चुनावी सरगर्मियाँ हैं बच बचा के चलना हबीब funny political shayari,

0
419
चुनावी सरगर्मियाँ हैं बच बचा के चलना हबीब funny political shayari,
चुनावी सरगर्मियाँ हैं बच बचा के चलना हबीब funny political shayari,

चुनावी सरगर्मियाँ हैं बच बचा के चलना हबीब funny political shayari,

चुनावी सरगर्मियाँ हैं बच बचा के चलना हबीब ,

दंगा फ़सादियों का कोई मज़हब नहीं होता

 

जब ख़िदमतगार को ही हुकूमत का चस्का लग जाए ,

समझो रियासत ए अवाम को अब ख़तरा है ।

 

बुझा बुझा के चुभाता है खुद मेरे दिल में ,

डुबो डुबो के ज़हर मेरे लहू का मुझमे

 dosti shayari

क़तरा क़तरा टपक रहा है जिगर का लहू बनके ,

रगों में बहने लगा ज़हर जब ख़ूबरू होके I

 

आदम ही गर आदमख़ोर हो जाये ,

क्या इब्न ए इंसान दरख्तों में बच्चे महफूज़ रखेगा

 

शहरी रियासतों पर सबकी ज़ात पर बन आई है ,

चुनावी सरगर्मियों ने ले ली फिर अँगड़ाई है ।

 

जान पर न बन जाए मोहब्बत तेरी ,

सरहदों पर दौड़ लगाऊं क्या मोहब्बत मेरी

 

शहरी रुआब है या तिलिस्मी नक़ाब है ,

हर शक़्स है प्यासा यहाँ खाना ख़राब है ।

 

इश्क़ की फितरत ही नहीं क़ायदे में रहना ,

हदों के पार ही मोहब्बतों की रात होती है ।

 

दाग़ दामन के धो लिए मैंने ,

फिर क्यों लहू को लहू से इन्साफ की दरकार आज भी है ।

 

बेज़बानी में झलक जाते हैं वो दाग ,

दस्तूर ए वक़्त ने जो ज़ख्म दिल पे दिए होते हैं ।

 

ज़ख्म दिखता नहीं दाग़ फिर भी हैं ,

बेज़बान मुर्दों में नासूर बनके कसकता क्या है

 

बेज़बान परिंदों से ख़ौफ़ कैसा ,

डर लगता है कहीं फ़ितरत ए आदम देख कर वो उड़ न जाएँ ।

 

दरख़्त छोड़कर जाने लगे परिन्दे भी अपनी सरहद के ,

उस पार भी आदम ए बस्ती है फिर घर कहाँ बनायेगे ।

 

हम भी तो देखें दिलों में कितनी चाहत है ,

क्या दाग़ ए मोहब्बत की ख़ातिर हम ही बेचैन हैं तन्हा ।

 

जिन्हें डर हो कहीं और घर बसा लें ,

आशिक़ को मेहबूब के दिलों में महफूज़ रहने दो

 

बातों से पता नहीं चलता आदम ए सूरत तो एक जैसी लगती हैं ,

सुना है सरहदों पार भी एक से एक खूँख़ार रहते हैं ।

 friendship shayari in hindi

गोया रात की तहरीर पर इश्क़ ओ जूनून की बात चलती होगी ,

बेज़बान लब पर मेरा नाम आता होगा बेलगाम धड़कने ना सम्हलती होंगी ।

pix taken by google