स्कूल का बस्ता,

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स्कूल का बस्ता,
स्कूल का बस्ता,

स्कूल का बस्ता,

स्कूल का बस्ता सम्हाला नहीं जाता, किताबों में दिल छुपाये फिरते हैं ।

आतिश ए यारी का शौक़ है इसको , दिल से ज़्यादा भी कोई नामाक़ूल नहीं ।

गले में खुश्की है सारी रात की मयकशी के बाद , खुद पिया साक़ी या औरों को पिलाया सारी रात

महबूबों से गिला कैसा खुदाओं से गुज़ारिश कैसी , मोहब्बत का मिजाज़ क़ाफ़िराना अदावतें भी बारिश के जैसी

विसाल ए यार ही होती गर फ़ितरत उसकी , आँखों से नींदें चुराने वाला ज़माने से तुझको छीन न लेता ।

अभी जागो की स्वर्णिम मिलन की मधुर बेला है , अभी कुहू की कलरव से गीतों में साज़ की आवाज़ भरना है ।

वादी ए सेहरा में विसाल ए यार के चर्चे हैं , सब्ज़ा सब्ज़ा कली ग़ुल ग़ुलनार यूँ ही नहीं महके हैं ।

फ़िज़ा में मिलते होंगे ग़ुल ओ ग़ुल वाली , शहर भर में मिजाज़ ए दिल नहीं मिलता ।

नज़रें मिलने मिलाने का बड़ा शौक़ था उनको , अब लड़कपन में दिल टूटना भी तो वाज़िब है

दम ब दम जान निकलती जाती है , न विसाल ए यार हुआ न ज़माना हमदम

जिनको हो विसाल ए यार का ग़म , कौन मिसाल ए यार का मुब्तला करे ।

गुंचा गुंचा दिनों के पखवाड़े , टुकड़ा टुकड़ा विसाल ए यार का ग़म ।

हमको तो ग़म ए विसाल ए यार ने मारा , तुम क्यों अंजुमन में उखड़े उखड़े हो ।

ज़िन्दगी एक टूटी फूटी नज़्म बनके रह गयी , कुछ जमाल ए यार के सदके उतारे कुछ अधूरी रह गयी ।

दीदार ए यार की तमन्ना थी मोहसिन , बे सबब चाँद सितारों को तकता है कौन

दुश्मनी होती तो हम भी तिज़ारत करते , हमको अपनों ने सरे बाजार नीलाम किया

यारों ने यारी निभा दी ऐसी , दुश्मनो से गिला शिकवा भी जाता रहा

बेमुरव्वत में मर गया क़ाफ़िर , जो दुश्मन ए यार से मोहब्बत भी बड़ी बेइंतेहाई से करता था ।

आतिश ए यारी का शौक़ है इसको , दिल से ज़्यादा भी कोई नामाक़ूल नहीं