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कालकोठरी से भागते वक़्त अँधेरे में दौड़ते दौड़ते न जाने कितने ज़ख्म मल्लिका ए हुश्न की कनीजों ने दे दिया सहजादे को पता भी नहीं चला फिर एक पीठ पर वार के साथ शहज़ादा सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ मीना बाजार की गलियों में जा गिरता है , सब सहजादे की ऐसी हालत को देखकर हैरान रह जाते हैं , मगर चाहकर भी कोई देश निकाला दिए हुए शहज़ादे की मदद नहीं कर पाता है , और थोड़ी ही देर में मल्लिका ए हुश्न की कनीजें एक बार फिर से सहजादे को लेकर कर रंगमहल पहुंच जाती है , बिस्तर पर शहज़ादा लेटा है , एक कनीज चांदी के कटोरे में चन्दन का लेप लिए खड़ी है , और मल्लिका ए हुश्न खुद अपने हांथों से चन्दन का लेप शहज़ादे के ज़ख्मों पर लगा रही हैं , तभी मल्लिका ए हुश्न के हाँथ का स्पर्श पाकर शहज़ादे की आँख खुल जाती है , वो अपने आपको मल्लिका ए हुश्न की क़ैद में पाकर भागने की नाकाम कोशिश करता है मल्लिका ए हुश्न फ़ौरन उसकी गर्दन में खंज़र लगा देती हैं , और नशीली आँखों से शहज़ादा की तरफ घूरते हुए कामुकता भरी आवाज़ में कहती है और कितना तडपाएगे आप हमें , देखिये आपके विरह में हम सूख के काँटा हुए जा रहे हैं , हमारे यौवन का नूर खो गया है कहीं , ज़रा भी तरस नहीं आपको हमारे ऊपर थोड़ा तो रहम कीजिये हुज़ूर अपनी इस कनीज पर दिल ओ जान से मरते हैं हम आप पर ,आप क्या चाहते हैं हम आपके प्यार में मर जाएँ हमारे इश्क़ की ये इंतेहा न लीजिये हुज़ूर , कुछ तो ज़माने की परवाह कीजिये , क्या कहेगे लोग की एक चाहने वाली अभागन को बेरहम शहज़ादे ने सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए जान से मार डाला , और हंसती हुयी मल्लिका ए हुश्न पलटती है और शहज़ादे को व्यंगात्मक अंदाज़ में कहती हैं आप और हमसे प्यार च च च … आप तो अपने मुस्टंडों के प्यार में खोये रहते हैं , क्या हैं मर्दों मे जो मुझ कोमलांगी अप्सरा में नहीं , क्या आप समलैंगिकता पर विश्वास करते हैं , अब आप देखेंगे हमारा वो रूप जो आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा , हम भी समलैंगिक प्यार करके दिखाएंगे आपको शहज़ादे , तभी मल्लिका ए हुश्न की गिरफ्त से राहत पाकर शहज़ादा चीख पड़ता है , और बोलता है बद्ज़ात औरत तू औरत नहीं डायन है , मेरी सारी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी तूने तेरी बदौलत मेरा तख़्त ओ ताज चला गया , तेरी बदौलत सब मुझे नफरत की दृष्टि से देखते हैं तूने मुझे नपुंशक बना कर रख दिया है , मल्लिका ए हुश्न कहती है चिल्लाओ मत शहज़ादे तुम बादशाह बनने के लायक थे ही नहीं तुम्हे तो बस लड़को में रूचि थे , तुम मर्द हो ही नहीं , तुम्हे तो खुद मर्दखोर हो शहज़ादे मैंने तुम्हारा भांडा फोड़कर न सिर्फ सल्तनत को बचाया है बल्कि , तमाम रियाया को बचाया है तुम्हारे जैसा मर्दखोर शहज़ादा कभी शहंशाह ए आज़म बनने के लायक नहीं था , आकथू तुम्हे मर्द कहते हुए भी शर्म आती है , मल्लिका ए हुश्न अपनी कनीजों को आदेश देती है इसे दूर ले जाओ मेरी नज़रों से आदेश पाकर शहज़ादे को एक बार फिर ले जाकर रंगमहल की काल कोठरी में डाल दिया जाता है ,और तख़्लिया बोलकर मल्लिका ए हुश्न सभा समाप्त कर देती है ,

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शहज़ादे के मरदाना आशिक़ों में कुछ शहंशाह ए आज़म के वफादार सैनिकों में भी शामिल थे मगर मरदाना आशिकी के चलते वो सुल्तान के ज़्यादा वफादार बन गए थे , शहज़ादे की मर्दों के साथ जिस्मानी ताल्लुक़ात के चलते आये दिन रंगरलियां मनाई जाती थी जिसका शहंशाह ए आज़म की छवि पर बुरा असर पड़ रहा था , जिसके चलते शहंशाह ए आज़म ने शहज़ादे को रियासत से बाहर निकाल फेंका था , शहज़ादे की खूबसूरती की सारी सल्तनत क़ायल थी , औरते तो औरते मर्द भी शहज़ादे को अपनी आगोश में लेना चाहते थे ,रियासत से निकाले जाने के बाद शहज़ादा बहुत दिनों तक अकेला जंगलों में भटकता भटकता मलिका ए हुश्न की तिलस्माती नगरी में पहुंच जाता है , शहज़ादे को मल्लिका ए हुश्न की दरबार में पेश किया जाता है , तभी से शहज़ादा मल्लिका ए हुश्न का क़ैदी बन जाता है , मल्लिका ए हुश्न शहज़ादे को दिल ओ जान से चाहती है , मगर शहज़ादा के बेरुखी उसे बर्दास्त नहीं होती है ,शहंशाह ए आज़म की फ़ौज में कुछ शहज़ादे के वफादार साथी भी थे , वो शहज़ादे की खोज करते करते एक दिन मल्लिका ए हुश्न की तिलस्माती मायानगरी का पता लगा लेते हैं ।

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शहज़ादे को मल्लिका ए हुश्न की दरबार में पेश किया जाता है , शहज़ादे की नज़र ज़मीन पर गड़ी हुयी हैं , तभी मल्लिका ए हुश्न ताली बजाती है और सारा रंगमहल खाली हो जाता है , मल्लिका ए हुश्न के सामने हथकड़ियों में जकड़ा हुआ बेबस और मजबूर शहज़ादा खड़ा हुआ है , तभी कमर में बंधे हुए खंज़र को निकालती हुयी मल्लिका ए हुश्न कहती है नज़र क्यों झुकाये हुए हो शहज़ादे क्यों शर्माते हो हमसे हम तो गुलाम हैं आपके हुश्न ए जमाल के , क्या हम हसीं नहीं है और अपने जिस्म पर पहने हुआ एक एक लिबास उतार देती है ,अब मल्लिका ए हुश्न शहज़ादे की सामने पूर्णतः निर्वस्त्र है , और आगे बढ़ कर मल्लिका ए हुश्न खंज़र को शहज़ादे की गर्दन पर रख कर सर को उठा देती है , शहज़ादे की आँखों में आँखें डालकर , कहती है जी करता हैं हम आपका यहीं पर क़त्ल करदे आपका और खुद भी फनाह हो जाएँ , शहज़ादा कहता है बदजात औरत तू क्या जान प्यार क्या होता है , मल्लिका ए हुश्न मुस्कुराती कहती है अच्छा तो अब आप बातएंगे हमें प्यार क्या होता है , जो खुद मर्द होकर मर्दों के इश्क़ में खोये रहते हैं , खैर आपसे इस बारे में कोई बहस करने का कोई मतलब भी नहीं है , और शहज़ादे पर अपने रूप का कोई असर न देखकर मल्लिका ए हुश्न वापस अपना लिबास पहन लेती है , और अपनी कनीजों को आदेश देती है , की सहजादे को उसके सामने घुटनो में बिठाया जाए , आज मल्लिका ए हुश्न अपने हांथों से शहज़ादे का क़त्ल करेगी , शहज़ादे को मल्लिका ए हुश्न के सामने कदमो में झुकाया जाता है , मल्लिका ए हुश्न मोजरी से शहज़ादे का सर ऊपर उठाती है , और हाँथ पर लिया हुआ खंज़र शहज़ादे की तरफ बढाती है , की तभी एक तीर आकर मल्लिका ए हुश्न के हाँथ में लगता है और खंज़र उसके उसके हाँथ से छूट जाता है  , मल्लिका ए हुश्न पर हमला होते ही उसकी कनीजें और सिपाही उसे घेर लेते हैं , और अंधरे का फायदा उठाते हुए किसी गुप्त रास्ते से जाने कहाँ चले जाते हैं किसी को कुछ पता नहीं चलता है , इधर शहज़ादे के वफादार सैनिक उसे छुड़ा ले जाते हैं , बहुत ढूढ़ने पर भी महल में मल्लिका ए हुश्न का कोई पता नहीं चलता है ,

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क़ैद से आज़ाद होने के बाद शहज़ादा अपनी एक नयी फौज तैयार करता है ,क़ैद में सही यातनाओं के चलते शहज़ादा अंदर से क्रूर और आक्रामक हो गया था उसने आस पास के तमाम छोटे बड़े राज्यों और सूबों पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था , शहंशाह ए आज़म को अपने पुत्र की बहादुरी पर फक्र होने लगा था , बढ़ती उम्र के चलते उनके हाँथ पाँव जवाब देने लगे थे , और आखिर कार एक दिन शहज़ादे को सल्तनत का सुलतान बना दिया गया , मगर हकीकत कुछ और थी बादशाह सलामत के ज़हन में मल्लिका ए हुश्न से बदला लेने का जूनून सर पर हावी था जिसके चलते उसने अपने साथियों के साथ गहरी साज़िश रची और इस तरह से क़त्ल किया की ताकि लोगों को शक न हो की शहंशाह ए आज़म का क़त्ल किया गया है और शहज़ादे के सर इल्ज़ाम भी नहीं आया , बढ़ती बहादुरी और लोकप्रियता के चलते सुल्तान एक दिन बादशाह सलामत के खिताब से नवाज़ा जाता है , बादशाह सलामत की तमाम उपलब्धियों के बावजूद मल्लिका ए हुश्न द्वारा दी गयी यातनाएं रूह में रह रह कर कसकती है , सैनिक दिन रात बराबर मल्लिका ए हुश्न की तलाश में चारों तरफ भटकते रहते हैं , मगर लाख कोशिशों के बावजूद मल्लिका ए हुश्न का कोई पता नहीं चलता है ,

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कई सदियाँ बदली वक़्त बदला वक़्त के साथ हालात बदले मुंबई माया नगरी का बॉम्बे थिएटर तमाम हॉरर साइट्स पर एक ही ऐड चल रहा है स्केरी वर्ल्ड मूवीज बॉम्बे थिएटर में करेगा लाइव हॉरर शो हॉरर के दीवाने देश विदेश के तमाम नामचीन शख्सियत वाले लोग आमंत्रित हैं , चीफ गेस्ट के रूप में मेयर को आमंत्रित किया गया है , वेबसाइट में चल रहे लिली के लाइव हॉरर शो के ऐड पर रवी की नज़र पड़ती है , रवी पुलिस को इत्तेला करता है मगर रवी की बात पर कोई यकीन नहीं करता है , और अंततः रवी खुद लोगों को बचाने की जिम्मा अपने सिर उठा लेता है ,और पिस्तौल लेकर थिएटर के अंदर जा पहुँचता है , थिएटर के अंदर का दृश्य अत्यधिक भयावह है , सिर्फ स्टेज पर लाइट्स जल रही है , स्टेज में चल रहे लाइव शो का दृश्य कुछ इस प्रकार है , सामने खम्भे से बंधे शख्स का जिस्म घाव से छलनी है फर्श पर खून से भरे चांदी के कटोरे रखे हुए हैं , लिली की बिल्लियां उन कटोरों में भरे खून को बड़े चाव से पी रही है , इधर ऑडियंस में बैठे लोगों में से एक एक करके लोग गायब होते जा रहे हैं , रवी के अंदर पहुंचते ही हाल के सभी एग्जिट डोर पूरी तरह से लॉक कर दिए गए हैं , बाहर सिक्योरिटी का कड़ा बंदोबस्त है , तभी खम्बे से बंधे इंसान के पास जाकर लिली बोलती है मुझे आदम जात से शख्त नफरत है मगर क्या करूँ इस जिस्म को जवान रखने के लिए मुझे इंसानो का ताज़ा खून चाहिए , इंसान पैदा ही इसीलिए होता है ताकि अपने खून से मुझ जैसी चुड़ैलों की प्यास बुझा सके , और खम्भे से बंधे शख्स के सीने पर अपना हाथ रख देती है पहले शर्ट की एक एक बटन खोलती है ,फिर दूसरे ही पल अपने नुकीले नाखूनों से सीना चीरती हुयी उस शख्स का दिल निकाल कर हवा में उछाल देती है , और बोलती है मुझे नफरत है इस धड़कते हुए दिल से , जब मेरे अंदर कोई दिल नहीं है तो दुनिया में किसी भी इंसान को ये हक़ नहीं है की वो सीने में कोई दिल जैसी चीज़ रखे , जो किसी के प्यार में पल पल तड़पे और मौत भी नसीब न हो , इतना कहकर लिली स्टेज से गायब हो जाती है ,

और फिर न जाने कैसे तेज़ प्रकाश के साथ थिएटर के पीछे से निकलती है , और सामने बैठे इंसान को हवा में उठा कर दूर फेंक देती है , और मेयर के सामने आकर खड़ी हो जाती है , और मेयर की आँखों में आँखें डालकर कहती है ओह शहज़ादे तुम मुझे पता था मेरी तलाश में तुम यहां तक ज़रूर आओगे , आखिर मेरी मोहब्बत तुम्हे यहां तक खींच ही लाई , अब अपनी बर्बादी का तमाशा तुम अपनी आँखों के सामने देखोगे , वक़्त आ गया है हमारी मोहब्बत की अधूरी कहानी को पूरा करने का और अपने हाँथ मेयर के गिरेबान की तरफ आगे बढाती है , मेयर लिली का हाँथ अपने हाँथ से जकड लेता है , और अपने गले में पड़े इनरी क्रॉस का लॉकेट लिली की आँखों के सामने करता है , जिससे लिली का शरीर जलने लगता है , लिली मेयर से हाँथ छुड़ा कर भागती है , लॉकेट के संपर्क में आने से लिली का चेहरा बुरी तरह से झुलस जाता है , अपना जला हुआ चेहरा आईने में देख कर वो गुस्से से आग बबूला हो जाती है , और मेयर के ऊपर हमले की नाकाम कोशिश करती है ,

फ़्लैश लाइट चेहरे पर पड़ते ही मेयर का चेहरा स्पष्ट दिखाई देता है , वो कोई और नहीं बादशाह सलामत ही था जो

सदियों से लिली से इन्तेक़ाम की आग में जल रहा था , और उसे कई जन्मों के बाद मल्लिका ए हुश्न से बदला लेने का मौका मिला था लिली मेयर को धक्का देकर उसके सीने पर सवार हो जाती है मगर एक ही झटके में मेयर उसे अपने ऊपर से अलग कर देता है , लिली फूटबाल की भांति थिएटर की सीढ़ियों से लुढ़कती हुई स्टेज के पास आकर गिर जाती है मगर थोड़ी ही देर में वो खुद को सम्हाल लेती है , और उसकी एक भयानक चीख से सारा थिएटर गूँज जाता है , मेयर उड़ता हुआ लिली की तरफ बढ़ता है , तब तक लिली भी स्टेज में पहुंच जाती है , दोनों के आमने सामने होते ही थिएटर में तेज़ बिजली कौंधती है , जैसे आस्मां पर भी क़यामत आगयी हो बिजली की कौंध से लिली की बिल्ली बनी दासियाँ जो स्टेज पर कटोरे में रख खून पी रही थी डर के मारे अपने असली रूप में आकर एक एक कोने में दुबक जाती हैं , , सारा का सारा आलम ख़ौफ़ज़दा हो जाता है , तभी मेयर लिली के पास आकर उसकी गर्दन पकड़ लेता है , मगर लिली अपने आस्तीन में छुपाया हुआ खंज़र निकाल कर मेयर के पेट में घोंप देती है और अपनी जीव मेयर की गर्दन पर फेरती हुयी धीरे से अपने दांत गर्दन में गड़ा देती है और अपनी दासियों (कनीज़ों) को आदेश देती हैं जान से मार दो सहजादे को मुझे अब इसके जिस्म की कोई ज़रुरत नहीं वो भी इसके इश्क़ की तरह उसी दिन ख़त्म हो गया था जिस दिन इसने आवारा मर्द आशिक़ों के इश्क़ में पड़ कर मुझे छोड़ दिया था , लिली की दासियाँ एक एक करके मेयर के शरीर में जोंक की तरह चिपक जाती हैं , और उसका खून चूसने लगती हैं ,

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घायल लिली मेयर की दुर्दशा देख कर खुश हो जाती है , तभी रवी अपने हाँथ की घडी की तरफ देखता है सुबह के ५ बजने वाले थे बाहर परिंदों की गुटरगूँ और चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ को साफ़ महसूस किया जा सकता था , दोनों को तड़पता हुआ देख रवी थिएटर की छत की तरफ रिवॉल्वर से गोली चला देता है , छत में एक सुराख हो जाता है , जिससे सूर्या की रोशनी छन छन के अंदर आने लगती है , और धीरे धीरे लिली लिली की दासियों और मेयर का जिस्म सूर्य की रोशनी के संपर्क में आकर जलने लगता है , दर्द से तड़पती हुयी लिली रवी को पहचान जाती है , और रवी की तरफ एक मुस्कान देती हुयी आसमान की तरफ उड़ जाती है , और अंत में छत से टकरा जाती है , और जल कर वहीँ ख़ाक हो जाती है लिली इतना तेज़ छत से टकराती है की छत का बहुत बड़ा हिस्सा टूट जाता है , और सूर्य की रौशनी काफी मात्रा में अंदर आने लगती है जिससे मेयर और लिली की दासियाँ एक एक करके जल जाती है , तभी पुलिस और सिक्योरिटी गार्ड्स थिएटर के अंदर प्रवेश करते हैं , और अंदर का हाल देखकर हैरान रह जाते हैं , और रवी वहाँ से निकल कर अपने घर चला जाता है , और अपनी नयी हॉरर स्टोरी लिखने में लग जाता है ।

story finish,

pics taken by google ,