हुस्न को हिज़ाब और चाँद को माशूक बता रखा है romantic shayari,

हुस्न को हिज़ाब और चाँद को माशूक बता रखा है romantic shayari,

हुस्न को हिज़ाब और चाँद को माशूक बता रखा है romantic shayari,

हुश्न को हिज़ाब और चाँद को माशूक बता रखा है ,

ज़ालिम ज़माने ने शायर को आफताब बना रखा है ।

खार कितने थे इश्क़ ए दरिया में ,

अक़्स देखा तो रूह ज़ार ज़ार हुयी ।