गुंचा ए गुल से खुश्बुएँ नदारद हैं ,

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गुंचा ए गुल से खुश्बुएँ नदारद हैं ,
गुंचा ए गुल से खुश्बुएँ नदारद हैं ,

गुंचा ए गुल से खुश्बुएँ नदारद हैं ,

गुंचा ए गुल से खुश्बुएँ नदारद हैं ,

जब से शहर ए मौसम में सुर्खरू है आमद तेरी ।

 

ज़माना क्या बदला मोहब्बतों के मायने बदल गए ,

किसी के हिस्से में सच्ची मोहब्बत आई किसी के हिस्से में बस इश्क़ के दायरे रह गए ।

 

जहान को छोड़ चला तन्हा, लोगों की फराकत के वास्ते ,

किसी को छोड़ा तो नहीं तन्हा, मुझ पर रोने के वास्ते ।

 

#urdu shayari mirza ghalib,
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दिल ख़ुश्बुओं का तलबग़ार है ,

गुंचा ए गुल और चमन के ज़र्रे ज़र्रे को क्या बाग़ ए बहार की दरकार है ।

 

स्वाद चखा है तल्खियों में ज़माने भर का ,

देख कर तल्ख़ निगाहों को ज़बान भी कडवाई है ।

 

दिखने लगा है शहर ए नामचीनों पर भी मौसम की तब्दीलियत का असर ,

ज़बान मीठी और हुश्न की रंगत निखर गयी ।

 

#urdu sad shayari,
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तक़दीर वालों के सर पर ही हमेशा माँ बाप का साया होता है ,

गोया ज़ौक़ ए ज़िन्दगी का तज़ुर्बा मीठा कम कड़वा ज़्यादा होता है ।

 

ज़ौक़ ए ज़िन्दगी का हर तज़ुर्बा कड़वा ही सही ,

बाद तल्खियों के भी चेहरे मुस्कुराते हैं ।

 

तेरी ज़बान से वादे ओ वफ़ा की बातें ,

तेरे हर लतीफे पर तरस आता है ।

 

#urdu shayari mohabbat,
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न फ़लक़ का हुआ न ज़मीन का हुआ ,

दिखा के आस्मां का सूरज कोई ज़र्रा ज़र्रा जला गया ।

 

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अबके बिछड़े बहारों में हम मिलेंगे सनम ,

खिज़ा के मौसम न देंगे गुलों को कोई ग़म ।

 

वो शब् बज़्म में आ बैठे हैं दामन सम्हाल के ,

कोई तीर ए सुखन न दिल पर चल जाए नशेमन सम्हालिए ।

 

#urdu shayari love,
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आसमान के सूरज से तेज़ इश्क़ की तासीर होती है ,

जो बचे हुश्न ए आफ़ताब से ऐसी कहाँ सबकी तक़दीर होती है ।

 

दूर से मज़ा देती नहीं ये ज़ौक़ ए शायरी ,

कुछ दिल जला के भी शाम ए बज़्म में तसरीफ लाइये।

 

लब पर आते आते लफ़्ज़ों के मायने बदल गए ,

दिल के भीतर तो बस आलम ए इश्क़ के गुबार की सुमारी थी ।

 

#romantic urdu shayari,
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pix taken by google