आरज़ू ए दीदा ए यार में शब् की सेहर होने दो love shayari ,

0
400
आरज़ू ए दीदा ए यार में शब् की सेहर होने दो love shayari ,
आरज़ू ए दीदा ए यार में शब् की सेहर होने दो love shayari ,

आरज़ू ए दीदा ए यार में शब् की सेहर होने दो love shayari ,

आरज़ू ए दीदा ए यार में शब् की सेहर होने दो , दिल हुआ है धुंआ रूह फनाह होने दो ।

शाम बर्बाद जिसके कूचे में उसे खबर भी नहीं , रुख़्सत ए जान का चर्चा ज़मीन ओ आस्मां को होने दो ।।

जनाज़ा शानदार था मैय्यत किसी रईस की रही होगी , सुना है मरने वाले का बड़ा रुतबा था ।

खौफ ए खुदा में मर गया शायद इब्न ए इंसान था , मौत की दहशत तो रही होगी ।।

राख के ढेर में दबा है जो गुमान उसे भी था खुदा होने का , साडी औक़ात पता चलती है ख़ाक ए सुपुर्दगी के बाद ।

राजा रंक मलंग फ़कीर सभी मिलते हैं मिटटी में , सारा गरूर धरा रह जाता है मेहबूबा ए मौत से मिलने के बाद ।।

टॉप लव शायरी, 

नज़र की जुम्बिश बातें हज़ार करती हैं , छुपा के लाख छुपाओ दमन साँसे सवाल करती हैं ।

जो अनकही सी दास्ताँ बिना हिले – डुले लबों ने बोल दी , दबी ज़बान में ज़्यादा बवाल करती हैं ।।

दरूं ए इश्क़ जन्नत की ख्वाहिश लेकर , दिल ए नादान फिर करता है गुज़ारिश सुकून ए रूह की फरमाइश लेकर ।

ज़िन्दगी दर बदर भटकती है आज़माइश बनकर , जाने किस सिम्त सिमट जाए ज़र्रा ए नवाज़िश बनकर ।।

ज़मीन से फलक तक हर कहकशां तेरा , ज़र्रा को आफताब करे हुस्न ओ शबाब तेरा ।

दीदा ए यार के तलबगार हम भी थे , अब ढूंढें नहीं मिलता है खुद की गलियों में नाम ओ निशाँ मेरा ।।

अब जान ले ले तू या ज़िन्दगी देदे , तेरे दम से मेरे दिल की दुनिया आबाद हुआ करती है ।

मुझे मेरे जाने का ग़म नहीं अब तो , बाद ए रुख़्सत के फ़िक्र ए यार में उम्र ए तबाह हुआ करती हैं ।।

रगों में बहता है लहू बनके इश्क़ तेरा , साद ओ ग़म से धड़कने आबाद हुआ करती हैं ।

कारोबार ए जहां से सरोकार नहीं है मुझको , नाम ए मेहबूब से साँसे गुलज़ार हुआ करती हैं ।।

हवा पर लिखता हूँ नाम उसका , दरुं ए इश्क़ का राज़दार वही है । नफ़स नफ़स का हिसाब रखता है , सरगोशियों का

तलबगार थोड़ी है ।।

मत कुरेद सोयी पड़ी रूहों को , न जाने ज़ख्म कब नासूर बन जाए ।

जिसे जन्नत समझता है दिल ए नादान , कब्रों का न कहीं कब्रिस्तान बन जाए ।।

कुछ कह रहा था दिल ख्याल ए यार में , सोचा विशाल ए यार तो अहमक मचल गया ।

वस्ल की रात सामने खड़ी थी गेसुओं से लिपटी , मौसम ए तपिश थी या हश्र ए हिज्र से डर गया ।।

रात शबनमी बात शबनमी, गुंचा ए गुल पर बिखरे अर्क की बूँदें शबनमी ।

इस बहार ए दिलनशीं में रुख़सार पर ज़ुल्फ़ें गिराए बैठा है , मिजाज़ ए यार खिज़ा खिज़ा क्यों है ।।

हटा दो चिलमन फरेब का मेरी पेशानी से नज़र आने दो माहताब ए हुस्न इस दीवाने को ।

बस उसी फ़िराक ए यार में हम भी हैं, जिसमे साहेब ए शहनवाज़ हुआ करते थे ।।

फूंक दिया अरमान नशेमन भी ख़ाक कर आये , दिल को बस तेरी मोहब्बतों से गुलज़ार किया है ।

दीदा ए यार की तलब दिल में लेकर , आशिक़ों ने कब ज़माने में कारोबार किया है ।।

चस्म ए बुल बुल फ़िज़ा में घुली पायलों की छम छम, नफ़स नफ़स में दिल की धड़कने थाम लेती है।

हवा के झोकों में तेरे गेसुओं की खुशबू , सरगोशियों से गुलशन गुल ए गुलज़ार किया करती है ।।

pics from google ,

SHARE
Previous articlehorror story writer a short horror story ,
Next articlepyar dhokha aur badla hindi thriller kahaniyan ,
Welcome to the official website of Pushpendra Dwivedi. Here, you will find the sweetness of Hindi Shayari, the depth of inspirational stories, the expression of life through poems, and emotional writings filled with thoughts. Our goal is to give voice to your feelings and connect hearts through the power of literature. Whether you are a reader, a writer, or someone who just wants to feel—this blog is for you. Every creation here is an emotion that reaches straight to the heart.