जोरवार: चंबल का भूत – एक डाकू की बेटी की कहानी
सीन 1 – नदी का किनारा (रात) कैमरा: एक्सट्रीम वाइड शॉट – अँधेरी चंबल नदी, चाँदनी पानी पर चमक रही है, दूर पहाड़। धीरे-धीरे लेफ्ट टू राइट पैन। क्लोज-अप: कीचड़ भरे जूते फ्रेम में आते हैं। जोरवार (40 साल का, लंबा, बाएँ गाल पर गहरा निशान, लंबे बाल बाँधे हुए, कंधे पर राइफल) एक चट्टान पर खड़ा है। बीड़ी सुलगाता है। जोरवार (ठंडी, भारी आवाज़ में): “चंबल में दो चीज़ कभी नहीं रुकती… पानी और मेरी गोली।” कैमरा: उसके आँखों पर धीरे-धीरे पुश-इन। सामने किनारे पर पुलिस के कैंप की छोटी सी आग दिखती है। कैरेक्टर बीट: जेब से चाँदी का लॉकेट निकालता है – अंदर एक छोटी लड़की की फीकी तस्वीर। तीन सेकंड देखता है, फिर ज़ोर से बंद कर देता है। जोरवार (खुद से): “बेटी… अब बस एक लास्ट काम… फिर मैं खत्म।” सीन 2 – पुलिस कैंप (रात) कैमरा: मीडियम शॉट – पुलिस इंस्पेक्टर विक्रम (35, सख्त चेहरा) आग के पास बैठा है। रेडियो पर बात कर रहा है। इंस्पेक्टर विक्रम: “जोरवार आज रात नदी पार करेगा। घेराबंदी टाइट रखो। इस बार वो नहीं बचेगा।” कैमरा: कट टू – जंगल में जोरवार के चेहरे का क्लोज-अप। वो मुस्कुराता है। जोरवार (फुसफुसाते हुए): “विक्रम… तू आज भी वही गधा है।” सीन 3 – नदी पार करते समय (रात) कैमरा: लो एंगल ट्रैकिंग शॉट – जोरवार पानी में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, राइफल सिर के ऊपर। पानी की लहरें चमक रही हैं। अचानक सर्चलाइट जलती है। पुलिस वाला 1 (चिल्लाते हुए): “वहाँ है! जोरवार वहाँ है!!” कैमरा: हैंडहेल्ड शेक – गोलियाँ बरसना शुरू। पानी में छींटे उड़ते हैं। जोरवार तेजी से गोता लगाता है। पानी के अंदर से निकलकर किनारे पर कूदता है। जोरवार (चीखते हुए): “आ जाओ सालो… चंबल का भूत आज तुम्हें निगलने आया है!” सीन 4 – जंगल में फाइट (रात) कैमरा: वाइड शॉट – घने जंगल। जोरवार पेड़ के पीछे छिपता है। तीन पुलिस वाले पीछे दौड़ते आते हैं। कैमरा: डच एंगल – जोरवार एक पेड़ से कूदता है। जोरवार पहले वाले को राइफल के बट से मुँह पर मारता है। साउंड: हड्डी टूटने की आवाज़। दूसरा पुलिस वाला चाकू निकालता है। जोरवार (हँसते हुए): “चाकू? बेटा, चंबल में चाकू लेकर आना… अपनी मौत बुला लेना है।” कैमरा: स्लो-मोशन – जोरवार चाकू वाले का हाथ पकड़ता है, घुमाता है और उसी चाकू से उसके पेट में घोंप देता है। तीसरा पुलिस वाला पीछे से गोली चलाता है। गोली जोरवार के कंधे में लगती है। कैमरा: क्लोज-अप – खून रिसता है। जोरवार मुँह से थूकता है। जोरवार (दर्द में भी मुस्कुराते हुए): “एक गोली… और तुम सोचते हो मैं गिर जाऊँगा?” वो तेजी से घूमता है, राइफल उठाता है और एक ही गोली में तीसरे पुलिस वाले को छाती में मारता है। सीन 5 – इंस्पेक्टर विक्रम से आमना-सामना कैमरा: टू शॉट – दोनों आमने-सामने। बीच में 20 कदम की दूरी। इंस्पेक्टर विक्रम (पिस्तौल तानकर): “जोरवार! आज तेरा खेल खत्म। तेरी बेटी के लिए भी अब कोई जगह नहीं बची।” कैमरा: जोरवार के चेहरे पर क्लोज-अप। आँखें लाल हो जाती हैं। जोरवार (धीरे, लेकिन जहर भरी आवाज़ में): “मेरी बेटी का नाम अपनी ज़ुबान पर मत ला… वरना मैं तेरी जुबान काट दूँगा।” दोनों एक साथ गोली चलाते हैं। कैमरा: स्लो-मोशन – गोलियाँ हवा में पार होती हैं। जोरवार की गोली विक्रम के कंधे में लगती है। विक्रम की गोली जोरवार के बाएँ बाजू में। जोरवार दौड़कर आता है। दोनों धूल में लोट-पोट हो जाते हैं। मुक्के, घूँसे, लातें। जोरवार विक्रम को ज़मीन पर दबाता है, गला दबाता है। जोरवार: “चंबल ने मुझे पैदा किया… चंबल ही मुझे मारेगा। तू नहीं।” अचानक दूर से सायरन की आवाज़। और पुलिस आ रही है। जोरवार उठता है, खून से लथपथ। कैमरा: वाइड शॉट – जोरवार अँधेरे जंगल की तरफ भागता है। पीछे विक्रम ज़मीन पर कराह रहा है। जोरवार (दूर से चिल्लाता है): “विक्रम! अगली बार जब मिलेंगे… तब सिर्फ एक ही जिंदा बचेगा!” अंतिम शॉट कैमरा: एक्सट्रीम वाइड – चाँदनी रात में जोरवार नदी किनारे खड़ा है। कंधे से खून बह रहा है। वो लॉकेट फिर से खोलता है। जोरवार (फुसफुसाते हुए): “बेटी… बाप अभी जिंदा है।” कैमरा: धीरे-धीरे ऊपर की तरफ टिल्ट – चाँद। फेड टू ब्लैक।
सीन 6 – वर्तमान (रात, जंगल की गुफा) कैमरा: लो लाइट क्लोज-अप – जोरवार गुफा में बैठा है। कंधे का घाव बाँधा
हुआ है। हाथ में लॉकेट। आँखें बंद। अचानक उसकी साँस भारी हो जाती है। साउंड: हवा का शोर बदल जाता है… पुरानी यादों का संगीत शुरू। कैमरा: धीरे-धीरे ज़ूम-इन उसके चेहरे पर → स्क्रीन व्हाइट फ्लैश → फ्लैशबैक शुरू सीन 7 – फ्लैशबैक (5 साल पहले – गाँव का घर, शाम) कैमरा: वार्म गोल्डन लाइट। वाइड शॉट – छोटा सा मिट्टी का घर। आँगन में एक छोटी लड़की (8 साल की) खेल रही है। नाम: मीरा (जोरवार की बेटी) वो गुड़िया लेकर दौड़ रही है। मीरा (हँसते हुए): “बाबा! देखो, मेरी गुड़िया भी तुम्हारी तरह राइफल उठा सकती है!” कैमरा: मीडियम शॉट – युवा जोरवार (बिना निशान वाला चेहरा, थोड़ा नरम) बैठकर हँसता है। वो मीरा को गोद में उठा लेता है। जोरवार (प्यार से): “अरी पागल… तू राइफल नहीं, किताब उठा। बाबा चंबल छोड़ देगा… बस थोड़ा समय और।” मीरा उसके गाल पर हाथ फेरती है। मीरा: “बाबा वादा करो… तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे।” जोरवार लॉकेट निकालकर उसके गले में पहना देता है। जोरवार: “ये लॉकेट हमेशा तुम्हारे पास रहेगा… और मैं भी।” कैमरा: दोनों की हँसी। सुख का पल। अचानक दूर से घोड़ों की टापों की आवाज़। सीन 8 – फ्लैशबैक (उसी रात – हमला) कैमरा: अचानक डार्क ट्रांज़िशन। हैंडहेल्ड शेक। दरवाज़ा टूटता है। काले कपड़ों वाले आदमी घुसते हैं। नेता (चेहरे पर मास्क, आवाज़ भारी): “जोरवार! तेरी बेटी हमें चाहिए। तूने हमारे आदमी मारे… अब कीमत चुकानी पड़ेगी!” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार का चेहरा बदल जाता है। आँखों में खून। वो कुल्हाड़ी उठाता है। जोरवार (गरजते हुए): “मेरी बेटी को छूने की हिम्मत मत करना… वरना तुम्हारी लाशें चंबल में तैरेंगी!” एक्शन: जोरवार तीन आदमियों पर झपटता है। एक को कुल्हाड़ी से सीना चीर देता है। दूसरे को दीवार से टकराता है। कैमरा: स्लो-मोशन – खून की बूँदें हवा में। लेकिन पीछे से चौथा आदमी मीरा को उठा लेता है। मीरा (चीखती हुई): “बाबा… बचाओ!! बाबा!!” कैमरा: जोरवार मुड़ता है। उसकी आँखों में असहायता। वो दौड़ता है… लेकिन एक गोली उसके पैर में लगती है। वो गिर जाता है। नेता (हँसते हुए): “अब तेरी बेटी हमारी है, जोरवार। जब तक तू हमारे लिए काम नहीं करेगा… वो जिंदा नहीं रहेगी।” कैमरा: जोरवार ज़मीन पर रेंगता हुआ… खून में हाथ फिसलते हुए… मीरा को घोड़े पर बिठाकर ले जाते हुए दिखता है। जोरवार (चीखता हुआ): “मीराааा!!!!!” स्क्रीन ब्लैक। सिर्फ जोरवार की चीख गूँजती रहती है। सीन 9 – वर्तमान (गुफा में वापसी) कैमरा: जोरवार की आँखें अचानक खुलती हैं। पसीना चमक रहा है। हाथ काँप रहे हैं। वो लॉकेट को ज़ोर से भींच लेता है। जोरवार (फुसफुसाते हुए, आवाज़ टूटी हुई): “मीरा… बाबा आ रहा है। जिसने तुझे छुआ… उसकी हड्डी-हड्डी तोड़ दूँगा।” कैमरा: वो उठता है। घाव के बावजूद कमर में दो पिस्तौल कसता है। राइफल कंधे पर डालता है। बाहर बारिश शुरू हो चुकी है। जोरवार गुफा के मुँह पर खड़ा होकर अँधेरे में देखता है। जोरवार (ठंडी, मौत जैसी आवाज़ में): “पाँच साल… बस पाँच साल और। अब हिसाब चुकता होने का वक्त आ गया।” कैमरा: वाइड शॉट – जोरवार बारिश में निकल पड़ता है। बिजली चमकती है। उसके चेहरे पर निशान और भी गहरा दिखता है। सीन 10 – नया लक्ष्य (रात, पहाड़ी रास्ता) कैमरा: ट्रैकिंग शॉट – जोरवार घोड़े पर सवार। तेज़ भाग रहा है। दूर एक पुराना किला नज़र आता है। वहाँ लालटेन जल रही है। जोरवार (खुद से): “वही जगह… जहाँ उन्होंने मेरी बेटी को छुपाया था। आज मैं वहाँ पहुँचूँगा… और जो भी मिलेगा… सब खत्म।” कैमरा: उसके चेहरे का साइड प्रोफाइल। आँखों में आग। अचानक घोड़े की टापें रुकती हैं। सामने रास्ते पर काले कपड़ों वाले छह आदमी खड़े हैं। नेता (वही पुरानी आवाज़): “जोरवार… तू अब भी जिंदा है? अच्छा। आज तेरी कहानी यहीं खत्म होती है।” जोरवार घोड़े से उतरता है। राइफल तैयार। जोरवार (मुस्कुराते हुए): “नहीं… आज तेरी कहानी खत्म होती है। और मेरी बेटी की कहानी… फिर से शुरू।” कैमरा: दोनों तरफ से गोलियाँ बरसना शुरू। एक्शन फाइट शुरू होने वाली है…
सीन 11 – पहाड़ी रास्ता (रात, बारिश) कैमरा: वाइड शॉट – अँधेरा पहाड़ी रास्ता। जोरवार और छह काले कपड़ों वाले आदमी आमने-सामने। बिजली चमकती है। नेता (मास्क वाले) हाथ उठाता है। नेता: “गोली मत चलाना… इसे जिंदा चाहिए।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार की आँखें सिकुड़ती हैं। उसे शक होता है। जोरवार (ठंडे स्वर में): “जिंदा? तुम मुझे जिंदा क्यों रखना चाहते हो, कायर?” अचानक ज़मीन के नीचे से लोहे के जाल निकलते हैं। साउंड: क्लिक-क्लिक-क्लिक। कैमरा: लो एंगल – जोरवार के पैरों के नीचे लोहे की जंजीरें फटती हैं और उसके दोनों पैर जकड़ लेती हैं। जोरवार गिरने से बचने की कोशिश करता है, लेकिन जंजीरें और कस जाती हैं। जोरवार (गुस्से में चीखता हुआ): “साले… ये क्या है?!” नेता हँसता है। मास्क उतारता है। नेता का चेहरा: मध्य उम्र का, ठंडी आँखें, दाईं भौंह पर पुराना निशान। नेता (अब साफ आवाज़ में): “पाँच साल पहले भी तू ऐसे ही फँसा था, जोरवार। आज फिर फँस गया। तेरी बेटी… अभी भी मेरे पास है।” कैमरा: जोरवार के चेहरे पर सदमा + गुस्सा। वो जंजीरें तोड़ने की कोशिश करता है। हाथों से ज़मीन कुरेदता है। जोरवार: “मीरा कहाँ है?! बोल… वरना मैं तुझे जिंदा गाड़ दूँगा!” नेता पास आकर झुकता है। नेता: “धैर्य रख। पहले तू मेरे लिए एक काम कर… तब बताऊँगा।” सीन 12 – जाल और पूरा होता है कैमरा: मीडियम शॉट – नेता के आदमी जोरवार के हाथ भी बाँध देते हैं। राइफल और पिस्तौल छीन लेते हैं। जोरवार को घुटनों के बल बैठा दिया जाता है। बारिश उसके चेहरे पर बह रही है। जोरवार (दाँतों से बोलता हुआ): “तूने मेरी बेटी को अगलवाया… और अब मुझे इस्तेमाल करना चाहता है? मैं तेरा गुलाम नहीं बनूँगा।” नेता मुस्कुराता है। नेता: “तू बनेगा। क्योंकि मीरा अभी जिंदा है… और वो रोज़ तेरा नाम लेती है।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार की आँखों में आँसू + आग। वो सिर झुका लेता है। पहली बार कमजोर दिखता है। अचानक दूर से सायरन की आवाज़। तेज़। कई जीपों की। नेता का चेहरा बदल जाता है। नेता: “पुलिस?! इतनी जल्दी कैसे?!” कैमरा: वाइड शॉट – पहाड़ी रास्ते पर चार पुलिस जीपें रोशनी फेंकती हुई आ रही हैं। आगे की जीप से इंस्पेक्टर विक्रम उतरता है। कंधे पर बैंडेज। चेहरा कठोर। विक्रम (लाउडस्पीकर से): “जोरवार! और बाकी सब… हथियार डालो! घेराबंदी हो चुकी है!” सीन 13 – तीन तरफ जाल कैमरा: ओवरहेड शॉट – जोरवार बीच में जकड़ा हुआ। एक तरफ नेता और उसके आदमी। दूसरी तरफ पुलिस। नेता गुस्से में अपने आदमियों को देखता है। नेता: “विक्रम को किसने खबर दी?! ये सेटअप था क्या?!” जोरवार अचानक हँस पड़ता है। खून और बारिश मिला चेहरा। जोरवार (हँसते हुए): “अब समझा… तूने मुझे फँसाया, और किसी ने तुझे फँसाया। चंबल में कोई भी सुरक्षित नहीं, नेता।” विक्रम पास आता है। पिस्तौल ताने हुए। विक्रम: “जोरवार… आज दोनों पकड़े जाएँगे। तेरी बेटी की कहानी भी मैं जानता हूँ। बात कर… शायद बच जाए।” जोरवार सिर उठाता है। आँखें सुर्ख। जोरवार: “विक्रम… तू भी वही गधा है। मेरी बेटी की बात मत कर। आज यहाँ से सिर्फ एक ही आदमी निकलेगा… और वो मैं हूँ।” नेता अचानक अपने आदमियों को इशारा करता है। नेता: “गोलियाँ चलाओ! पुलिस और जोरवार… दोनों खत्म!” कैमरा: अचानक कैऑस। नेता के आदमी पुलिस पर फायरिंग शुरू करते हैं। पुलिस भी जवाबी फायरिंग करती है। जोरवार ज़मीन पर लेट जाता है। जंजीरें अभी भी उसके पैरों में हैं। साउंड: गोलियों की बौछार, चीखें, बारिश। कैमरा: हैंडहेल्ड शेक – गोलियाँ पेड़ों और चट्टानों से टकराती हैं। एक पुलिस वाला गिरता है। नेता का एक आदमी छाती में गोली खाकर लुढ़कता है। जोरवार दबी आवाज़ में खुद से: “मीरा… बाबा अभी भी लड़ रहा है…” वो जंजीरों को पत्थर से रगड़ना शुरू करता है। हर रगड़ पर खून निकलता है, लेकिन वो नहीं रुकता। कैमरा: क्लोज-अप – जंजीर का एक कड़ी कमजोर पड़ती दिखती है। सीन 14 – फँसने और निकलने के बीच नेता कवर लेकर चीखता है: “जोरवार को मार डालो! वो जिंदा नहीं बचना चाहिए!” विक्रम भी कवर से: “जोरवार! सरेंडर कर! वरना दोनों तरफ से गोली लगेगी!” जोरवार अचानक जंजीर तोड़ने में सफल हो जाता है। एक कड़ी टूटती है। कैमरा: स्लो-मोशन – जोरवार उठता है। हाथ अभी भी बँधे हैं, लेकिन पैर आज़ाद। वो नेता की तरफ देखता है। जोरवार (गरजते हुए): “नेता… तूने मेरी बेटी छीनी। आज मैं तेरी सब कुछ छीनूँगा!” वो हाथ बँधे होने के बावजूद नेता की तरफ दौड़ पड़ता है। गोलियाँ उसके आसपास गिरती हैं… कैमरा: वाइड शॉट – तीन ताकतें एक जगह उलझी हुई। जोरवार बीच में। बारिश और खून। फेड टू…
सीन 15 – गोलियों के बीच (रात, पहाड़ी रास्ता) कैमरा: हैंडहेल्ड शेक + स्लो-मोशन मिक्स – जोरवार हाथ बँधे हुए नेता
की तरफ दौड़ रहा है। चारों तरफ गोलियाँ बरस रही हैं। बारिश की बूँदें गोलियों से टकराकर चमकती हैं। एक गोली उसके बाएँ बाजू को छू जाती है। खून फूटता है, लेकिन वो नहीं रुकता। जोरवार (दाँतों से बोलता हुआ): “नेता… आज तू मरने वाला है!” नेता पीछे हटता है और अपने आदमी को आदेश देता है। नेता: “उसे रोकोगे नहीं तो मैं खुद तुम्हें मार डालूँगा!” दो आदमी जोरवार पर झपटते हैं। कैमरा: लो एंगल – जोरवार सिर से एक को टक्कर मारता है। दूसरा उसका गला पकड़ता है। जोरवार घुटने से उसके पेट में जोरदार प्रहार करता है। आदमी दुहर जाता है। हाथ अभी भी रस्सी से बँधे हैं। जोरवार रस्सी को पत्थर की धार पर रगड़ने लगता है। सीन 16 – रस्सी टूटती है कैमरा: क्लोज-अप – रस्सी की रेशे एक-एक करके कटते हैं। साउंड: चर्र… चर्र… रस्सी टूटती है। जोरवार के हाथ आज़ाद। वो तुरंत ज़मीन से एक गिरे हुए पिस्तौल को उठा लेता है। जोरवार (ठंडी मुस्कान के साथ): “अब खेल बराबर हो गया।” कैमरा: मीडियम शॉट – जोरवार एक ही गोली में सामने वाले आदमी को माथे में मारता है। दूसरा आदमी चाकू लेकर आता है। जोरवार उसके हाथ को मोड़ता है और उसी चाकू से उसकी गर्दन पर वार करता है। नेता अब अकेला पड़ गया है। उसके बचे हुए दो आदमी पुलिस से उलझे हुए हैं। सीन 17 – जोरवार बनाम नेता कैमरा: टू शॉट – दोनों आमने-सामने। बीच में दस कदम। बारिश तेज़। नेता पिस्तौल तानता है। नेता: “रुक जा जोरवार! मीरा अभी भी मेरे कब्जे में है। तूने एक कदम और बढ़ाया तो… उसकी लाश तेरे सामने रख दूँगा!” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार की आँखें। पल भर के लिए हिचकिचाहट। फिर आग। जोरवार: “तूने पाँच साल से यही धमकी दी है। आज वो धमकी खत्म होती है।” दोनों एक साथ गोली चलाते हैं। कैमरा: स्लो-मोशन – गोलियाँ क्रॉस होती हैं। नेता की गोली जोरवार के दाहिने कंधे में लगती है। जोरवार की गोली नेता के बाएँ जांघ में। दोनों गिरते हैं, लेकिन तुरंत उठते हैं। नेता लँगड़ाते हुए जोरवार पर टूट पड़ता है। दोनों धूल-कीचड़ में लोटने लगते हैं। मुक्के, घूँसे, लातें। जोरवार नेता को दबाता है। दोनों हाथों से उसका गला पकड़ता है। जोरवार (दाँतों से): “बोल… मीरा कहाँ है?!” नेता (हँसते हुए, खून थूकते हुए): “किले के… नीचे… पुरानी सुरंग में… लेकिन तू कभी… नहीं पहुँच पाएगा…” अचानक पीछे से आवाज़ आती है। विक्रम (लाउडस्पीकर से): “जोरवार! छोड़ दे उसे! हाथ ऊपर कर!” कैमरा: वाइड शॉट – पुलिस अब करीब आ चुकी है। सर्चलाइट्स जोरवार और नेता पर फोकस। सीन 18 – पुलिस का घेरा कैमरा: ओवरहेड ड्रोन शॉट – जोरवार नेता के ऊपर बैठा है। चारों तरफ पुलिस के जवान बंदूक ताने खड़े हैं। विक्रम आगे बढ़ता है। पिस्तौल जोरवार पर। विक्रम: “ genug है जोरवार। नेता को हमें सौंप दे। तेरी बेटी की जानकारी हम निकाल लेंगे।” जोरवार नेता का गला और कसता है। जोरवार: “तुम निकालोगे? तुम पाँच साल से कुछ नहीं निकाल सके। आज मैं खुद निकालूँगा।” नेता अचानक जेब से छोटी चाकू निकालकर जोरवार की कमर में चुभो देता है। कैमरा: क्लोज-अप – चाकू घुसता है। जोरवार की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। वो पीछे हटता है। नेता लुढ़ककर भागने की कोशिश करता है। जोरवार खून बहते हुए भी नेता के पैर पकड़ लेता है। जोरवार (चीखते हुए): “भागने मत पा…!” इतने में पुलिस के जवान दोनों पर टूट पड़ते हैं। दो जवान जोरवार को दबोचते हैं। तीन जवान नेता को। विक्रम पास आकर जोरवार के सामने झुकता है। विक्रम (कम आवाज़ में): “बस कर। तू अकेला ये युद्ध नहीं जीत सकता।” जोरवार खून से लथपथ चेहरे के साथ विक्रम की आँखों में देखता है। जोरवार: “मैं अकेला नहीं हूँ… मेरी बेटी मेरे साथ है।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार की मुट्ठी में अभी भी वो पुराना लॉकेट भींचा हुआ है। सीन 19 – गिरफ्तारी कैमरा: वाइड शॉट – दोनों को अलग-अलग जीपों में ठूँसा जाता है। नेता की जीप एक तरफ। जोरवार की दूसरी तरफ। बारिश अब थमने लगी है। जोरवार जीप की खिड़की से बाहर देखता है। दूर किले की तरफ। जोरवार (फुसफुसाते हुए): “मीरा… बाबा आ रहा है। थोड़ा और इंतज़ार कर…” कैमरा: जीपें रवाना होती हैं। अँधेरा पहाड़ी रास्ता। एक आखिरी शॉट – जोरवार की आँखें बंद नहीं होतीं। वो जागता रहता है। फेड टू ब्लैक।
सीन 20 – पुलिस जीप में (रात) कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार जीप की पिछली सीट पर बैठा है। हाथ पीछे हथकड़ी में। कंधे और कमर से खून रिस रहा है। आँखें खुली हुई। बगल में दो सिपाही बंदूक ताने बैठे हैं। सिपाही 1: “साला इतना खून बहने के बाद भी मर नहीं रहा… सच में चंबल का भूत है।” जोरवार सिर घुमाए बिना बोलता है। जोरवार (धीमी, भारी आवाज़ में): “मरना आसान है… जीना मुश्किल। तुम अभी दोनों नहीं समझोगे।” कैमरा: जीप के बाहर का शॉट – अँधेरी सड़क। आगे नेता वाली जीप जा रही है। जोरवार की नज़र नेता वाली जीप पर टिकी रहती है। सीन 21 – थाने में (देर रात) कैमरा: वाइड शॉट – पुराना थाना। बारिश की वजह से आँगन में कीचड़। दोनों कैदियों को अलग-अलग कमरों में ले जाया जाता है। नेता को एक कमरे में। जोरवार को दूसरे में। विक्रम जोरवार वाले कमरे में प्रवेश करता है। दरवाज़ा बंद करता है। कैमरा: मीडियम शॉट – विक्रम कुर्सी खींचकर जोरवार के सामने बैठता है। विक्रम: “जोरवार… अब बातचीत का समय है। नेता ने कहा कि तेरी बेटी किले की सुरंग में है। तू सच बता… वो कौन है? क्यों तेरी बेटी उसके पास है?” जोरवार दीवार से टिका बैठा है। आँखें बंद। जोरवार: “पाँच साल पहले… उसने मेरी बेटी छीनी। सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने उसके तस्करी के धंधे में रुकावट डाली थी। अब तू मुझसे पूछ रहा है… जबकि तुझे खुद उससे पूछना चाहिए।” विक्रम आगे झुकता है। विक्रम: “मैं पूछूँगा। लेकिन तू अगर सहयोग करेगा तो… शायद मीरा को जिंदा पा सकें।” जोरवार अचानक आँखें खोलता है। लाल। जोरवार: “शायद? विक्रम… ‘शायद’ शब्द मेरी बेटी के लिए मत इस्तेमाल करना। या तो वो जिंदा मिलेगी… या फिर ये थाना खून से भर जाएगा।” कैमरा: क्लोज-अप – दोनों की आँखें। तनाव। सीन 22 – नेता का कमरा कैमरा: कट टू – दूसरे कमरे में नेता कुर्सी से बँधा हुआ है। एक इंस्पेक्टर उससे पूछताछ कर रहा है। नेता (हँसते हुए): “मीरा? वो अब मेरी है। जोरवार कभी उसे वापस नहीं पा सकता। सुरंग के अंदर… जो जाएगा, वापस नहीं आएगा।” अचानक बाहर शोर। कैमरा: जोरवार वाले कमरे का दरवाज़ा अचानक धमाके से खुलता है। जोरवार हथकड़ी तोड़े बिना ही सिपाही को धक्का देकर बाहर निकल आया है। कंधे से खून बह रहा है, लेकिन आँखों में पागलपन। जोरवार नेता वाले कमरे की तरफ दौड़ता है। सिपाही चिल्लाते हैं: “रोको उसे!!” कैमरा: हैंडहेल्ड – जोरवार दो सिपाहियों को धक्का देता है। एक को दीवार से टकराता है। वो नेता के कमरे में घुसता है। सीन 23 – थाने के अंदर हाथापाई कैमरा: तंग कमरे का वाइड शॉट – जोरवार नेता के ऊपर टूट पड़ता है। हथकड़ी में बँधे हाथों से ही उसके गले पर वार करता है। जोरवार (गरजते हुए): “बोल साले! सुरंग का नक्शा कहाँ है?! मीरा कहाँ छुपाई है?!” नेता हाँफते हुए: “किले के… पूर्व की तरफ… पुरानी कुएँ वाली सुरंग… लेकिन वहाँ… जहर के साँप हैं… और मेरे आदमी… तैनात हैं…” विक्रम पीछे से आकर जोरवार को पकड़ता है। तीन सिपाही मिलकर उसे खींचते हैं। विक्रम: “बस कर जोरवार! तू थाने में हत्या नहीं करेगा!” जोरवार विक्रम की तरफ मुड़ता है। खून से लथपथ। जोरवार: “तो फिर चल… किले चल। मैं आगे रहूँगा। तू पीछे। अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ… तो पहले मैं नेता को मारूँगा… फिर तुझे।” कैमरा: क्लोज-अप – विक्रम की आँखें। वो कुछ पल सोचता है। बाहर बिजली चमकती है। विक्रम धीरे से बोलता है: “ठीक है। लेकिन एक शर्त… तू हथकड़ी में रहेगा। और पहली गलती पर… मैं खुद गोली मार दूँगा।” जोरवार मुस्कुराता है। खून के दाग के बीच। जोरवार: “शर्त मंजूर। अब चल… सुबह होने से पहले पहुँचना है।” सीन 24 – थाने से रवाना कैमरा: वाइड शॉट – रात के अँधेरे में तीन जीपें थाने से निकलती हैं। आगे वाली जीप में जोरवार और विक्रम। बीच वाली में नेता (पूरी सुरक्षा के साथ)। पीछे जवान। कैमरा: जीप के अंदर – जोरवार खिड़की से बाहर अँधेरे पहाड़ों को देख रहा है। जोरवार (फुसफुसाते हुए): “मीरा… बाबा आ गया। इस बार कोई नहीं रोक पाएगा।” कैमरा: दूर किले की तरफ धीरे-धीरे ज़ूम-इन। पुराना टूटा हुआ किला पहाड़ी पर खड़ा है। अँधेरे में और भी डरावना। साउंड: हवा का शोर + दूर से सियार की आवाज़। फेड टू…
सीन 25 – किले की तरफ रास्ता (रात के आखिरी पहर) कैमरा: वाइड एरियल शॉट – तीन जीपें घुमावदार पहाड़ी सड़क पर चढ़ रही हैं। कोहरा घना है। दूर पुराना किला काले पहाड़ पर खड़ा है। कैमरा: जीप के अंदर – जोरवार खिड़की से किले को घूर रहा है। हथकड़ी में हाथ। कंधे का घाव फिर से खून रिसने लगा है। विक्रम (驾驶 करते हुए): “जोरवार… अगर ये जाल निकला तो मैं तुझे वहीं गोली मार दूँगा। समझा?” जोरवार बिना मुड़े जवाब देता है। जोरवार: “विक्रम… आज अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ तो गोली तेरी नहीं… मेरी चलेगी। तू बस पीछे-पीछे चल।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार की मुट्ठी। हथकड़ी के अंदर भी लॉकेट भींचा हुआ है। सीन 26 – किले के बाहर कैमरा: वाइड शॉट – जीपें किले के टूटे फाटक के बाहर रुकती हैं। जवान उतरते हैं। सर्चलाइट जलती हैं। नेता को घेरकर उतारा जाता है। उसके पैर में अभी भी गोली का घाव है। वो लँगड़ा रहा है। नेता (मुस्कुराते हुए): “अंदर जाओ… लेकिन वापस आने की गारंटी नहीं दे सकता।” जोरवार जीप से उतरता है। हथकड़ी अभी भी है। जोरवार नेता के पास जाकर उसके कान में फुसफुसाता है। जोरवार: “तूने मेरी बेटी को जहाँ छुपाया है… वहीं मैं तुझे दफनाऊँगा।” विक्रम बीच में आता है। विक्रम: “बस। अब अंदर। जोरवार आगे चलेगा। नेता बीच में। हम पीछे।” कैमरा: लाइन बनती है। जोरवार सबसे आगे। अँधेरे किले के मुँह की तरफ। सीन 27 – किले के अंदर (अँधेरा) कैमरा: हैंडहेल्ड – टूटी हुई सीढ़ियाँ। दीवारों पर काई। हवा में सड़ांध। सर्चलाइट की रोशनी धूल में कटती है। अचानक एक शॉट लगता है। साउंड: धांय!! आगे से छुपा बैठा नेता का आदमी फायरिंग करता है। एक सिपाही गिर जाता है। कैमरा: स्लो-मोशन – गोलियों का आदान-प्रदान। जोरवार बिना हथकड़ी खोले ही दीवार के पीछे छिप जाता है। जोरवार (चिल्लाते हुए): “विक्रम! पीछे हट! ये मेरे शिकार हैं!” वो अचानक खुले में निकलता है। हथकड़ी में बँधे हाथों से ही एक पत्थर उठाकर फेंकता है। पत्थर आदमी के माथे पर लगता है। वो गिरता है। दूसरा आदमी पीछे से आता है। जोरवार मुड़कर उसके हाथ की बंदूक छीन लेता है… हथकड़ी के बावजूद। कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार एक गोली में उसे मार गिरता है। जोरवार (ठंडे स्वर में): “अब आगे बढ़ाओ… सुरंग कहाँ है?” नेता लँगड़ाते हुए आगे बढ़ता है। डर उसके चेहरे पर साफ है। सीन 28 – पुरानी सुरंग का मुँह कैमरा: लो एंगल – ज़मीन में एक पुराना कुआँ जैसा मुँह। अंदर अँधेरा। बदबू आ रही है। नेता इशारा करता है। नेता: “यहीं से उतरना होगा। नीचे तीस फुट। फिर लंबी सुरंग। अंत में एक कमरा… वहाँ वो है।” विक्रम रस्सी का इंतजाम करता है। विक्रम: “जोरवार… तू पहले उतर। हथकड़ी खुलेगी नहीं।” जोरवार रस्सी पकड़ता है। आँखों में कोई डर नहीं। जोरवार: “खुले या न खुले… मैं उतरूँगा।” कैमरा: ऊपर से शॉट – जोरवार रस्सी पकड़कर अँधेरे में उतरता जा रहा है। उसकी छाया दीवार पर लंबी होती जाती है। नीचे पहुँचकर वो ज़मीन पर पैर रखता है। अँधेरा। सिर्फ ऊपर की सर्चलाइट की हल्की रोशनी। जोरवार (नीचे से चिल्लाता है): “मीरा!! बाबा आया!!” कोई जवाब नहीं। सिर्फ गूँज। फिर धीमी सी आवाज़… बहुत दूर से… मीरा की आवाज़ (काँपती हुई): “बा… बा…?” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार का चेहरा। आँखें चौड़ी। साँस रुक जाती है। जोरवार (फटी आवाज़ में): “मीरा… मैं यहाँ हूँ! बोलती रह… बाबा आ रहा है!” कैमरा: जोरवार अँधेरी सुरंग में भागता है। हथकड़ी की आवाज़ गूँजती है। पीछे विक्रम और जवान भी उतरने लगते हैं। नेता को जबरदस्ती नीचे उतारा जाता है। सीन 29 – सुरंग के अंदर कैमरा: बहुत तंग कॉरिडोर। दीवारें गीली। कभी-कभी साँप की फुफकार। जोरवार आगे बढ़ रहा है। अचानक उसके पैर के नीचे कुछ हिलता है। एक बड़ा साँप। कैमरा: स्लो-मोशन – जोरवार साँप के सिर पर लात मारता है। साँप उछलता है लेकिन वो बच निकलता है। आगे एक मोड़। रोशनी की एक पतली रेखा। जोरवार तेज़ी से मोड़ काटता है। सामने एक पुराना लोहे का दरवाज़ा। अंदर से हल्की लालटेन जल रही है। जोरवार दरवाज़े पर मुक्का मारता है। जोरवार: “मीरा!! दरवाज़ा खोल!!” अंदर से काँपती आवाज़ आती है। मीरा (अब 13 साल की): “बाबा… वो लोग बाहर ताला लगाकर गए हैं… मैं… मैं खोल नहीं सकती…” कैमरा: जोरवार की आँखें। गुस्सा + दर्द। वो पीछे हटता है और पूरे जोर से दरवाज़े पर लात मारता है। एक बार। दो बार। तीन बार। दरवाज़ा हिलता है। पीछे से विक्रम आवाज़ लगाता है: “जोरवार रुक! हम तोड़ेंगे!” जोरवार बिना सुने चौथी लात मारता है। धमाका! लोहे का दरवाज़ा टूटकर अंदर गिर जाता है। कैमरा: धूल के बीच – जोरवार अंदर घुसता है। सीन 30 – अंतिम कमरा कैमरा: मीडियम शॉट – छोटा अँधेरा कमरा। एक कोने में मीरा बैठती है। गंदी कपड़ों में। बाल बिखरे। लेकिन आँखों में अभी भी रोशनी। वो उठती है। काँपते पैरों से। मीरा: “बाबा…?” जोरवार हथकड़ी में बँधे हाथों के बावजूद आगे बढ़ता है। जोरवार (आवाज़ टूटती हुई): “हाँ… बाबा आया…” दोनों एक-दूसरे की तरफ बढ़ते हैं। अचानक पीछे से आवाज़ आती है। नेता (हँसते हुए): “छूने से पहले… एक बार और सोच ले जोरवार!” कैमरा: नेता के हाथ में छोटा रिमोट। नेता: “इस कमरे के चारों तरफ विस्फोटक लगाए हैं। एक बटन दबाया… तो बाप-बेटी दोनों यहीं दफन हो जाएँगे।” कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार और मीरा की आँखें। तनाव चरम पर। फेड टू…
सीन 31 – अंतिम कमरा (तनाव) कैमरा: टाइट क्लोज-अप – नेता के हाथ में छोटा काला रिमोट। अंगूठा बटन पर। नेता
(हँसते हुए): “एक मिलीमीटर भी हिला… और ये पूरी सुरंग मट्टी में मिल जाएगी। बाप-बेटी की जोड़ी यहीं खत्म।” कैमरा: जोरवार और मीरा। जोरवार हथकड़ी में, कंधे से खून बह रहा है। मीरा उसके पीछे थोड़ी छिपती हुई खड़ी है। मीरा (काँपती आवाज़ में): “बाबा… डर मत… मैं तुम्हारे साथ हूँ।” जोरवार धीरे से सिर हिलाता है। आँखें नेता पर गड़ी हुई। जोरवार (बहुत धीमी, ठंडी आवाज़ में): “नेता… तूने पाँच साल से मेरी बेटी को यहीं रखा। आज तू बटन दबा… लेकिन उससे पहले मैं तेरी गर्दन मरोड़ चुका हूँगा।” नेता रिमोट और ऊपर उठाता है। नेता: “आजमा के देख ले!” इतने में पीछे से विक्रम सुरंग में दाखिल होता है। बंदूक ताने हुए। विक्रम: “रिमोट नीचे रख! वरना गोली चल जाएगी!” नेता मुस्कुराता है। नेता: “गोली चली… तो बटन दब जाएगा। सोचना विक्रम… तीनों की मौत तेरे सिर?” कैमरा: तीनों तरफ तनाव। हवा थम गई लगती है। सीन 32 – अचानक एक्शन कैमरा: स्लो-मोशन शुरू। जोरवार अचानक मीरा को पीछे धकेलता है। जोरवार (चीखते हुए): “मीरा… दीवार के पीछे!!” उसी पल वो नेता पर झपटता है। नेता बटन दबाने की कोशिश करता है… लेकिन जोरवार का कंधे से टकराया हुआ शरीर उसे संतुलन खो देता है। रिमोट हवा में उछलता है। कैमरा: अल्ट्रा स्लो-मोशन – रिमोट हवा में घूमता है। जोरवार हथकड़ी में बँधे हाथों से ही रिमोट को हवा में पकड़ लेता है। धमाका नहीं होता। नेता गुस्से में पिस्तौल निकालता है। जोरवार रिमोट को एक तरफ फेंककर नेता के ऊपर गिर पड़ता है। दोनों ज़मीन पर लोटने लगते हैं। कैमरा: हैंडहेल्ड शेक – मुक्के, घूँसे, खून। नेता जोरवार के घाव पर दबाव डालता है। जोरवार दर्द से चीखता है लेकिन पकड़ नहीं छोड़ता। मीरा एक टूटी हुई लोहे की रॉड उठाती है। मीरा (आँसू भरी आँखों से): “बाबा से दूर हट!!” वो पूरी ताकत से नेता की पीठ पर रॉड मारती है। नेता चीखता है और पीछे हटता है। जोरवार मौके का फायदा उठाते हुए नेता का गला पकड़ लेता है। जोरवार (दाँतों से): “पाँच साल… हर रोज़… मेरी बेटी रोती रही होगी… आज तू रो!” सीन 33 – अंतिम फैसला कैमरा: क्लोज-अप – जोरवार का चेहरा। आँखों में पागलपन और दर्द। वो नेता का गला और कसता है। नेता हाँफने लगता है। विक्रम पीछे से आकर जोरवार का कंधा पकड़ता है। विक्रम: “मत मार! तू अभी भी इंसान है जोरवार! उसे अदालत के हवाले कर!” जोरवार कुछ पल रुकता है। साँस भारी। मीरा पास आकर उसके हाथ को छूती है। मीरा (धीरे से): “बाबा… बस… छोड़ दो। मैं डर गई थी… लेकिन अब तुम आ गए हो। और कुछ मत करो।” कैमरा: जोरवार की आँखें। गुस्सा धीरे-धीरे पिघलता है। वो नेता का गला छोड़ देता है। नेता ज़मीन पर गिरकर खाँसने लगता है। जोरवार मुड़कर मीरा को देखता है। पहली बार आँखों में आँसू। जोरवार (टूटी आवाज़ में): “माफ कर देना… इतने साल लग गए।” मीरा उसके गले लग जाती है। हथकड़ी के बावजूद जोरवार उसे मजबूती से पकड़ लेता है। कैमरा: दोनों पिता-पुत्री का लंबा हग। सर्चलाइट की रोशनी उन पर पड़ रही है। सीन 34 – बाहर निकलना कैमरा: वाइड शॉट – सब ऊपर निकल रहे हैं। नेता को जवान घसीट रहे हैं। जोरवार और मीरा सबसे पीछे। जोरवार अभी भी हथकड़ी में है। विक्रम पास आकर हथकड़ी की चाबी निकालता है। विक्रम: “आज तूने खुद को रोका… इसलिए मैं तुझे एक मौका दे रहा हूँ।” हथकड़ी खुलती है। जोरवार के हाथ आज़ाद। वो तुरंत मीरा का हाथ पकड़ लेता है। जोरवार विक्रम की तरफ देखता है। जोरवार: “विक्रम… मैं चंबल छोड़ दूँगा। लेकिन अगर फिर कभी मेरी बेटी को कोई छूने की कोशिश की… तो याद रखना… चंबल का भूत फिर जाग जाएगा।” विक्रम सिर हिलाता है। कुछ नहीं बोलता। कैमरा: बाहर सुबह की पहली रोशनी। कोहरा छँट रहा है। जोरवार और मीरा किले के फाटक से बाहर निकलते हैं। मीरा उसका हाथ कसकर पकड़े हुए है। मीरा: “बाबा… अब घर चलेंगे?” जोरवार ऊपर आसमान की तरफ देखता है। पहली बार चेहरे पर हल्की मुस्कान। जोरवार: “हाँ… घर। अब बस घर।” कैमरा: दोनों की पीठ। धीरे-धीरे दूर जाते हुए। सूरज निकल रहा है। दूर पुलिस की जीपें नेता को ले जा रही हैं। साउंड: हल्की हवा + पक्षियों की आवाज़। अंतिम शॉट कैमरा: एक्सट्रीम वाइड – चंबल की नदी। सूरज की किरणें पानी पर चमक रही हैं। जोरवार और मीरा नदी किनारे बैठे हैं। जोरवार लॉकेट मीरा के गले में फिर से पहना रहा है। जोरवार (धीरे से): “अब ये कभी मत उतारना।” मीरा मुस्कुराती है। मीरा: “बाबा… तुम वाकई चंबल के भूत हो… लेकिन मेरे बाबा हो।” कैमरा: धीरे-धीरे ऊपर टिल्ट – खुला आसमान। फेड टू व्हाइट।



















