pushpendra dwivedi blog

मुशाफ़िर क्या जाने शहर ए मिजाज़ कैसा है Alfaaz shayari,
शातिर निगाहों की धार बड़ी पैनी है Alfaaz shayari,
नज़ूल की ज़मीन पर सारा शहर बना रखा है Alfaaz shayari,
दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले alfaaz shayari ,
सपोला समझकर छोड़ देते हैं funny shayari ,
लाल किले के प्राचीर से उद्घोष हो गया funny political shayari,
चुनावी सरगर्मियाँ हैं बच बचा के चलना हबीब funny political shayari,
तेरे ख़्वाबों के शिकंजे में दम घुटता था good night shayari,
सियासतदानों के ठाठ के किस्से सुनकर थक गया आदम funny political shayari,
नफ़रतें इतनी हैं अगर सीने में josh shayari,