vintage horror stories in hindi ghost of ancestors ,

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सत्य घटना पर आधारित ये कहानी बुंदेलखंड और बघेल खंड से सटे एक ऐसे गाँव की है जो पुरातन काल से ही भूतों का अड्डा रहा है , ये कहानी आज से लगभग ६० दसक पहले से सुरु होती है , देश को आज़ाद हुए अभी कुछ वक़्त ही हुआ था , देश का जहां माहौल बदल रहा था , वहीँ दुरेहा जनेह और सलेहा के पास एक गाँव जहां सतानन्द नाम के व्यक्ति का परिवार ख़ुशी ख़ुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहा था , सता के दो बेटे एक बेटी थी बड़े बेटे का नाम राम दीन जो लगभग ८ साल तथा छोटे बेटे का नाम गज्जू था जिसकी उम्र ६ साल थी और बेटी का नाम पारवती जो मात्र ३ साल की थी , मगर वक़्त कब किसका होता है , वक़्त की आँधी ऐसी चली की सब कुछ एक झटके में बहा ले गयी , रात का वक़्त था , सतानन्द को सीने में दर्द हुआ कर वो वहीँ ढेर हो गया , शायद वो हार्ट अटैक था जिसके चलते उसकी मौत हो गयी , सता का कोई सगा भाई नहीं था बस चचेरा परिवार था , खपरैल वाला घर था बच्चों के रोने की आवाज़ सता के घर से लगे बाजू वाले चचेरे भाइयों ने सुनी , वो तुरंत सता के घर आये , वो समझ गए थे भैया भाभी की मौत हो गयी है , उन्होंने रामदीन और गज्जू को बोला की तुम्हारे माता पिता सो रहे हैं चलो हमारे घर तुन्हे खाना देते हैं , और उन्हें खाने को रोटी देदी , इसके पश्चात परिवार वालों ने रात भर घर का सामान ढोया कहते हैं सतानन्द के पास एक सोने की सूअर भी थी जो उस समय बहुत ही धनाढ्य लोगों के पास पायी जाती है , और इसके बाद सुबह परिवार वालों ने हल्ला मचा दिया जिससे सारा गाँव इकठ्ठा हो गया ,

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बच्चे बहुत छोटे थे , जिसके चलते सबने निश्चय किया की बच्चों को उन्ही के पास के गाँव गंज में उनकी मौसी के यहां पंहुचा दिया जायेगा , चूँकि घर दुरेहा में था तो दोनों जगह की प्रॉपर्टी को सम्हाल पाना मौसी मौसिया के बस की बात नहीं थी वो भी सीधे साधे असहाय और जर्जर थे , उनकी माली हालत सही नहीं थी सता की जायदाद को उन्होंने सता के बच्चे रामदीन, गज्जू और पार्वती के लिए सम्हाल के रखा था , बाकी ज़मीन जायदाद पर सता के परिवार वालों ने कब्ज़ा जमा लिया था , सता के मासूम बच्चे अपने ही खेत में मज़दूर बनकर रह गए थे , रामदीन बच्चों में सबसे बड़ा था जिससे अपने भाई बहनो की ये दुर्दशा नहीं देखी गयी ,और नन्ही सी जान रामदीन ने घर छोड़ने का निश्चय कर लिया , और आखिर एक दिन वो घर से भाग ही गया ।

मौसी मौसिया की माली हालत और परिवार वालों की लापरवाही की वजह से गज्जू और पारवती की पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पायी । हो गया बच्चे किसी तरह बड़े हो रहे थे ।

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कुछ दिनों बाद गंज में रामदीन के मौसी मौसिया के मकान में पूजा का एक कमरा जिसमे राधा कृष्णा की मूर्ती रखी थी वहीँ मौसी मौसिया ने सता के बच्चों के लिए उसकी धनदौलत एक संदूकची में सम्हाल के रख दी थी , लेकिन उस कमरे में रात के १२ के बाद कुछ लूटेरों ने डाका डाला और संदूकची को खपरैल के रास्ते से चुरा कर भागने के फिराक में खपरैल तक लेकर गए जैसे ही खपरैल में ऊपर रखे , जाने क्या हुआ की उन डकैतों की आँख में अचानक दिखना ही बन हो गया , जिसके चलते डकैत सारी रात , खपरैल में ही चुप चाप बैठे रहे , जब सुबह हुयी लोग जागे अपने घरों से बाहर निकले लोगों ने डकैतों को खपरैल में बैठे देखा उन्हें नीचे उतरा उनकी इस हरकत से गुस्साए लोगों ने उनकी पिटाई करने की कोशिश की मगर रामदीन दीं के मौसी मौसिया ने उन्हें माफ़ कर दिया और बोले इसकी पाप की सज़ा इन्हे ईश्वर दे चूका है अंधे हो गए बेचारे अब मैं इन्हे और कष्ट में नहीं देखना चाहता डकैतों ने उनके पाँव पकड़ लिए माफ़ी माँगी और वहाँ से चले गए ।

दिन गुज़र रहे थे , बच्चे अब बड़े हो गए , सता के छोटे बेटे का विवाह हो चूका था उसके भी बच्चे हो चुके थे , रामदीन घर से भाग कर मुंबई चला गया था वो भी अब बड़ा हो गया था , बड़ा आदमी तो नहीं बना मगर होटल में कप प्लेट साफ़ कर के ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई से ज़रूर अवगत हो चुका था उसकी उम्र ३० से ज़्यादा हो चुकी थी , वो भी अपने घर दुरेहा लौट चुका था , और अपने परिवार वालों से अपनी ज़मीन का बचा खुचा कुछ हिस्सा भी लड़ झगड़ के हासिल कर लिया था , बाकी ज़मीन जायदाद परिवार वाले पहले ही हड़प चुके थे , राम दीन और गज्जू का गाँव में जंगल से सटा एक खेत था जिस में जंगली जानवरों के द्वारा भारी नुकशान का खतरा हमेशा बना रहता था , जिसके कारण गज्जू और रामदीन रात भर खेत में रहकर ही रखवाली किया करते थे ,

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एक दिन शाम ढलते ही रामदीन जब घर से खेत की तरफ जा रहा था , तो बेर की झंकाडियों के पार एक अच्छा लम्बा चौड़ा हष्ट पुष्ट पहलवान सरीखे इंसान दिखाई दिया , रामदीन अपने खेत में अनजान शख्स को देख कर पूछा कौन हो भाई पहलवान बोला आदमी हूँ दिखता नहीं है क्या , रामदीन का माथा ठनका की आखिर कौन है ये शख्स रामदीन ने पूछा यहां कहाँ घूम रहे हो पहले कभी तुम्हे गाँव में नहीं देखा , पहलवान ने बोला अब तुमसे पूछकर हमें आना जाना पड़ेगा , ज़मीन जायदाद है हमारी अपनी ज़मीन की रखवाली कर रहे हैं , रामदीन को गुस्सा आगया , वो उस शख्स से उलझ पड़ा , न वो शख्स हारने का नाम ले रहा था न रामदीन बेर की झंकाड़ी में कई बार उठा पटक के कारण रामदीन लहू लुहान हो चुका था , तभी वहां से गज्जू गुज़रा वो रामदीन को देखकर बोला क्या हुआ दादा मधुमक्खी खा ली आपको क्या जो ये जरबा में लोट रहे हैं , रामदीन बोला ये आदमी हमारे खेत में घुसा था मुझसे गमरा रहा था तो धर के कूच दिए साले को , गज्जू बोलता है दादा कौन आदमी , किसकी बात कर रहे हो आप , रामदीन बोला गज्जू तुझे ये इतना बड़ा सांड जैसा पहलवान नहीं दिखाई दे रहा है , वो जैसे ही उस पहलवान की तरफ इशारा करता है , पहलवान ग़ायब हो जाता है । रामदीन कहता है अरे कहाँ गया ये आदमी अभी तो यहीं था । गज्जू समझाता है दादा कोई भूत भयार रहा होगा , रामदीन गज्जू को तू भी न कहता हुआ खेत की तरफ बढ़ जाता है ।

कुछ रातों से उन्होंने ने जंगल से लगी पगडण्डी पर कुछ कुछ मशालों के काफिले को बढ़ते देखा जो की लगभग एक किलोमीटर की यात्रा के बाद अपने आप बंद हो जाती थीं , रामदीन ने गज्जू से पूछा न छोटे ये लोग कौन हैं जो आधी रात में जंगल के रास्ते से मशाल लेकर निकलते हैं , गज्जू बोलता है पता नहीं दादा कौन हैं , मगर इस मशाल वालों की यात्रा से रात की वीराने में बड़ा सुकून मिलता है ।

गज्जू की बात सुनकर रामदीन को बड़ा आश्चर्य होता है कैसा है ये आदमी कोई खड़ी फसल में तीली फेंक दे तो आग लग जाती है और ये कह रहा है इन मशालों की यात्रा को देखकर इसे सुकून मिलता है , रामदीन बड़े शहर में पला बढ़ा था , और दिल से मजबूत था , वो निश्चय करता है की रात में मशाल लेके कौन लोग निकलते हैं , दूसरी रात का पहला पहर भी अभी नहीं बीता था रामदीन अकेला ही जंगल का रुख कर लेता है और उस पगडंडी में जाकर पहले से छुप जाता है , जहां से मशाल लिए लोग निकलते हैं , झाड़ियों के पीछे रामदीन छुपा ही था की थोड़ी ही देर में मशाल यात्रा जंगल से आती हुयी दिखाई देती है और पगडंडियों से होती हुयी आगे बढ़ जाती है मगर ये क्या आखरी का मशाल वाला आदमी रुक जाता है , और आवाज़ देता है क्या बेटा रामदीन काका को तम्बाकू नहीं खिलाओगे , रामदीन सकपका जाता है , की आखिर ये आदमी कौन है , जो उसे पहले से जानता है रामदीन बाहर आता है , क्यों नहीं अभी खिलाता हूँ , रामदीन तम्बाकू मलता है सामने खड़े बुजुर्ग को देता है मशाल की लौ में बुजुर्ग का चेहरा स्पष्ट दिखाई देता है , रामदीन सामने अपने पिता को देखकर स्तब्ध रह जाता है और तभी वो मशाल वाला शख्स वहाँ से ग़ायब हो जाता है ।

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उसके पिता जी का चेहरा आज भी उसके ज़हन में उसी तरह घूमता रहता है , वो चेहरा देखने के बाद रामदीन सारी रात चैन से सो नहीं पाता है , सुबह होती ही वो अपने मौसी मौसिया के घर जाता है, और रात की घटना की ज़िक्र छेड़ देता है , मौसा बताते हैं बेटा गाँव में इसीलिए लोगों का अंतिम संस्कार उनके अपने खेतों में किया जाता है ताकि उनके पूर्वज की आत्माएं कहीं और न भटके , और वो उनके उत्तराधिकारियों के हक़ की रक्षा करती हैं , ,ये बात सुनते ही रामदीन का गला भारी और आँखें नाम हो जाती हैं और वो चुप चाप वहाँ से उठकर चला जाता है ।।

मौसी मौसिया समझाते हैं बेटा जब तुम्हारे माता पिता की मृत्यु हुयी तुम बहुत छोटे थे , तुम्हारे परिवार वालों ने ठीक से उनका तर्पण नहीं किया था जिसके कारण आज भी वो आत्माएं भटक रही हैं , एक बार पुनः पूरे विधि विधान से रामदीन अपने भाई बहन और परिवार के साथ मिलकर अपने पूर्वजों का तर्पण करवाता है ताकि उसके पूर्वजों की आत्माओं का इस तरह भटकना बंद हो जाए और तर्पण के बाद उसके उसके पूरवजों की आत्माओं का भटकना बंद हो जाता है ॥

pix taken by google ,