ख़ुश्क लबों की गुज़ारिश

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ख़ुश्क लबों की गुज़ारिश,
ख़ुश्क लबों की गुज़ारिश,

ख़ुश्क लबों की गुज़ारिश,

ख़ुश्क लबों की गुज़ारिश दुआ बनके मोहब्बत बरसे शहर भर में , गुंचा गुंचा गुलों के रंग ओ बू से खिल जाएँ ।

मैं जब भी होता हूँ उदास ग़म ए फ़ुर्क़त में , हर ओर दुआ बनके मिलती है मोहब्बत तेरी ।

ज़िन्दगी होती ग़र क़ामिल उनकी दुआओं के दम से , वो कब के जा दूर बैठे हैं हमसे किनारा करके ।

जब आदमी को आदमी से वेहसत होती है , ज़मीनें बंज़र हर मंज़र बियाबाँ होता है ।

जीने की जद्दोज़हद ख़त्म होती नहीं , यहाँ आदमी, आदमी के लहू का इस क़दर से प्यासा है ।

दुआ बनके धड़कती है मेरे सीने में , जुदा होकर भी मेरी साँसों का तेरी साँसों से ताना- बाना ख़त्म नहीं होता ।

हर एक दुआ के बाद लब पर तेरा ही नाम आया , ज़िन्दगी के सफ़र में जब भी कभी तन्हा उदास सा पाया ।

दुआओं के दम पर शहर भर में क़त्ल ए आम होते हैं , आज कल क़ातिल हुश्न के पिटारे क़त्ल का सामान साथ लेकर के चलते हैं ।

हमसे ज़्यादा दुआओं की ज़रूरतें उनको हैं , जो सरे बाजार रूबरू ए ज़माल ए यार के गुज़रे ।

ज़िन्दगी किसी की दुआओं का असर होगी वरना, हम तो सहराओं से भी क़फ़न ओढ़ कर गुज़रे ।

हमें मोहब्बत की तलब थी गोया, लोग रिश्तों पर रिश्ते लेकर के मिलते रहे ।

लब पर दुआ आँखों में शिकायत रखती है , ये आतिश ए मोहब्बत है शर्द में भी ग़ज़ब की तिश्नगी रखती है ।

दुआ कर मैं राख हो जाऊं , मेरे ख़ाक ए बदन की मिटटी भी तेरे काम आ जाये ।

रब् की दुआ में हाँथ उठता है , दिल की हर सदा में तेरी ख़ैरियत की बात होती है ।

ये उसकी दुआओं का असर है शायद , उसके हिस्से में चाँद तारे मेरे हिस्से में बस खIली रात आई ।

कुछ ख़ास मौकों की तलाश रहती है , ख़ाली लबों को बस जाम की प्यास रहती है ।

गुलामों की फौजें देखी हैं आंगे बहुत मीनारों के , कोई दिल से दुआ दे ऐसी जो सीधी दिल तक पहुँच जाए ।

ख़ुद की उम्र का कुछ तो ख़्याल करो चच्चा , एक पाँव क़ब्र में रख कर किस किस की ज़िन्दगी कबाड़ करोगे ।