प्यास मैकदों में रोज़ बढ़ती है romantic shayari,

प्यास मैकदों में रोज़ बढ़ती है romantic shayari,

0
831
प्यास मैकदों में रोज़ बढ़ती है romantic shayari,
प्यास मैकदों में रोज़ बढ़ती है romantic shayari,

प्यास मैकदों में रोज़ बढ़ती है romantic shayari,

प्यास मैकदों में रोज़ बढ़ती है ,

फ़र्क़ पड़ता नहीं ग़र्मी की वहाँ सर्दी है ।

 

मौसम ए मिजाज़ जहाँ भर का समझ आता नहीं ,

एक बर्फ की चट्टान पिघले तो ग़र्मी में सुकून आये ।

 

ग़र्मी से ग़र बढ़ती हो प्यास जायज़ है ,

लोग आँखों में समंदर छुपाकर मैकदों का रुख़ करते हैं ।

 

चश्म ए तर आँखों में तैरता मंज़र ,

ज़र्द ख़्वाबों को मौसम ए तपिश से सुकून देता है ।

 

तेरे ख़्वाबों के हसीं लम्हो को मैंने पलकों में छुपा रखा है ,

जल न जाए तपन की ग़र्मी से , चश्म ए तर आँखों में डुबो रखा है ।

love shayari 

हकीकत कुछ नहीं फशाना है ,

इश्क़ के नाज़ुक हसीन लम्हों को मौज ए बहारा में फिर सजाना है ।

 

मौसम ए मिजाज़ रुख़ पर रख कर ,

वो हर नक़ाब जला आया खड़ी दोपहर में ।

 

जिस्म जले रूह फ़नाह हो जाए ,

पाँव के छाले फ़टे यार के बुलावे में जाना है तो जाना है ।

 

रात की ठंडक फ़ानी है वरना ,

दीदा ए यार के बाद कब सुख़नवर का कारोबार हुआ करता है ।

 

फ़लक़ पर दहकता सूरज ,

और रुख़ पर चढ़ता नक़ाब हट जाए तो मौसम ए ग़र्मी में बहार आ जाये ।

 

एक तो जमाल ए यार दूजा सर पर दहकता सूरज ,

दो दो आफ़ताबी हूरों को कैसे नक़ाब में छुपा लेता है ।

 

जाने कितने समंदर सुखा दिए इसने ,

फिर भी सुर्ख होठों की प्यास बाकी है ।

 

हर एक मंज़र बहार जैसे हैं ,

तू भी उतर के देख चश्म ए तर आँखों में कितनी राहत है ।

 

मर के भी साथ मुक़म्मल न रहा ,

सबने कांधा बदला गर्मी का वास्ता देकर ।

 

टपकते आंसुओं में भी राहत है ,

वरना मौसम ए ग़र्मी से मिट्टी में दबे जिस्म पिघल जाते हैं ।

hindi shayari 

ग़र्मी में झुलस जाये न अरमान भरे दिल के ,

मुर्दे भी अब क़फ़न ओढ़ के सोने की बात करे हैं ।

pix taken by google

Free Download WordPress Themes
Download Premium WordPress Themes Free
Download WordPress Themes
Download WordPress Themes Free
free online course
download mobile firmware
Premium WordPress Themes Download
udemy paid course free download

NO COMMENTS