सीन 20 – पुलिस जीप में (रात) कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार जीप की पिछली सीट पर बैठा है। हाथ पीछे हथकड़ी में। कंधे और कमर से खून रिस रहा है। आँखें खुली हुई। बगल में दो सिपाही बंदूक ताने बैठे हैं। सिपाही 1: “साला इतना खून बहने के बाद भी मर नहीं रहा… सच में चंबल का भूत है।” जोरवार सिर घुमाए बिना बोलता है। जोरवार (धीमी, भारी आवाज़ में): “मरना आसान है… जीना मुश्किल। तुम अभी दोनों नहीं समझोगे।” कैमरा: जीप के बाहर का शॉट – अँधेरी सड़क। आगे नेता वाली जीप जा रही है। जोरवार की नज़र नेता वाली जीप पर टिकी रहती है। सीन 21 – थाने में (देर रात) कैमरा: वाइड शॉट – पुराना थाना। बारिश की वजह से आँगन में कीचड़। दोनों कैदियों को अलग-अलग कमरों में ले जाया जाता है। नेता को एक कमरे में। जोरवार को दूसरे में। विक्रम जोरवार वाले कमरे में प्रवेश करता है। दरवाज़ा बंद करता है। कैमरा: मीडियम शॉट – विक्रम कुर्सी खींचकर जोरवार के सामने बैठता है। विक्रम: “जोरवार… अब बातचीत का समय है। नेता ने कहा कि तेरी बेटी किले की सुरंग में है। तू सच बता… वो कौन है? क्यों तेरी बेटी उसके पास है?” जोरवार दीवार से टिका बैठा है। आँखें बंद। जोरवार: “पाँच साल पहले… उसने मेरी बेटी छीनी। सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने उसके तस्करी के धंधे में रुकावट डाली थी। अब तू मुझसे पूछ रहा है… जबकि तुझे खुद उससे पूछना चाहिए।” विक्रम आगे झुकता है। विक्रम: “मैं पूछूँगा। लेकिन तू अगर सहयोग करेगा तो… शायद मीरा को जिंदा पा सकें।” जोरवार अचानक आँखें खोलता है। लाल। जोरवार: “शायद? विक्रम… ‘शायद’ शब्द मेरी बेटी के लिए मत इस्तेमाल करना। या तो वो जिंदा मिलेगी… या फिर ये थाना खून से भर जाएगा।” कैमरा: क्लोज-अप – दोनों की आँखें। तनाव। सीन 22 – नेता का कमरा कैमरा: कट टू – दूसरे कमरे में नेता कुर्सी से बँधा हुआ है। एक इंस्पेक्टर उससे पूछताछ कर रहा है। नेता (हँसते हुए): “मीरा? वो अब मेरी है। जोरवार कभी उसे वापस नहीं पा सकता। सुरंग के अंदर… जो जाएगा, वापस नहीं आएगा।” अचानक बाहर शोर। कैमरा: जोरवार वाले कमरे का दरवाज़ा अचानक धमाके से खुलता है। जोरवार हथकड़ी तोड़े बिना ही सिपाही को धक्का देकर बाहर निकल आया है। कंधे से खून बह रहा है, लेकिन आँखों में पागलपन। जोरवार नेता वाले कमरे की तरफ दौड़ता है। सिपाही चिल्लाते हैं: “रोको उसे!!” कैमरा: हैंडहेल्ड – जोरवार दो सिपाहियों को धक्का देता है। एक को दीवार से टकराता है। वो नेता के कमरे में घुसता है। सीन 23 – थाने के अंदर हाथापाई कैमरा: तंग कमरे का वाइड शॉट – जोरवार नेता के ऊपर टूट पड़ता है। हथकड़ी में बँधे हाथों से ही उसके गले पर वार करता है। जोरवार (गरजते हुए): “बोल साले! सुरंग का नक्शा कहाँ है?! मीरा कहाँ छुपाई है?!” नेता हाँफते हुए: “किले के… पूर्व की तरफ… पुरानी कुएँ वाली सुरंग… लेकिन वहाँ… जहर के साँप हैं… और मेरे आदमी… तैनात हैं…” विक्रम पीछे से आकर जोरवार को पकड़ता है। तीन सिपाही मिलकर उसे खींचते हैं। विक्रम: “बस कर जोरवार! तू थाने में हत्या नहीं करेगा!” जोरवार विक्रम की तरफ मुड़ता है। खून से लथपथ। जोरवार: “तो फिर चल… किले चल। मैं आगे रहूँगा। तू पीछे। अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ… तो पहले मैं नेता को मारूँगा… फिर तुझे।” कैमरा: क्लोज-अप – विक्रम की आँखें। वो कुछ पल सोचता है। बाहर बिजली चमकती है। विक्रम धीरे से बोलता है: “ठीक है। लेकिन एक शर्त… तू हथकड़ी में रहेगा। और पहली गलती पर… मैं खुद गोली मार दूँगा।” जोरवार मुस्कुराता है। खून के दाग के बीच। जोरवार: “शर्त मंजूर। अब चल… सुबह होने से पहले पहुँचना है।” सीन 24 – थाने से रवाना कैमरा: वाइड शॉट – रात के अँधेरे में तीन जीपें थाने से निकलती हैं। आगे वाली जीप में जोरवार और विक्रम। बीच वाली में नेता (पूरी सुरक्षा के साथ)। पीछे जवान। कैमरा: जीप के अंदर – जोरवार खिड़की से बाहर अँधेरे पहाड़ों को देख रहा है। जोरवार (फुसफुसाते हुए): “मीरा… बाबा आ गया। इस बार कोई नहीं रोक पाएगा।” कैमरा: दूर किले की तरफ धीरे-धीरे ज़ूम-इन। पुराना टूटा हुआ किला पहाड़ी पर खड़ा है। अँधेरे में और भी डरावना। साउंड: हवा का शोर + दूर से सियार की आवाज़। फेड टू…
सीन 25 – किले की तरफ रास्ता (रात के आखिरी पहर) कैमरा: वाइड एरियल शॉट – तीन जीपें घुमावदार पहाड़ी सड़क पर चढ़ रही हैं। कोहरा घना है। दूर पुराना किला काले पहाड़ पर खड़ा है। कैमरा: जीप के अंदर – जोरवार खिड़की से किले को घूर रहा है। हथकड़ी में हाथ। कंधे का घाव फिर से खून रिसने लगा है। विक्रम (驾驶 करते हुए): “जोरवार… अगर ये जाल निकला तो मैं तुझे वहीं गोली मार दूँगा। समझा?” जोरवार बिना मुड़े जवाब देता है। जोरवार: “विक्रम… आज अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ तो गोली तेरी नहीं… मेरी चलेगी। तू बस पीछे-पीछे चल।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार की मुट्ठी। हथकड़ी के अंदर भी लॉकेट भींचा हुआ है। सीन 26 – किले के बाहर कैमरा: वाइड शॉट – जीपें किले के टूटे फाटक के बाहर रुकती हैं। जवान उतरते हैं। सर्चलाइट जलती हैं। नेता को घेरकर उतारा जाता है। उसके पैर में अभी भी गोली का घाव है। वो लँगड़ा रहा है। नेता (मुस्कुराते हुए): “अंदर जाओ… लेकिन वापस आने की गारंटी नहीं दे सकता।” जोरवार जीप से उतरता है। हथकड़ी अभी भी है। जोरवार नेता के पास जाकर उसके कान में फुसफुसाता है। जोरवार: “तूने मेरी बेटी को जहाँ छुपाया है… वहीं मैं तुझे दफनाऊँगा।” विक्रम बीच में आता है। विक्रम: “बस। अब अंदर। जोरवार आगे चलेगा। नेता बीच में। हम पीछे।” कैमरा: लाइन बनती है। जोरवार सबसे आगे। अँधेरे किले के मुँह की तरफ। सीन 27 – किले के अंदर (अँधेरा) कैमरा: हैंडहेल्ड – टूटी हुई सीढ़ियाँ। दीवारों पर काई। हवा में सड़ांध। सर्चलाइट की रोशनी धूल में कटती है। अचानक एक शॉट लगता है। साउंड: धांय!! आगे से छुपा बैठा नेता का आदमी फायरिंग करता है। एक सिपाही गिर जाता है। कैमरा: स्लो-मोशन – गोलियों का आदान-प्रदान। जोरवार बिना हथकड़ी खोले ही दीवार के पीछे छिप जाता है। जोरवार (चिल्लाते हुए): “विक्रम! पीछे हट! ये मेरे शिकार हैं!” वो अचानक खुले में निकलता है। हथकड़ी में बँधे हाथों से ही एक पत्थर उठाकर फेंकता है। पत्थर आदमी के माथे पर लगता है। वो गिरता है। दूसरा आदमी पीछे से आता है। जोरवार मुड़कर उसके हाथ की बंदूक छीन लेता है… हथकड़ी के बावजूद। कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार एक गोली में उसे मार गिरता है। जोरवार (ठंडे स्वर में): “अब आगे बढ़ाओ… सुरंग कहाँ है?” नेता लँगड़ाते हुए आगे बढ़ता है। डर उसके चेहरे पर साफ है। सीन 28 – पुरानी सुरंग का मुँह कैमरा: लो एंगल – ज़मीन में एक पुराना कुआँ जैसा मुँह। अंदर अँधेरा। बदबू आ रही है। नेता इशारा करता है। नेता: “यहीं से उतरना होगा। नीचे तीस फुट। फिर लंबी सुरंग। अंत में एक कमरा… वहाँ वो है।” विक्रम रस्सी का इंतजाम करता है। विक्रम: “जोरवार… तू पहले उतर। हथकड़ी खुलेगी नहीं।” जोरवार रस्सी पकड़ता है। आँखों में कोई डर नहीं। जोरवार: “खुले या न खुले… मैं उतरूँगा।” कैमरा: ऊपर से शॉट – जोरवार रस्सी पकड़कर अँधेरे में उतरता जा रहा है। उसकी छाया दीवार पर लंबी होती जाती है। नीचे पहुँचकर वो ज़मीन पर पैर रखता है। अँधेरा। सिर्फ ऊपर की सर्चलाइट की हल्की रोशनी। जोरवार (नीचे से चिल्लाता है): “मीरा!! बाबा आया!!” कोई जवाब नहीं। सिर्फ गूँज। फिर धीमी सी आवाज़… बहुत दूर से… मीरा की आवाज़ (काँपती हुई): “बा… बा…?” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार का चेहरा। आँखें चौड़ी। साँस रुक जाती है। जोरवार (फटी आवाज़ में): “मीरा… मैं यहाँ हूँ! बोलती रह… बाबा आ रहा है!” कैमरा: जोरवार अँधेरी सुरंग में भागता है। हथकड़ी की आवाज़ गूँजती है। पीछे विक्रम और जवान भी उतरने लगते हैं। नेता को जबरदस्ती नीचे उतारा जाता है। सीन 29 – सुरंग के अंदर कैमरा: बहुत तंग कॉरिडोर। दीवारें गीली। कभी-कभी साँप की फुफकार। जोरवार आगे बढ़ रहा है। अचानक उसके पैर के नीचे कुछ हिलता है। एक बड़ा साँप। कैमरा: स्लो-मोशन – जोरवार साँप के सिर पर लात मारता है। साँप उछलता है लेकिन वो बच निकलता है। आगे एक मोड़। रोशनी की एक पतली रेखा। जोरवार तेज़ी से मोड़ काटता है। सामने एक पुराना लोहे का दरवाज़ा। अंदर से हल्की लालटेन जल रही है। जोरवार दरवाज़े पर मुक्का मारता है। जोरवार: “मीरा!! दरवाज़ा खोल!!” अंदर से काँपती आवाज़ आती है। मीरा (अब 13 साल की): “बाबा… वो लोग बाहर ताला लगाकर गए हैं… मैं… मैं खोल नहीं सकती…” कैमरा: जोरवार की आँखें। गुस्सा + दर्द। वो पीछे हटता है और पूरे जोर से दरवाज़े पर लात मारता है। एक बार। दो बार। तीन बार। दरवाज़ा हिलता है। पीछे से विक्रम आवाज़ लगाता है: “जोरवार रुक! हम तोड़ेंगे!” जोरवार बिना सुने चौथी लात मारता है। धमाका! लोहे का दरवाज़ा टूटकर अंदर गिर जाता है। कैमरा: धूल के बीच – जोरवार अंदर घुसता है। सीन 30 – अंतिम कमरा कैमरा: मीडियम शॉट – छोटा अँधेरा कमरा। एक कोने में मीरा बैठती है। गंदी कपड़ों में। बाल बिखरे। लेकिन आँखों में अभी भी रोशनी। वो उठती है। काँपते पैरों से। मीरा: “बाबा…?” जोरवार हथकड़ी में बँधे हाथों के बावजूद आगे बढ़ता है। जोरवार (आवाज़ टूटती हुई): “हाँ… बाबा आया…” दोनों एक-दूसरे की तरफ बढ़ते हैं। अचानक पीछे से आवाज़ आती है। नेता (हँसते हुए): “छूने से पहले… एक बार और सोच ले जोरवार!” कैमरा: नेता के हाथ में छोटा रिमोट। नेता: “इस कमरे के चारों तरफ विस्फोटक लगाए हैं। एक बटन दबाया… तो बाप-बेटी दोनों यहीं दफन हो जाएँगे।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार और मीरा की आँखें। तनाव चरम पर। फेड टू…
सीन 31 – अंतिम कमरा (तनाव) कैमरा: टाइट क्लोज-अप – नेता के हाथ में छोटा काला रिमोट। अंगूठा बटन पर। नेता
(हँसते हुए): “एक मिलीमीटर भी हिला… और ये पूरी सुरंग मट्टी में मिल जाएगी। बाप-बेटी की जोड़ी यहीं खत्म।” कैमरा: जोरवार और मीरा। जोरवार हथकड़ी में, कंधे से खून बह रहा है। मीरा उसके पीछे थोड़ी छिपती हुई खड़ी है। मीरा (काँपती आवाज़ में): “बाबा… डर मत… मैं तुम्हारे साथ हूँ।” जोरवार धीरे से सिर हिलाता है। आँखें नेता पर गड़ी हुई। जोरवार (बहुत धीमी, ठंडी आवाज़ में): “नेता… तूने पाँच साल से मेरी बेटी को यहीं रखा। आज तू बटन दबा… लेकिन उससे पहले मैं तेरी गर्दन मरोड़ चुका हूँगा।” नेता रिमोट और ऊपर उठाता है। नेता: “आजमा के देख ले!” इतने में पीछे से विक्रम सुरंग में दाखिल होता है। बंदूक ताने हुए। विक्रम: “रिमोट नीचे रख! वरना गोली चल जाएगी!” नेता मुस्कुराता है। नेता: “गोली चली… तो बटन दब जाएगा। सोचना विक्रम… तीनों की मौत तेरे सिर?” कैमरा: तीनों तरफ तनाव। हवा थम गई लगती है। सीन 32 – अचानक एक्शन कैमरा: स्लो-मोशन शुरू। जोरवार अचानक मीरा को पीछे धकेलता है। जोरवार (चीखते हुए): “मीरा… दीवार के पीछे!!” उसी पल वो नेता पर झपटता है। नेता बटन दबाने की कोशिश करता है… लेकिन जोरवार का कंधे से टकराया हुआ शरीर उसे संतुलन खो देता है। रिमोट हवा में उछलता है। कैमरा: अल्ट्रा स्लो-मोशन – रिमोट हवा में घूमता है। जोरवार हथकड़ी में बँधे हाथों से ही रिमोट को हवा में पकड़ लेता है। धमाका नहीं होता। नेता गुस्से में पिस्तौल निकालता है। जोरवार रिमोट को एक तरफ फेंककर नेता के ऊपर गिर पड़ता है। दोनों ज़मीन पर लोटने लगते हैं। कैमरा: हैंडहेल्ड शेक – मुक्के, घूँसे, खून। नेता जोरवार के घाव पर दबाव डालता है। जोरवार दर्द से चीखता है लेकिन पकड़ नहीं छोड़ता। मीरा एक टूटी हुई लोहे की रॉड उठाती है। मीरा (आँसू भरी आँखों से): “बाबा से दूर हट!!” वो पूरी ताकत से नेता की पीठ पर रॉड मारती है। नेता चीखता है और पीछे हटता है। जोरवार मौके का फायदा उठाते हुए नेता का गला पकड़ लेता है। जोरवार (दाँतों से): “पाँच साल… हर रोज़… मेरी बेटी रोती रही होगी… आज तू रो!” सीन 33 – अंतिम फैसला कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार का चेहरा। आँखों में पागलपन और दर्द। वो नेता का गला और कसता है। नेता हाँफने लगता है। विक्रम पीछे से आकर जोरवार का कंधा पकड़ता है। विक्रम: “मत मार! तू अभी भी इंसान है जोरवार! उसे अदालत के हवाले कर!” जोरवार कुछ पल रुकता है। साँस भारी। मीरा पास आकर उसके हाथ को छूती है। मीरा (धीरे से): “बाबा… बस… छोड़ दो। मैं डर गई थी… लेकिन अब तुम आ गए हो। और कुछ मत करो।” कैमरा: जोरवार की आँखें। गुस्सा धीरे-धीरे पिघलता है। वो नेता का गला छोड़ देता है। नेता ज़मीन पर गिरकर खाँसने लगता है। जोरवार मुड़कर मीरा को देखता है। पहली बार आँखों में आँसू। जोरवार (टूटी आवाज़ में): “माफ कर देना… इतने साल लग गए।” मीरा उसके गले लग जाती है। हथकड़ी के बावजूद जोरवार उसे मजबूती से पकड़ लेता है। कैमरा: दोनों पिता-पुत्री का लंबा हग। सर्चलाइट की रोशनी उन पर पड़ रही है। सीन 34 – बाहर निकलना कैमरा: वाइड शॉट – सब ऊपर निकल रहे हैं। नेता को जवान घसीट रहे हैं। जोरवार और मीरा सबसे पीछे। जोरवार अभी भी हथकड़ी में है। विक्रम पास आकर हथकड़ी की चाबी निकालता है। विक्रम: “आज तूने खुद को रोका… इसलिए मैं तुझे एक मौका दे रहा हूँ।” हथकड़ी खुलती है। जोरवार के हाथ आज़ाद। वो तुरंत मीरा का हाथ पकड़ लेता है। जोरवार विक्रम की तरफ देखता है। जोरवार: “विक्रम… मैं चंबल छोड़ दूँगा। लेकिन अगर फिर कभी मेरी बेटी को कोई छूने की कोशिश की… तो याद रखना… चंबल का भूत फिर जाग जाएगा।” विक्रम सिर हिलाता है। कुछ नहीं बोलता। कैमरा: बाहर सुबह की पहली रोशनी। कोहरा छँट रहा है। जोरवार और मीरा किले के फाटक से बाहर निकलते हैं। मीरा उसका हाथ कसकर पकड़े हुए है। मीरा: “बाबा… अब घर चलेंगे?” जोरवार ऊपर आसमान की तरफ देखता है। पहली बार चेहरे पर हल्की मुस्कान। जोरवार: “हाँ… घर। अब बस घर।” कैमरा: दोनों की पीठ। धीरे-धीरे दूर जाते हुए। सूरज निकल रहा है। दूर पुलिस की जीपें नेता को ले जा रही हैं। साउंड: हल्की हवा + पक्षियों की आवाज़। अंतिम शॉट कैमरा: एक्सट्रीम वाइड – चंबल की नदी। सूरज की किरणें पानी पर चमक रही हैं। जोरवार और मीरा नदी किनारे बैठे हैं। जोरवार लॉकेट मीरा के गले में फिर से पहना रहा है। जोरवार (धीरे से): “अब ये कभी मत उतारना।” मीरा मुस्कुराती है। मीरा: “बाबा… तुम वाकई चंबल के भूत हो… लेकिन मेरे बाबा हो।” कैमरा: धीरे-धीरे ऊपर टिल्ट – खुला आसमान। फेड टू व्हाइट।