भूतिया अस्पताल | डरावनी हिंदी हॉरर कहानी पूरी | भूत की सच्ची घटना जैसी
भूतिया अस्पताल शैली: हॉरर थ्रिलर समय: रात का समय, पुराना परित्यक्त अस्पताल सीन 1: एक्सटीरियर – अस्पताल का मुख्य द्वार (कैमरा: वाइड शॉट, धीमी पैन से बारिश भरी रात में पुराने, जर्जर अस्पताल के द्वार पर फोकस। बिजली चमकती है, हवा में कोहरा घना। बैकग्राउंड में दूर से सायरन की आवाज़ आ रही है।) राहुल (एक युवा पत्रकार, टॉर्च लिए, गेट पर खड़ा): “ये जगह तो सच में श्रापित लग रही है। पुरानी खबरें कहती हैं कि 20 साल पहले यहाँ एक महामारी हुई थी, और सभी डॉक्टर रातों-रात गायब हो गए।” (वह गेट धकेलता है। कर्कश आवाज़ गूंजती है। कैमरा उसके चेहरे पर ज़ूम इन, आँखों में उत्सुकता और डर का मिश्रण।) राहुल (खुद से बुदबुदाते हुए): “सिर्फ़ एक घंटा, बस एक स्टोरी के लिए।” सीन 2: इंटीरियर – लॉबी (कैमरा: हैंडहेल्ड शॉट, कँपते हुए, जैसे राहुल खुद कैमरा चला रहा हो। धूल भरी मेजें, टूटी कुर्सियाँ। दीवारों पर खून जैसे दाग़। अचानक लाइट फ्लिकर करती है।) राहुल (टॉर्च घुमाते हुए): “हैलो? कोई है यहाँ?” (अचानक एक ठंडी हवा चलती है। कैमरा पैन करता है एक पुरानी रोगी रजिस्टर की तरफ़। पन्ने खुद-ब-खुद पलटने लगते हैं। राहुल चौंकता है।) राहुल (डरते हुए): “ये… ये हवा कैसे? कोई ट्रिक तो नहीं?” (हॉरर सीन: अचानक एक छाया दीवार पर सरकती हुई दिखाई देती है – एक नर्स का भूत, सफ़ेद यूनिफॉर्म में, चेहरा छिपा। कैमरा क्विक कट से राहुल के चेहरे पर जाता है, उसकी साँसें तेज़। साउंड: दिल की धड़कन जैसी बीट।) सीन 3: कॉरिडोर – सर्जरी रूम की ओर (कैमरा: लो एंगल शॉट, राहुल के पैरों से ऊपर की ओर, जैसे कोई नीचे से घूर रहा हो। दीवारों पर पुराने पोस्टर्स, ‘डॉक्टर सावित्री’ का नाम चमकता है।) (राहुल का फ़ोन बजता है। वह रुकता है।) राहुल (फ़ोन पर, दोस्त से): “अरे यार, मैं अंदर पहुँच गया। ये जगह… कुछ गड़बड़ है। तू बाहर इंतज़ार कर।” दोस्त (फ़ोन पर, घबराते हुए): “भाई, निकल जा वहाँ से! लोकल्स कहते हैं, रात में भूत डॉक्टर घूमते हैं। वो मरीज़ों को फिर से काटते हैं!” (कॉल कट। कैमरा ओवर द शोल्डर राहुल के पीछे, एक दरवाज़ा खुलने की आवाज़। राहुल मुड़ता है।) राहुल: “कौन है?” (हॉरर सीन: सर्जरी रूम से एक सर्जिकल चाकू ज़मीन पर गिरने की आवाज़। कैमरा डच एंगल से टेबल पर ज़ूम – खून से सना चाकू, और धीरे-धीरे एक हाथ दिखता है, नीला, सड़ता हुआ। राहुल भागता है, लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो जाता है। साउंड: चीख़ें गूंजती हैं, जैसे पुराने ऑपरेशन थिएटर से।) सीन 4: ऑपरेशन थिएटर (कैमरा: सर्कुलर पैन, कमरे के बीच में घूमते हुए। पुरानी सर्जरी टेबल, मरीज़ का कंकाल जैसा स्केलेटन लटका। लाइट्स फ्लैश करती हैं।) (राहुल अंदर घुसता है, साँसें फूल रही हैं।) राहुल (खुद से): “शांत रह, ये सिर्फ़ हवा है। स्टोरी मिल जाएगी।” (अचानक, टेबल पर एक भूत नर्स प्रकट होती है – डॉक्टर सावित्री का भूत, आँखें खाली, सफ़ेद साड़ी में। कैमरा हाई एंगल से ऊपर से देखता है, जैसे भूत नीचे से उठ रहा हो।) डॉक्टर सावित्री (भूतिया आवाज़ में, धीमी, गूंजती): “तुम… नया मरीज़ हो? आओ, ऑपरेशन शुरू करते हैं। तुम्हारा दिल… अभी भी धड़क रहा है।” राहुल (पीछे हटते हुए, चिल्लाते): “तुम कौन? ये क्या बकवास है?” (हॉरर सीन: भूत हाथ बढ़ाता है। कैमरा क्लोज़-अप राहुल के चेहरे पर – पसीना टपकता। अचानक, कमरे में पुराने मरीज़ों के भूत उभर आते हैं – चीख़ते, हाथ फैलाए। एक भूत राहुल के कंधे पर हाथ रखता है। साउंड: हड्डियाँ टूटने की क्रंचिंग आवाज़। राहुल ज़मीन पर गिर पड़ता है।) डॉक्टर सावित्री (हँसते हुए): “यहाँ हर रात ऑपरेशन होता है। तुम्हें भी काटना पड़ेगा… ताकि दर्द हमेशा रहे।” सीन 5: बेसमेंट – मॉर्ग (कैमरा: डार्क विज़न, ग्रीन टिंट, जैसे नाइट विज़न। सीढ़ियाँ उतरते हुए शॉट, हर कदम पर क्रेकिंग साउंड।) (राहुल भागता हुआ बेसमेंट पहुँचता है, दरवाज़ा बंद।) राहुल (सिसकते हुए): “बाहर… किसी को बुलाना पड़ेगा।” (वह मोबाइल निकालता है, लेकिन सिग्नल ज़ीरो। कैमरा पॉइंट ऑफ़ व्यू से उसके हाथों पर – काँपते हुए।) (हॉरर सीन: मॉर्ग के दरवाज़े खुलते हैं। अंदर लाशों के डिब्बे। एक डिब्बा खुलता है, और एक बच्चे का भूत निकलता है – पीला चेहरा, आँखें काली। कैमरा स्लो मोशन में बच्चे के चेहरे पर ज़ूम।) बच्चे का भूत (मीठी, लेकिन डरावनी आवाज़ में): “अंकल… खेलोगे? डॉक्टर आंटी कहती हैं, इंजेक्शन लगाओगे तो दर्द नहीं होगा।” राहुल (चिल्लाते हुए): “नहीं! दूर रहो!” (भूत बच्चा दौड़ता है। कैमरा ट्रैकिंग शॉट राहुल के पीछे। अचानक, सारी लाशें उठ खड़ी होती हैं – ज़ॉम्बी जैसे, हाथ फैलाए। कमरा भर जाता है चीख़ों से। राहुल एक कोने में छिपता है। साउंड: मृतकों की सिसकियाँ।) सीन 6: क्लाइमेक्स – लॉबी वापस (कैमरा: रैपिड कट्स, फास्ट पेस्ड। राहुल भागता हुआ लॉबी पहुँचता है।) राहुल (दरवाज़े पर धमकाते हुए): “खुल जा! प्लीज़!” (भूत डॉक्टर सावित्री पीछे से आती है, घेरा बनाते हुए अन्य भूतों के साथ।) डॉक्टर सावित्री: “यहाँ से कोई नहीं निकलता। तुम हमारा नया साथी हो।” (हॉरर सीन: कैमरा स्प्लिट स्क्रीन – एक तरफ़ राहुल का चेहरा, दूसरी तरफ़ भूतों का हमला। अचानक, बिजली चमकती है, और सारे भूत गायब। लेकिन राहुल का हाथ कट जाता है – खून बहता है। कैमरा क्लोज़-अप उसके घाव पर।) राहुल (फूट-फूटकर रोते हुए): “ये… सपना था? या हकीकत?” (वह बाहर भागता है। कैमरा वाइड शॉट – अस्पताल का द्वार बंद हो जाता है। अंत में, एक आखिरी छाया खिड़की से झाँकती है।) एंड क्रेडिट्स (स्क्रीन पर टेक्स्ट: “क्या भूत सच में मरते हैं? या अस्पताल की दीवारें ही उनकी कब्र हैं?”) (फेड आउट। बैकग्राउंड म्यूज़िक: डरावना पियानो।)
गहरा अंधेरा समय: 21 फरवरी 2026, रात 2:15 AM (राहुल रूफटॉप पर खड़ा है, बारिश में भीगा हुआ। उसका हाथ
अभी भी खून बहा रहा है, लेकिन घाव अब ठीक-ठाक बंद हो चुका लगता है – जैसे कोई अदृश्य ताकत ने उसे रोक दिया हो।) सीन 8: रूफटॉप – जारी (कैमरा: वाइड शॉट, बारिश की बूंदें स्लो मोशन में गिरती हुईं। बिजली चमकती है, पूरी इमारत एक सेकंड के लिए सफेद हो जाती है।) राहुल (खुद से, काँपते हुए): “सब खत्म हो गया… वो सब गायब हो गए। मैं बाहर निकल सकता हूँ।” (वह सीढ़ियों की तरफ बढ़ता है। लेकिन जैसे ही वह दरवाज़ा खोलने वाला होता है, दरवाज़ा अपने आप बंद हो जाता है। लॉक क्लिक की आवाज़।) राहुल (दरवाज़ा पीटते हुए): “नहीं… नहीं फिर से!” (हॉरर मोमेंट: पीछे से हल्की-हल्की फुसफुसाहट शुरू होती है। कई आवाज़ें एक साथ – जैसे पुराने मरीज़ों की सिसकियाँ। कैमरा 360 डिग्री घूमता है। रूफटॉप पर धीरे-धीरे छायाएँ उभरने लगती हैं।) डॉक्टर सावित्री (पीछे से, शांत लेकिन गूंजती आवाज़ में): “तुम सोचते हो कूदकर बच जाओगे? नीचे भी हमारा ही अस्पताल है… बस थोड़ा और गहरा।” राहुल (मुड़कर): “तुम मर चुकी हो! सब मर चुके हो! मुझे क्यों परेशान कर रही हो?” डॉक्टर सावित्री (धीरे-धीरे पास आती हुई, उसका चेहरा बारिश में चमकता): “क्योंकि तुमने हमारी कहानी सुनी। तुमने हमारा दर्द रिकॉर्ड करने की कोशिश की। अब तुम हमारा हिस्सा हो।” (अचानक राहुल के पैरों के पास एक पुराना सर्जिकल टूल गिरता है – स्कैल्पेल। वह उठाता है, डरते हुए।) राहुल: “मैं… मैं लड़ सकता हूँ!” (हॉरर सीन: डॉक्टर सावित्री हँसती है। उसकी हँसी में अन्य भूतों की आवाज़ें मिल जाती हैं। कैमरा उसके चेहरे पर क्लोज़-अप – आँखें पूरी काली, मुँह से काला धुआँ निकलता हुआ।) सीन 9: रूफटॉप से वापस अंदर – सीढ़ियाँ नीचे (राहुल दरवाज़ा तोड़कर अंदर घुसता है। कैमरा हैंडहेल्ड, तेज़-तेज़ कट्स। वह सीढ़ियाँ उतरता है, लेकिन हर मंजिल पर कुछ बदल जाता है।) थर्ड फ्लोर: पुराना ICU। मॉनिटर बीप कर रहे हैं, लेकिन कोई मरीज़ नहीं। अचानक एक मॉनिटर पर राहुल का नाम फ्लैश होता है – “पेशेंट: राहुल द्विवेदी, हार्ट रेट: 180″। राहुल (रुककर): “ये… ये मेरा नाम है?” (एक नर्स का भूत बिस्तर से उठता है, इंजेक्शन हाथ में।) नर्स: “तुम्हारा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा है। हमें शांत करना होगा।” राहुल (भागते हुए): “दूर रहो!” सीन 10: सेकंड फ्लोर – पुराना लेबर रूम (कैमरा: लाल टिंट, जैसे इमरजेंसी लाइट जल रही हो। पुरानी डिलीवरी टेबल। दीवार पर बच्चे के रोने की आवाज़।) (राहुल अंदर घुसता है। एक औरत का भूत बिस्तर पर लेटी है, पेट फूला हुआ।) औरत का भूत (दर्द भरी आवाज़ में): “मेरा बच्चा… डॉक्टर ने उसे मार डाला। अब तुम्हें भी मारना होगा… ताकि दर्द खत्म हो।” (हॉरर सीन: औरत का पेट फटने लगता है। अंदर से छोटे-छोटे हाथ निकलते हैं। बच्चे के भूत बाहर आने लगते हैं। वे राहुल की तरफ बढ़ते हैं। साउंड: कई बच्चों की एक साथ चीख़।) राहुल (पीछे हटते हुए): “मैंने कुछ नहीं किया! मैं सिर्फ़ देखने आया था!” सीन 11: ग्राउंड फ्लोर – पुरानी लाइब्रेरी/रिकॉर्ड रूम (राहुल यहाँ पहुँचता है। पुरानी फाइलें, डॉक्टरों के नोट्स। वह एक फाइल खोलता है।) राहुल (पढ़ते हुए): “डॉक्टर सावित्री… महामारी के दौरान गलत दवाइयाँ दीं। 147 मरीज़ मरे। फिर खुद को जिंदा जला लिया… लेकिन आत्मा नहीं मरी।” (अचानक किताबें खुद-ब-खुद उड़ने लगती हैं। एक किताब राहुल के सिर पर लगती है।) डॉक्टर सावित्री (कमरे में प्रकट होकर): “तुमने पढ़ लिया। अब तुम जानते हो। अब तुम भी दोषी हो।” (सारे भूत इकट्ठा हो जाते हैं – नर्स, बच्चे, मरीज़, डॉक्टर। वे एक सर्कल बनाते हैं। राहुल बीच में फँस जाता है।) राहुल (चिल्लाते हुए): “मुझे छोड़ दो! मैं वादा करता हूँ… मैं तुम्हारी कहानी दुनिया को बताऊँगा!” डॉक्टर सावित्री: “बहुत देर हो चुकी है। अब तुम हमारी कहानी बन जाओगे।” सीन 12: क्लाइमेक्स ट्विस्ट – मॉर्ग में वापसी (अचानक राहुल को धक्का लगता है। वह सीढ़ियों से नीचे गिरता है – सीधे बेसमेंट मॉर्ग में।) (कैमरा: ग्रीन नाइट विज़न। सारे बॉडी ड्रॉअर्स खुल चुके हैं। लाशें खड़ी हैं।) राहुल (ज़मीन पर गिरकर): “ये… ये अंत है?” (एक लाश आगे बढ़ती है। उसका चेहरा… राहुल जैसा ही है।) राहुल का भूत (खुद से): “स्वागत है… नए मरीज़। अब तुम भी यहीं रहोगे। हमेशा के लिए।” (कैमरा क्लोज़-अप राहुल के चेहरे पर – उसकी आँखें धीरे-धीरे काली हो रही हैं।) राहुल (आखिरी बार, फुसफुसाते हुए): “मैं… मैं बाहर निकलना चाहता हूँ…” (स्क्रीन ब्लैक। साउंड: एक आखिरी दिल की धड़कन, फिर सन्नाटा।) टेक्स्ट ऑन स्क्रीन (एंडिंग): “कुछ कहानियाँ कभी खत्म नहीं होतीं। वो बस नए मरीज़ ढूँढती रहती हैं। श्री राम अस्पताल… अभी भी इंतज़ार कर रहा है।” फेड आउट। (बैकग्राउंड में दूर से एक बच्चे की हँसी और डॉक्टर की हँसी मिलकर गूंजती है।)
आत्मा का बदला समय: 21 फरवरी 2026, रात 2:45 AM (स्क्रीन अभी भी ब्लैक है। धीरे-धीरे साउंड आता है – एक
दिल की धड़कन, लेकिन अब वो धड़कन धीमी हो रही है… जैसे कोई मर रहा हो। अचानक एक तेज़ चीख़, और स्क्रीन पर रोशनी।) सीन 13: मॉर्ग – राहुल का जागना (कैमरा: ग्रीन नाइट विज़न। राहुल ज़मीन पर पड़ा है। उसके चारों तरफ़ बॉडी ड्रॉअर्स खुली हुईं। लेकिन अब वो अकेला नहीं है। उसके सामने… उसका अपना भूत खड़ा है – आँखें काली, चेहरा पीला, लेकिन कपड़े वही जो राहुल पहने हुए हैं।) राहुल (खुद को देखकर, घबराते हुए): “ये… ये मैं हूँ? नहीं… ये सपना है!” राहुल का भूत (धीमी, ठंडी आवाज़ में): “सपना नहीं। अब तू हमारा हिस्सा है। डॉक्टर सावित्री ने तेरा दिल ले लिया… लेकिन तू अभी जीवित है। थोड़ी देर के लिए।” (हॉरर सीन: राहुल उठने की कोशिश करता है। उसका हाथ अब पूरी तरह कटा हुआ नहीं – बल्कि एक काले धुएँ जैसा है। कैमरा क्लोज़-अप उसके हाथ पर।) राहुल: “मैं बाहर जाऊँगा… किसी को बताऊँगा… ये जगह बंद करवाऊँगा!” राहुल का भूत (हँसते हुए): “बाहर? बाहर कोई नहीं बचता। देख… तेरी दोस्त ने तुझे कॉल किया था।” (अचानक राहुल का फ़ोन ज़मीन पर गिरा हुआ बजता है। स्क्रीन पर नाम: “प्रिया (दोस्त)”। वह उठाता है।) प्रिया (फ़ोन पर, डरते हुए): “राहुल! कहाँ है तू? मैं अस्पताल के बाहर हूँ। गेट बंद है… अंदर से चीख़ें आ रही हैं!” राहुल (चिल्लाते हुए): “प्रिया! भाग! मत आना अंदर! ये जगह… ये जगह हमें मार डालेगी!” (लाइन कट जाती है। अचानक कमरे में लाइट्स फ्लिकर करती हैं। डॉक्टर सावित्री प्रकट होती है – अब उसके हाथ में एक पुराना इंजेक्शन है, जिसमें काला तरल है।) डॉक्टर सावित्री: “अब आखिरी डोज़। इससे तू हमेशा के लिए हमारा हो जाएगा। कोई दर्द नहीं… बस अनंत दर्द।” (राहुल भागने की कोशिश करता है। कैमरा ट्रैकिंग शॉट – वह सीढ़ियाँ चढ़ता है, लेकिन हर कदम पर दीवारें खून से भर जाती हैं।)
सीन 14: ग्राउंड फ्लोर – इमरजेंसी वार्ड (राहुल यहाँ पहुँचता है। पुरानी स्ट्रेचर पड़ी हैं। एक स्ट्रेचर पर… प्रिया लेटी हुई है – लेकिन वो बेहोश है, या मरी हुई?) राहुल (चिल्लाते हुए): “प्रिया! नहीं!” (वह पास जाता है। प्रिया की आँखें खुलती हैं – लेकिन आँखें काली।) प्रिया का भूत (मीठी आवाज़ में): “राहुल… तू आ गया। अब हम साथ में रहेंगे। डॉक्टर आंटी ने मुझे भी ऑपरेशन कर दिया।” राहुल (पीछे हटते हुए): “तू… तू असली नहीं है! ये झूठ है!” (हॉरर सीन: प्रिया उठती है। उसके पीछे से कई नर्सों के भूत आते हैं – सफ़ेद यूनिफॉर्म में, चेहरे सड़े हुए। वे गाना गाते हैं – “इंजेक्शन लगाओ… दर्द खत्म हो जाएगा…”)
सीन 15: मुख्य लॉबी – अंतिम लड़ाई (राहुल लॉबी में पहुँचता है। गेट अभी भी बंद। बाहर बारिश तेज़। वह गेट पीटता है।) राहुल: “कोई… मदद करो! प्लीज़!” (पीछे से सभी भूत इकट्ठा हो जाते हैं। डॉक्टर सावित्री आगे आती है।) डॉक्टर सावित्री: “तूने हमारा राज़ जान लिया। अब तू हमारा नया डॉक्टर बनेगा। हर रात नए मरीज़ लाएगा… जैसे मैं लाती थी।” राहुल (स्कैल्पेल उठाकर): “नहीं! मैं तुम्हें रोकूँगा!” (क्लाइमेक्स हॉरर सीन: राहुल स्कैल्पेल से डॉक्टर सावित्री पर वार करता है। लेकिन स्कैल्पेल उसके शरीर से गुजर जाता है – जैसे वो हवा हो। अचानक कमरे में आग लग जाती है – पुरानी यादें: महामारी की रात, जब डॉक्टर सावित्री ने खुद को जला लिया था।) डॉक्टर सावित्री (चिल्लाते हुए): “दर्द… हमेशा दर्द!” (आग बढ़ती है। भूत जलने लगते हैं। राहुल गेट की तरफ़ भागता है। गेट अचानक खुल जाता है।) राहुल (बाहर निकलते हुए): “मैं… मैं बच गया?” सीन 16: एपिलॉग – बाहर (कैमरा: वाइड शॉट। राहुल बारिश में भागता हुआ सड़क पर। पीछे अस्पताल जल रहा है – लेकिन सिर्फ़ एक पल के लिए। फिर सब सामान्य हो जाता है। अस्पताल वैसा ही खड़ा है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं।) राहुल (साँस लेते हुए, खुद से): “सब खत्म… मैं बाहर हूँ।” (वह अपना फ़ोन निकालता है। स्क्रीन पर एक वीडियो रिकॉर्डिंग – लेकिन वीडियो में वो अस्पताल के अंदर है, ऑपरेशन टेबल पर लेटा हुआ, और डॉक्टर सावित्री चाकू चला रही है।) राहुल (काँपते हुए): “ये… ये कब रिकॉर्ड हुआ?” (कैमरा उसके चेहरे पर क्लोज़-अप। उसकी आँखें धीरे-धीरे काली हो रही हैं।) टेक्स्ट ऑन स्क्रीन: “कुछ आत्माएँ कभी नहीं मरतीं। वो बस नए शरीर ढूँढती हैं। राहुल अब अस्पताल का हिस्सा है… हमेशा के लिए। श्री राम अस्पताल… अगला मरीज़ आप हो सकते हैं।” एंड क्रेडिट्स। (बैकग्राउंड में हल्की हँसी और दिल की धड़कन। स्क्रीन ब्लैक।)


















