शहादत ज़ाया नहीं जाएगी,

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शहादत ज़ाया नहीं जाएगी,
शहादत ज़ाया नहीं जाएगी,

शहादत ज़ाया नहीं जाएगी,

शहादत ज़ाया नहीं जाएगी वतन पर मिटने वालो की ,

सहीदों ने लहू से ख़ाक की फसलों को सींचा है ।

कफ़न में चैन से सोती नहीं रूहें ,

वतन की हिफाज़त अभी और क़ुर्बानी माँगती है ।

धरा गर है सुसज्जित पिपासा रक्त से बुझ कर अधर की ,

गूँजती हैं वीर गाथाएँ रज रज से हुंकार भर के ।

बिना लुक़मा के फाख्तों में रात गुज़रेगी ,

रसद का माल सियासियों में बँट गया शायद ।

बुजुर्गियत आई नहीं वसीम ,

मैं अभी दिल से बच्चा हूँ ।

 

 

इंसान में इंसानियत तलास करता हूँ ,

हर एक लफ्ज़ में मोहब्बत के जुमले की बात करता हूँ ।

इतनी नफरत ज़माने में कैसे पाल रखी है ,

जब वजूद ए इंसान खुद के बस में नहीं है ।

लख्त ए जिगर हथेली में सजाकर ,

निकले हैं वीर जियाले शहादत का सेहरा बनाकर ।

निज़ात मिल जाये तो ज़माने के कारोबार करूँ ,

तू मोहब्बत का हलफनामा ही तरदीद कर दे ।

जब भी आया बेशुमार आया ,

तेरे ख्यालों का ख्याल रूबरू तेरे ख़ूबरू आया ।

 

 

बुझती है साहिल की सूखी रेतों से ,

प्यास समंदर की गहराईयों से गहरी है ।

सागर से साहिल को चूमती लहरें ,

अपने एक क़ुनबे से बग़ावत कर रही हो जैसे ।

रात के सन्नाटे में हादसा ये ज़बरदस्त हुआ प्यास आँखों में जगी ,

गोया फिर सारी रात हम सोये नहीं ।

हमने देखी है साहिल को चूमती लहरें ,

क्या दरियाओं में अब भी प्यास बाकी है ।

प्यास ही तो है ज़िन्दगी सारी ,

क्यों कर कौन तन्हाइयों का कारोबार किया करता है ।

 

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जहाँ में मोहब्बतों के बहुत दौर चले ,

कभी हम चले तो कभी ज़माने में हमारे चर्चे पुरज़ोर चले ।

थक के सो जाती है सूखे बरगद के तले ,

ख्वाहिशें बूढी अब रात के साथ जवान नहीं होती ।

गम ए गर्दिश में भी रक़्स कर जाए बन्दे का दिल ,

मोहब्बत में ज़हर पीने का हुनर रखता है ।

pix taken by google