सूद समेत ज़िन्दगी उधार लेता है alfaaz shayari,

0
622
सूद समेत ज़िन्दगी उधार लेता है alfaaz shayari,
सूद समेत ज़िन्दगी उधार लेता है alfaaz shayari,

सूद समेत ज़िन्दगी उधार लेता है alfaaz shayari,

सूद समेत ज़िन्दगी उधार लेता है ,

मिटटी की ख़ातिर किसान मिटटी में दम तोड़ देता है ।

 

ताज ओ तख़्त की ख़्वाहिश किसे ,

न्याय शिक्षा चिकित्सा के मौलिक अधिकार तो मुफ्त मिलने चाहिए

 

अवाम ए आम की आवाज़ ज़हन में घुट गयी ,

डॉक्टर इंजीनियर की फ़र्ज़ी डिग्रियां फुटपाथ पर कौड़ी के दामो बिक रही ।

 

जू अगर रेंगे नहीं अब भी किसी सरकार के ,

बोरिया बिस्तर समेटे और चुप चाप निकले सरहद के पार।

 

अंजाम ए इश्क़ से बेपरवाह आग़ाज़ ए इश्क़ हुआ करते हैं ,

शबनमी शाम तले आफताब ए हुश्न की ख़ातिर कई सूरज जला करते हैं ।

ये रात एक जवाब की तलबग़ार लगती है ,

अंजाम ए इश्क़ से बेपरवाह आग़ाज़ ए उल्फत पर ऐतबार करती है ।

horror story in hindi language 

दिल के आइना ए अक़्स में जब भी तुमको देखा,

आग़ाज़ ए इश्क़ को रक़्स करते देखा ।

 

ये ज़ौक़ ए आशिक़ी को शायरी न समझ ,

गोया अंजाम ए वफ़ा की परवाह करता तो आग़ाज़ ए मोहब्बत ही न करता ।

 

ख्याल ए क़ैफ़ियत की ख़ातिर ,

वस्ल की रात को आबाद किया तेरे ख़्वाबों की ख़ातिर ।

 

हर रात का मुक़म्मल एक फ़लसफ़ा रहा ,

जुस्तजू ए विसाल ए यार क़ैफ़ियत ए मुजस्सिमा रहा ।

इश्क़ ए क़ैफ़ियत को सम्हाल के रखा ,

गोया कितने मौज ए बारिशों में न भीगे होंगे हम ।

 

क़ैफ़ियत ए इश्क़ में न गुनाह हो जाए ,

जिगर में दीदा ए चाँद की चाहत रूबरू ए कह न चाँद कहीं मिल जाए

 

वस्ल की रात फ़िज़ा भी है खुर्रम ,

गीत गुंचा गुंचा , चाँद तारों में घुली है सरगम ।

 

आज की रात चाँद तारों में जश्न है वसीअ ,

शब् ए फुरक़त में वो नूर ए नज़र विसाल ए यार की खातिर बेक़रार हो जैसे ।

 

जश्न ए ग़ालिब साद ओ ग़म शायरी ओ सुख़न,

सब क़ैफ़ियत ए मिजाज़ ए मस्ती के फन ।

sad shayari 

picture taken by google