ग़म ए गर्दिश में मुस्कुराहटों का एहतिराम करो ,

0
98
ग़म ए गर्दिश में मुस्कुराहटों का एहतिराम करो ,
ग़म ए गर्दिश में मुस्कुराहटों का एहतिराम करो ,

ग़म ए गर्दिश में मुस्कुराहटों का एहतिराम करो ,

ग़म ए गर्दिश में मुस्कुराहटों का एहतिराम करो ,

सम्हालो शाद ए मुहकमा फ़िक़्र ए नाशाद में उम्रें ज़ाया न करो ।

नाज़ हमको भी था इश्क़ ए तबीयत पर उनकी ,

गोया फ़िराक़ ए यार देखी हसरत बदल गयी ।

गर्द पत्तों की धोने से गुलशन गुलज़ार नहीं होते ,

लहू झोकना पड़ता है जड़ों में तब दरख़्त तैयार होते हैं ।

शाद ओ ग़म सा तेरा मुझे साथ मिला ,

मैं तन्हा महफिलों में चरागों सा बस जलता रहा ।

शाद ए घुंघरू की छम छम ,

मेघा संग नाचे मन मोरा शाद ए घुंघरूबनकर ।

 

 

मज़बूरियों में फ़िराक़ ए यार बदल जाते हैं ,

वैसे हर बन्दा ख़ुदा का नेक बन्दा है ।

शबनमी शाम धुली धुली सी है ,

फ़िराक़ ए यार पर चश्म ए गुल नज़र हम भी कर लेंगे ।

मुतरिब ए शान ए शान ए शामियाना ए ग़ज़ल ,

मिसरा ए चश्म नशीन जश्न और वो शाम ए फ़िराक़

हर बार सेहरा बाँध कर निकला,

मुसलसल तक़दीर ही फ़िराक़ ए बेईमान निकली ।

बहक जाती है सारी रात तेरे आने से ,

तुम ख्यालों में दबे पाँव आया जाया करो

 

 

हर मौसम का सारा अमला है ,

जिधर देखो मोहब्बतों के ढेरों दुश्मन हैं खड़े ।

ग़ुस्ताख़ी माफ़ निग़ाह ए ज़ुम्बिश में भी अब आब नहीं ,

ताब सारा का सारा मोहब्बतों में डूब गया ।

साज़ ए दिल तार को छेड़ दिया ,

गोया शाम गुज़रेगी गुलों की बहार ए पहलू में ।

यूँ ही गुनगुनाना मेरी आदत है ,

फ़ितरत ए इश्क़ को आशिक़ी न समझ मैं इंसान हूँ कोई मसीहा तो नहीं ।

तुम किनारों को दरकिनार करो ,

मोहब्बत से अब हमारा भी सरोकार नहीं ।

 

http://www.pushpendradwivedi.com/%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0/

 

ख़्याल ए यार चाँद सितारों वाले ,

हम शब ए माहताब से जल जाते हैं ।

आलम ए आफ़ताब से जलने वाले ,

शब् ए माहताब को शायराना ख़्याल कहते हैं ।

उफ़ ये दिन के उजालों का सफ़र ,

रात तन्हा बसर होती नहीं ।

pix taken by google