आरज़ू ए दिल की चश्म ओ चराग ग़मज़दा 2line shayari,

0
630
आरज़ू ए दिल की चश्म ओ चराग ग़मज़दा 2line shayari,
आरज़ू ए दिल की चश्म ओ चराग ग़मज़दा 2line shayari,

आरज़ू ए दिल की चश्म ओ चराग ग़मज़दा 2line shayari,

आरज़ू ए दिल की चश्म ओ चराग ग़मज़दा ,

घर हो गया है ख़ाक फिर भी रोशनी नहीं ।

 

कभी ठहरों नज़रों के रूबरू आँखों से आँखों के दो जाम हो जाएँ ,

लब रहें खामोश , खामोशियों में दिलों के काम हो जाएँ ।

 

मेरे नज़रों की चमक देख ,

तेरी मोहब्बत मेरी सुर्ख आँखों से अश्क़ों के मोती बनकर टपकती है ।

love shayari 

सियासतों से गर रोशन हो तेरा मयखाना ,

लहू पैमाने में भर कर नज़र से भी पीना नहीं ।

 

गम इतना भी नहीं की घर बुझे बुझे से रहें ,

दर्द इतना है की दिल जैसे थोड़ा थोड़ा जला है ।

 

दिलों के बावस्ता दिलों को जोड़ने लाख दौर चले ,

एक मोहब्बत ही क़ामिल न रही जब तेरे मेरे दरमियान अदावतों के दौर चले ।

 

चश्म ए चरागों को बंद बस्ते में डालकर ,

गरूर ए यार कहता है मेरे सर्द लफ़्ज़ों को सुनो ।

 

दिल जला कर ही गर रौशनी है फितरत तेरी ,

गोया सर्द बारिश में हम खुद को जला जायेगे ।

 

शहर भर में उजाले हो जश्न मनाओ यारों ,

आज शब् ए महताब मेरा यार निकल आया है ।

 

चरागों में उजाले हो न हो ,

सर्द रातों में आशिक़ों के दिल बेशुमार जलते हैं ।

sad shayari 

गल्ले भर के रख लिए रोशनी के जज़ीरे में ,

चश्म ए तर आँखों से पिएगें जाम गम ए बारिश के महीने में ।

 

वो नब्ज़ थाम के चलते गर रात देर तलक ,

रोशनी कम न होती दिल के ग़रीब खाने में ।

 

शहर भर की रोशनी का ज़िम्मा लिए ,

सारी रात दर बदर हथेली पर दिल जलाये फिरता हूँ

 

बोलो बात करो क्यूँ हो खामोश क्यों तुमको हया आई क्या,

चमन में चटकी कली कोई जो तुम सरमाई क्या ।

 

कभी कोई गीत कोई ग़ज़ल की ख्वाहिश रख कर ,

तुम दबे पाँव शाम ए बज़्म में गुनगुनाते चले आना ।

pix taken by google