नोट बंदी की चपेट में सिर्फ आम इंसान, ,

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नोट बंदी की चपेट में सिर्फ आम इंसान, ,
नोट बंदी की चपेट में सिर्फ आम इंसान, ,

नोट बंदी की चपेट में सिर्फ आम इंसान,

नोट बंदी की चपेट में सिर्फ आम इंसान, राजनीतिक दल क्यों नहीं ।

क्या कालाधन सिर्फ आम जनता के पास है बड़े बड़े

सियासियों और व्यापारियों के पास कोई काला धन नहीं .

देखना अब ये हैं ३१ दिसम्बर के बाद प्रशासन क्या गुल

खिलाती है लिटा कर काँटों की सेज़ में हमको कुढ़ मलमल के बिछौनो में सो जाती है ।

मोदी सरकार ने आखिर क्यों की नोट बंदी ,

सबको याद होगा उरी अटैक जिसमे प्रधानमंत्री जी तत्वाधान में इंडियन आर्मी ने सर्जिकल स्ट्राइक को बखूबी अंजाम दिया ,

इसके बाद मोदी जी ने प्रकाश डाला था स्लीपर सेल्स के खात्मे पर ,

अगर अपने अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म हॉलिडे देखी होगी तो उसमे इनका उल्लेख किया गया है ,

 

 

स्लीपर सेल्स वो टेरोरिस्ट्स ग्रुप के सदश्य होते हैं ,

जो आम आदमी के बीच में अपना मकड़जाल फैलाये रहते हैं,

और अपने आकाओं के हुकुम पर आतंकवादी घटनाओ को अंजाम देते हैं ।

और वही आका इन्हें फाइनेंस मुहैया कराते हैं ,

अब क्यों की नोटों पर सरकार ने लगा दी है लगाम तो एक लंबे अरसे तक तो आतंकवादी घटनाओ को रोका ही जा सकेगा ।

साथ ही साथ इनके पास जितना भी कॅश होगा वो भी बेकार हो गया है ।

दूसरी बात नक्शलवाद और डकैत पर रोक क्यों की ये जंगलों और बीहड़ों में रहते हैं तो इनके पास भी जो रुपैया पैसा है वो अब काम का नहीं रह गया ,

 

 

इससे या तो नक्शली और डकैत आत्म समर्पण करेगे ये फिर भूखो मरेगे ।

कालाबाज़ारी पर रोक ज़मीन हो प्लाट हो कोई सामान हो सब दूने तिगुने रेट में बेच रहे थे क्यों की लोगों के पास इफरात कैश था ,

लोग खरीदते थे , अब जब एक एक रुपये का हिसाब होगा तो आदमी खरीदारी भी हिसाब से करेगा जिससे मंहगाई और काला बाज़ारी पर रोक लगेगी ,

रही बात टैक्स पेयी की जो की चार्टेड अकाउंटेंट से सांठ गाँठ बना के आधा पौना टेक्स देते थे वो अब इन्हें पूरा देना पड़ेगा । क्यों की आपकी आय का पूरा लेखा जोखा सरकार के पास होगा

अब क्योंकि असली ब्लैक मनी का अस्तित्व खतरे में हैं तो जाली मनी का फ्यूचर क्या होगा ये आप् भी समझ सकते हैं ।

अब रही बात आम आदमी की कठनाइयों की तो हमने मुम्बई ब्लास्ट से लेकर अक्षर धाम मुम्बई लोकल सीरियल ट्रैन ब्लास्ट २६ ११ का ताज अटैक पठान कोट एयरबेस अटैक और न जाने कितने अटैक झेले हैं ५० दिनों का कष्ट और न सही ।

 

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हाँ नेताओं को अपनी राजनीती करनी है वो तो करेगे उनका जन्म सिद्ध अधिकार है ,

और गणतंत्र राष्ट्र हमारा मूल भूत अधिकार है I

जय हिन्द जय भारत