जल में ,

चहुँ और प्रखर है जलकुम्भी ।

 

हँसते हुए चेहरों में खलिश होती है ,

कुछ तज़ुर्बा ए इश्क़ कुछ बोहतान की दबिश होती है ।

गरूर ए इश्क़ में फ़िरता था ज़माना सारा ,

अब कोई नाम न लेगा रूबरू ए बोहतान के बाद ।