हशरत ऐसी है इन हवाओं की ,

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हशरत ऐसी है इन हवाओं की ,
हशरत ऐसी है इन हवाओं की ,

हशरत ऐसी है इन हवाओं की ,

हशरत ऐसी है इन हवाओं की , कि अब मोहब्बतों के परिंदे भी आसमानो में आशियाना कर लें ।

इक मसर्रत कि ख़ातिर कहाँ तक जायज़ है , किसी का अलविदा कहना किसी का हमनवाँ होना ।

सबके सब निठल्ले सबके सब बेरोज़गार, पचीस ठो पैदाकर के कहते हैं ऊपर वाले का चमत्कार

साल दर साल एक जैसे हैं , हम भी वही नया साल मनाएंगे जो सिर्फ मेरा हो ।

ज़िन्दगी हौसलों के दम पर चलती है , उम्मीद छोड़ने वाले खट्ट तोड़ते ही मर जाते हैं ।

ज़िन्दगी एक ही पाले पर खेलती गोया, सबकी सब बाज़ी हमारी होती ।

निकले थे हम भी घर से कारोबार करेंगे , देखा मिजाज़ ए यार तो तबीयत मचल गयी ।

उम्मीदें पोशीदा हैं अभी सीने में , मैं यही सोच कर हर रोज़ अभी ज़िंदा हूँ ।

साफ़ सुथरे रास्तों पर बस नज़र मत रख , ऊबड़ खाबड़ रास्तों से भी पत्थर हटाने वाला होना चाहिए ।

ना उम्मीद ना हो हौंसला रख , हर अँधेरे के बाद एक उजला सवेरा ज़रूर होता है ।

राहगीरों की तक़दीर बद से बद्तर थी , राह ए खाकसारी में धूल मिटटी पत्थर के सिवा था ही क्या ।

मुल्क़ बाँटे ज़मीनें बाँटी , दिलों के रास्तों पर भी सरहदी ताले लगा डाले ।

दिल बहलता नहीं है टुकड़ों में , सारा आब ए हयात मिले जाने क्या हो ।

हश्र इस तन का है मिटटी में मिल जाना , बस सहीदों की सहादत ही वतन के काम आती है ।

हम तो आशिक़ हैं बस इश्क़ की इन्तहा जानें , अंजाम ए इश्क़ होता है क्या बस आगे ख़ुदा जानें ।

ज़मीन ए खाकसारी और ज़ौक़ ए उर्दू का फन , जौहरी वो है जो पत्थर से भी बुत ए मुजस्सिम तरास लेता है ।

हर कोई दौलत ओ हुश्न का मुरीद यहाँ , कौन करता है वफ़ा का कारोबार जहाँ में ।

उतर रहा है ज़हर दिल पर मेरे आहिस्ता , अब कोई और हश्र ए सुखन हो तो मुझ पर आजमाओ ।