रात की तन्हाई सुरखाब ख़्यालों वाली ,

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रात की तन्हाई सुरखाब ख़्यालों वाली ,
रात की तन्हाई सुरखाब ख़्यालों वाली ,

रात की तन्हाई सुरखाब ख़्यालों वाली ,

रात की तन्हाई सुरखाब ख़्यालों वाली ,

फिर बेख्याली में बिखरे होंगे कजरा गज़रा झुमका लाली

कदमो की चापों से खलल होती है ,

बेरोक टोक बिला इजाज़त हमारी नींदों को रौंदती हैं तेरी यादें ।

ख़्वाबों में भी आने जाने की इजाज़त ,

उफ़ ये इश्क़ है या ख्यालों की नुख़्ताचीनी ।

तितलियों सी लहरों के साथ क्रीड़ाएँ करने की ज़िद ,

व्याकुल मन जल थल नभ दृष्टिगोचर होता उथल पुथल

ऊँघती शाम की सिलवटों से निकलते जुगनू ,

चल दिया रात घनेरी को झिलमिल करने ।

 

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दिल में हो गर बोझ तो हल्का कर दो ,

मोहब्बत जब लगे तोहमत तो सौदा कर लो ।

ज़िन्दगी बोझ है तेरी साँसों की ,

तेरी साँसों में मैं अपनी साँसे भर दूँ ।

हर मौसम में दिल दहकता है ,

आशिक़ों की साँसे भी कब सर्द होती हैं ।

ज्योति बुझ रही मनोबल बढ़ रहा ,

घुप अँधेरों के परे एक सवेरा और है ।

बुझ गए सारे नज़ारे ग़ुम हुयी सब तितलियाँ ,

अब चमन में रंग ओ बू के भी सहारे और हैं ।

 

 

हैं इरादे फ़क़त दीवारों को हटाने के ,

आ अँधेरों को चरागों से रोशन कर दें ।

इश्क़ ए बदनाम सुदा लगते हो ,

यूँ रो रो के मैक़दे न बदनाम करो ।

जाम दो घूँट की ख़ुमारी है क्या ,

मैक़दे के नाम से भी बहक जाते हो ।

अब लेले तू भी लट्ठ तोड़ पोएट्री का मज़ा ,

है बड़ा दर्द भरा दिल तो बैतबाजी से शायरी को सजा ।

नाज़ुक ख्याली तेरी उसपर बाली उम्र ,

गोया इश्क़ पुरज़ोर कहीं बल न खा जाये पतली कमर

उतर गयी हो ख़ुमारी तो घर को आजाओ ,

भटक गए हो रस्ता तो मैक़दे में सो जाओ ।

 

 

अतीत के समंदर में समाये धीज के मोती ,

अब्र ओ सैलाब से निकले है इजाज़त के बगैर

बिला इजाज़त सिपहसालारों की भर्ती ,

कौन है वो हुकुमरान जो हमरे ख़्वाबों की सल्तनत रौदने चला आया ।

pix taken by google