जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार ,

0
569
जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार ,
जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार ,

जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार ,

जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार ,

या ऐरै लेमड़ी लटकाये बागते हो ।

तसमई परसूँ की प्योसरी सजाऊँ ,

बोल तेरे ख़्वाबों की तस्तरी में व्यंजन कहाँ से लाऊँ ।

ककहरा दुदुनिया अक्षर कारे न बाचत बने पहाड़ा,

मालिकिन फुसूंणा मारे अइसन जइसन पहाड़ पेले हो सारा ।

आज की सगळी शब् ए बज़्म तुम्हरे नामे ,

उठ बिहन्ने कलेबा में कलेजा छोड़ जाउगा ।

दोहनी मा सोंधे दूध के पाकब ,

जस जस भई अबेर न्यूना तरछन चट करि जैहै बिलारी सगळी ढेर ।

 

one line thoughts about life in hindi 

 

न्यूना बचा न चासनी मट्ठा बची न छास ,

कटही बिलारी चट गयी दोहनी चढ़ के माच।

निछत्र कूटती न नज़र तेरी आवाजाही पर ,

किरचा भर भी सुबान होता अगर तेरी बेवफाई का ।

यूँ ही न दहनारद मचाता कोई ,

अगर लोग कॉल देकर लबरी न बोल जाते ।

मरी गे घर भर के ज्योनार भूखे पेट ,

रात सगळी खाना पकाना खेलें मा बीत गई।

पतीली के तरछन में बच गया होता ,

तो गली के पिल्लों को भी निवाला मिल गया होता ।

पटउहाँ में रख के सो जाते हो क्या ख़्वाब सारे ,

उठते ही खलीसा तलास करते हो सकारे ।

 

ये जो दिन भर आँखों से आँसू टपकते हैं ,

दिल में ग़मो के मिर्च काहे खूथ रखे हो ।

उफ़ ये नज़रों की फेका फेंकी गब्भा भर के लपेटना ,

अदाओं से पेच डाल के बातों से काटना ।

अजहूँ न आये खसम सांझ रात को ,

कौन करिहैं कलेबा झूर बासी बात को ।

उच्छिन्न न मारो एक बात कह दूं ,

बालम तोहे जियरा में रख के उघन्नी दरिया में फेंक दूं ।

रात खटायेगी कैसे ,

सुबह तक के लिए चितचोर फिर से जाग गया ।

सारे लहज़े लरज़ गए उनके ,

सामने जिनके सेखी धरी सकाती थी नहीं ।

जल मत बराबरी के चक्कर में आगे बढ़ गया ,

थी निछट खाई में गिर के खुद को मुर्दा कर गया ।

 

https://www.pushpendradwivedi.com/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bc%e0%a4%ac/

 

pix taken by google