खेत जोतने वाले किसान और चुड़ैल की अमर प्रेम कहानी | Amar Prem Ki Chhaya
खेत तकने वाले किसान और चुड़ैल की प्रेम कहानी शीर्षक: अमर प्रेम की छाया सीन 1: इंट्रो – गांव का खेत (दिन का समय) कैमरा एंगल: वाइड शॉट से शुरू, हरे-भरे खेतों का पैनोरमा। सूरज ढल रहा है। फिर क्लोज़-अप पर एक जवान किसान, राजू (25 साल का, मजबूत काया, सादा कुर्ता-पायजामा), हल जोतते हुए। पसीना बह रहा है उसका। बैकग्राउंड में हल्का लोक संगीत। राजू (अपने आप से): अरे भगवान, इस साल अच्छी फसल हो जाए। बस यही दुआ है मेरी। कट टू: राजू खेत के किनारे पुराने पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पानी पीता है। कैमरा स्लो ज़ूम इन पीपल के पेड़ पर, जहां हवा में अजीब सी सरसराहट। सीन 2: पहली मुलाकात (रात का समय) कैमरा एंगल: लो एंगल शॉट, राजू रात में खेत की रखवाली कर रहा है। चांदनी रात। अचानक हवा तेज़ चलती है। कैमरा पैन टू पीपल का पेड़। एक सफेद साड़ी में सुंदर लड़की (चंदनी, लंबे बाल, पीले दांत, उल्टे पैर – लेकिन अभी दिखाई नहीं देते) प्रकट होती है। ओवर द शोल्डर शॉट राजू की नजर से। चंदनी (मीठी आवाज में, हवा की तरह): कौन हो तुम? इस खेत में इतनी रात को? राजू (डरते हुए, लेकिन हिम्मत से): मैं… मैं राजू हूं। ये मेरा खेत है। तुम कौन हो? यहां क्या कर रही हो? चंदनी (मुस्कुराते हुए, क्लोज़-अप उसके चेहरे पर, आंखें चमकती हैं): मैं चंदनी। सदियों से इस पीपल पर रहती हूं। लोग मुझे चुड़ैल कहते हैं… लेकिन तुम डरो मत। राजू पीछे हटता है। कैमरा क्विक कट टू उसके पैर – उल्टे दिखते हैं। राजू डर जाता है। राजू: चु… चुड़ैल? भगवान बचाए! चंदनी हंसती है, आवाज गूंजती है। वो गायब हो जाती है। राजू भागता है। सीन 3: बार-बार मिलना (कई रातें) मॉन्टाज: अलग-अलग नाइट शॉट्स। राजू खेत में काम करता, चंदनी प्रकट होती। पहले डर, फिर बातें। कैमरा टू शॉट डायलॉग्स के दौरान। एक रात: चंदनी (राजू के पास बैठते हुए, मूनलाइट में उसका चेहरा खूबसूरत लगता): तुम हर रात यहां क्यों आते हो? अकेले नहीं डरते? राजू (अब कम डरते हुए): पहले डरता था… लेकिन अब तुमसे बात करने की आदत हो गई। तुम्हारी कहानी क्या है? चंदनी (उदास होकर, क्लोज़-अप आंसू जैसे): मैं एक गरीब लड़की थी। प्रेमी ने धोखा दिया, गर्भवती हालत में मार डाला। तब से चुड़ैल बन गई। बदला लेती हूं बुरे मर्दों से… लेकिन तुम अच्छे हो। राजू (हमदर्दी से): इतना दर्द? मैं तो बस किसान हूं, खेत जोतता हूं। लेकिन तुम्हारी आंखों में वो दर्द देखता हूं तो मन भर आता है। धीरे-धीरे रोमांस शुरू। चंदनी राजू को फूल देती, हवा से गाती। सीन 4: जबरदस्त रोमांस सीन (पूर्णिमा की रात) कैमरा एंगल: वाइड शॉट खेत में चांदनी। स्लो मोशन। राजू और चंदनी खेत में घूमते। बैकग्राउंड में रोमांटिक संगीत (जैसे पुराना बॉलीवुड गाना स्टाइल)। चंदनी (राजू का हाथ पकड़ते हुए, क्लोज़-अप दोनों के चेहरे): राजू, तुम जानते हो मैं चुड़ैल हूं। फिर भी मुझे इतना प्यार क्यों करते हो? राजू (उसे गोद में उठाते हुए, इंटीमेट क्लोज़-अप): चंदनी, तुम्हारी आत्मा सुंदर है। तेरे स्पर्श में वो ठंडक है जो मेरे थके बदन को सुकून देती है। मैं तुझे अमर प्रेम देना चाहता हूं। चंदनी (शरमाते हुए, आंखें बंद करके): राजू… मुझे गले लगा लो। सदियों बाद किसी ने मुझे इंसान समझा। जबरदस्त रोमांटिक मोमेंट: राजू उसे किस करता है। कैमरा स्लो सर्कलिंग शॉट दोनों के चारों ओर। चंदनी के बाल हवा में उड़ते। वो राजू को अपनी बाहों में कसकर पकड़ती। पैशनेट किस, फिर दोनों खेत में लेट जाते, एक-दूसरे को देखते। राजू (फुसफुसाते हुए): तेरी ये ठंडी सांसें मेरे गर्म बदन पर… जैसे बारिश खेत पर। मैं तुझ बिना अधूरा हूं। चंदनी (उसके सीने पर सिर रखकर): राजू, अगर मैं इंसान होती तो तेरी बीवी बनती। लेकिन अब ये प्रेम ही मेरी जिंदगी है। हर रात तुझे मिलूंगी… तेरे खेत में। कैमरा ज़ूम आउट, दोनों चांदनी में एक हो जाते। इंटेंस रोमांस, स्पर्श, गले लगना। सीन 5: क्लाइमेक्स और अंत (अगली सुबह) कैमरा एंगल: डॉन शॉट। राजू खुश खेत जोतता। गांव वाले उसे देखते, अफवाहें। लेकिन राजू को परवाह नहीं। राजू (अपने आप से): चंदनी, तेरा प्रेम अमर है। मैं हर रात तुझे इंतजार करूंगा। फाइनल शॉट: पीपल का पेड़, चंदनी की छाया दिखती। कैमरा फेड आउट। द एंड ये प्रेम कहानी डर और प्यार की अनोखी मिश्रण है। चुड़ैल का बदला नहीं, बल्कि एक अकेले किसान का साथ पाकर उसका दिल पिघल जाता है। जबरदस्त रोमांस से भरी, जहां इंसान और आत्मा का मिलन eterno हो जाता है।
अमर प्रेम की छाया – भाग २ सीन ६: गांव की चौपाल (दोपहर का समय) कैमरा एंगल: वाइड शॉट। गांव की पुरानी
चौपाल। नीम के पेड़ तले दस-बारह आदमी हुक्का गुड़गुड़ा रहे हैं। बच्चे दूर खेल रहे। राजू वहां पहुंचता है, चेहरा चमक रहा है, आंखों में सपनों जैसी रौशनी। कैमरा स्लो पैन सभी के चेहरों पर – उत्सुकता और शक। बुजुर्ग रामलाल (हुक्का छोड़कर): अरे राजू, आज तू इतना खुश क्यों है रे? फसल अच्छी हुई कि कोई लॉटरी लग गई? राजू (मुस्कुराते हुए, सबके बीच बैठते हुए, मीडियम शॉट): नहीं चाचाजी… कुछ इससे भी बड़ा हुआ है। मुझे… मुझे प्यार हो गया है। सब हंस पड़ते हैं। युवक मुन्ना (मजाक उड़ाते): अरे वाह! कौन सी शहर वाली लड़की फंस गई तेरे जाल में? बता नाम! राजू (गंभीर होकर, क्लोज़-अप उसके चेहरे पर): नाम है चंदनी। लेकिन वो कोई शहर वाली नहीं… वो इस गांव की है। हमारे पीपल की छाया में रहती है। सन्नाटा छा जाता है। कैमरा क्विक कट सबके डरे हुए चेहरों पर। रामलाल (गुस्से में): पागल हो गया है क्या? वो चुड़ैल है रे! सदियों से लोगों को मारती आई है! तू उससे प्यार करता है? राजू (आंखें चमकते हुए, जोश में): हां चाचाजी, करता हूं। वो चुड़ैल नहीं… एक टूटा हुआ दिल है। जिसे किसी ने कभी प्यार नहीं किया। मैंने किया तो वो बदल गई। अब वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती। हर रात मेरे खेत में आती है, मेरे साथ बैठती है, बातें करती है… मुझे गले लगाती है। मुन्ना (डरते-डरते): लेकिन राजू भैया… चुड़ैल का स्पर्श ठंडा होता है ना? तुझे डर नहीं लगता? राजू (हंसते हुए, इमोशनल क्लोज़-अप): ठंडक ही तो सुकून देती है मुन्ना। दिन भर धूप में खेत जोतता हूं, पसीना बहता है। रात में उसकी ठंडी बाहें मुझे शांति देती हैं। उसकी आवाज हवा जैसी मीठी है। वो मेरे बालों में उंगलियां फेरती है तो सारी थकान गायब हो जाती है। एक औरत (दूर से सुनकर): अरे भगवान, ये क्या बोल रहा है! चुड़ैल से इश्क़? ये तो पाप है! राजू (उठकर, जोर से): प्यार कभी पाप नहीं होता अम्मा। वो आत्मा है, मैं इंसान। लेकिन दिल तो दोनों का एक जैसा धड़कता है। मैंने उसे छुआ है, गले लगाया है, किस किया है… और वो पिघल गई। सदियों का बदला भूल गई। अब सिर्फ मुझसे प्यार करती है। सब चुप। कैमरा स्लो ज़ूम इन राजू के चेहरे पर – आंखों में आंसू, लेकिन मुस्कान। रामलाल (धीरे से): अगर सच में वो बदल गई है… तो शायद तेरा प्यार सचमुच अमर है बेटा। लेकिन गांव वाले मानेंगे नहीं। तुझे तंत्र-मंत्र करने वाला समझेंगे। राजू (दृढ़ स्वर में): मानें या न मानें, मुझे परवाह नहीं। मैं हर रात उसे मिलूंगा। मेरे खेत में, उस पीपल के नीचे। वो मेरी है… और मैं उसका। सीन ७: रात का खेत – चंदनी को बताना कैमरा एंगल: नाइट विजन स्टाइल, चांदनी। राजू खेत में आता है। चंदनी पहले से इंतजार कर रही, सफेद साड़ी हवा में लहरा रही। चंदनी (चिंतित होकर, उसके पास आते हुए): राजू, आज गांव में क्या हुआ? मुझे लगा जैसे सब तेरे खिलाफ हो रहे हैं। राजू (उसे बाहों में भरते हुए, पैशनेट क्लोज़-अप): मैंने सबको हमारी प्रेम कहानी बता दी चंदनी। सबको बताया कि एक किसान को चुड़ैल से सच्चा प्यार हो गया। चंदनी (डरते हुए पीछे हटकर): नहीं राजू! अब वो लोग मुझे मारने की कोशिश करेंगे। तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक… मैं फिर अकेली रह जाऊंगी। राजू (उसे फिर कसकर पकड़ते हुए, आंखों में आंखें डालकर): कोई कुछ नहीं कर पाएगा। मैं तेरे सामने खड़ा रहूंगा। अगर कोई तंत्र करेगा तो मैं मंत्र बन जाऊंगा। अगर कोई झाड़ेगा तो मैं तेरी ढाल बनूंगा। तू मेरी है चंदनी… इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में इंसान बनकर मेरे घर आएगी। मैं इंतजार करूंगा। चंदनी (रोते हुए, उसके गले लगकर): राजू… तुमने मुझे जीना सिखा दिया। सदियों बाद किसी ने मुझे अपना कहा। जबरदस्त रोमांटिक मोमेंट: दोनों एक-दूसरे को पैशनेटली किस करते हैं। कैमरा ३६० डिग्री सर्कलिंग शॉट। चंदनी के बाल उड़ रहे, राजू के हाथ उसकी कमर पर। दोनों खेत की मिट्टी पर लेट जाते हैं, चांदनी में चमकते हुए। राजू (फुसफुसाते हुए): आज से गांव वाले चाहे कुछ भी कहें… हमारा प्यार और मजबूत हो गया। तू मेरी अमर प्रेमिका है चंदनी। चंदनी (उसके होंठों पर उंगली रखकर): और तू मेरा अमर प्रेमी। हर रात… इसी खेत में… इसी पीपल के नीचे। कैमरा धीरे-धीरे ऊपर उठता है, वाइड शॉट – दोनों एक-दूसरे में खोए हुए, चांदनी बिखरी हुई। बैकग्राउंड में हल्का रोमांटिक संगीत। फेड आउट। कहानी अभी और आगे बढ़ सकती है… लेकिन ये प्यार अब गांव की अफवाह बन चुका है – एक किसान और चुड़ैल का अमर प्रेम।
अमर प्रेम की छाया – भाग ३ सीन ८: गांव में अफवाहें और तांत्रिक का आगमन (कुछ दिन बाद, शाम का समय) कैमरा
एंगल: वाइड शॉट। गांव की गलियां। लोग फुसफुसा रहे हैं। बच्चे डरकर भाग रहे। कैमरा पैन टू एक अजनबी आदमी – लंबा काला कोट, माथे पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष की माला। हाथ में झोला। वो तांत्रिक बाबा है। गांव वाले उसे घेरकर खड़े हैं। रामलाल (चिंतित होकर): बाबा, ये राजू पागल हो गया है। चुड़ैल से मोहब्बत कर बैठा। रात-रात भर खेत में जाता है। गांव को खतरा है! तांत्रिक बाबा (गहरी आवाज में, क्लोज़-अप उसके चेहरे पर – आंखें लाल): हुम्म… पीपल की चुड़ैल बहुत पुरानी और शक्तिशाली है। बदला लेने वाली। लेकिन अगर कोई इंसान उसका दिल जीत ले तो कमजोर पड़ जाती है। आज रात मैं उसे कैद करूंगा। नींबू-मिर्ची, मंत्र और अग्नि से। मुन्ना (डरते हुए): लेकिन बाबा… अगर राजू भैया बीच में आ गए तो? बाबा (ठंडी मुस्कान): तो राजू को भी समझा दूंगा। चुड़ैल का मोह छुड़वा दूंगा। कट टू: राजू का घर। वो तैयार हो रहा है रात के लिए। उसकी मां रो रही है। मां (रोते हुए): बेटा, मत जा आज। वो तांत्रिक आया है। तेरी जान ले लेगा वो राक्षसी! राजू (मां को गले लगाते हुए, इमोशनल क्लोज़-अप): मां, चंदनी राक्षसी नहीं। वो मेरा प्यार है। अगर कोई उसे छुएगा तो मैं अपनी जान दे दूंगा। सीन ९: क्लाइमेक्स – पूर्णिमा की रात, खेत में टकराव कैमरा एंगल: डार्क नाइट शॉट। पूर्णिमा का चांद। खेत में धुआं उठ रहा। तांत्रिक बाबा ने अग्निकुंड जलाया है। नींबू-मिर्ची जल रही। मंत्र पढ़ रहा। गांव वाले दूर खड़े देख रहे। तांत्रिक (जोर-जोर से): ॐ ह्रीं क्रीं चुड़ैलै नाशाय फट्! प्रकट हो… प्रकट हो! हवा तेज़ चलती है। पेड़ हिलते हैं। चंदनी प्रकट होती है – सफेद साड़ी, बाल बिखरे, आंखें जल रही। लेकिन वो गुस्से में नहीं, दर्द में है। चंदनी (चीखते हुए): क्यों मुझे सताते हो? मैंने किसी का क्या बिगाड़ा? सदियों से बदला लेती थी… लेकिन अब नहीं लेती। राजू ने मुझे बदल दिया! तांत्रिक (हंसते हुए): झूठ बोलती है राक्षसी! तू इंसान का खून पीती है! अचानक राजू दौड़ता हुआ आता है। कैमरा क्विक कट्स – एक्शन स्टाइल। वो तांत्रिक और चंदनी के बीच खड़ा हो जाता है। राजू (चिल्लाते हुए): रुक जाओ बाबा! अगर एक भी मंत्र पढ़ा तो मैं इस आग में कूद जाऊंगा! गांव वाले हक्के-बक्के। तांत्रिक (गुस्से में): पागल हो गया है तू! हट साइड से! राजू (चंदनी की तरफ मुड़कर, आंखों में आंसू): चंदनी… डर मत। मैं हूं ना। चंदनी (रोते हुए, उसके पास आने की कोशिश): राजू… भाग जा यहां से। ये मुझे मार डालेंगे। मैं नहीं चाहती तुझे कुछ हो। राजू (उसे बाहों में भरते हुए, जबरदस्त रोमांटिक मोमेंट अग्निकुंड के सामने): नहीं भागूंगा। अगर तू जाएगी तो मैं भी साथ जाऊंगा। ये लोग नहीं समझते… हमारा प्यार कितना सच्चा है। कैमरा स्लो मोशन। दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए। चंदनी का ठंडा स्पर्श, राजू का गर्म बदन। दोनों किस करते हैं – पैशनेट, बिना डरे। अग्निकुंड की लपटें पीछे। गांव वाले देखकर सन्न रह जाते। तांत्रिक (मंत्र पढ़ते-पढ़ते रुक जाता है, हैरान): ये… ये क्या? चुड़ैल का स्पर्श इंसान को जला देता है… लेकिन ये तो और चमक रहा है! अचानक चंदनी का शरीर चमकने लगता है। सफेद रोशनी। वो राजू से अलग होती है। चंदनी (मुस्कुराते हुए, आंसू बहाते): राजू… तेरे प्यार ने मुझे मुक्ति दे दी। सच्चा प्यार मिला तो मेरी सजा खत्म हो गई। अब मैं जा रही हूं… स्वर्ग या जहां भी… लेकिन तेरा साथ हमेशा रहेगा। राजू (चीखते हुए): नहीं चंदनी! मत जा! चंदनी (हवा में उड़ते हुए, आखिरी बार उसे छूते हुए): हर पूर्णिमा को… तेरे खेत में फूल खिलेंगे। वो मेरी निशानी। मैं तेरे दिल में हूं राजू… अमर प्रेम में। चंदनी रोशनी बनकर गायब हो जाती है। अग्निकुंड बुझ जाता है। हवा शांत। कैमरा क्लोज़-अप राजू के चेहरे पर – वो रो रहा है, लेकिन शांत। सीन १०: अंत – अगली पूर्णिमा कैमरा एंगल: वाइड शॉट। खेत हरा-भरा। राजू अकेला बैठा है पीपल के नीचे। अचानक हवा चलती है। खेत में सफेद फूल खिल उठते हैं – जहां कभी चंदनी आती थी। राजू (मुस्कुराते हुए, फूलों को छूते हुए): चंदनी… तू सच में अमर है। हमारा प्रेम अमर है। कैमरा धीरे-धीरे ऊपर उठता है। पूरा खेत फूलों से ढका। गांव वाले दूर से देख रहे हैं – अब डर नहीं, सम्मान। बैकग्राउंड में मीठा संगीत। राजू (आवाज ओवर): एक किसान और चुड़ैल की प्रेम कहानी… जो गांव की लोककथा बन गई। प्यार की जीत की कहानी। फाइनल शॉट: चांदनी में खेत चमक रहा। फेड टू व्हाइट। समाप्त ये प्रेम कहानी अब पूरी हो गई – डर से शुरू, रोमांस से गुजरी, और मुक्ति पर खत्म। सच्चा प्यार हर बंधन तोड़ देता है, चाहे इंसान हो या आत्मा।
pics taken by google ,



















