terrorism in india short story

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terrorism in india short story , टेररिज्म शार्ट स्टोरी ,

मुम्बई एक घर जिसके सामने से एक सड़क गयी है , शाम के ४ बजे का टाइम एक ५ साल का बच्चा ,

अपनी पीठ पर स्कूल बैग लटकाये मटकता , नाचता, झूमता उस घर की तरफ आ रहा है ।

बाजूवाली ऑन्टी से रूम की चाभी लेता है , दरवाज़ा खुलवाता है और अंदर चला जाता है ।

लेकिन जब वो दीवार पर लगी एक तस्वीर को देखता है , (जो की एक काले बुर्के में है ) वो उसकी अम्मी की तस्वीर है , मायूसी से उसे देखता रह जाता है ।

फिर फ्रेश होता है और किचन से से खाना निकाल कर लाता है और उसी तस्वीर की तरफ मुँह करके खाना खाने बैठ जाता है ।

एक निवाला मुँह में डालता है , फिर उस तस्वीर की तरफ देखता है इसी तरह खाना खता है ,

तभी बाहर से उसके फ्रैंड्स खेलने के लिए उसे बुलाते हैं , वो खेलने के लिए उनके साथ चला जाता है , खेलते खेलते अँधेरा होने लगता है , सभी बच्चों की मायें आवाज़ लगाती हैं ,

चलो घर खेल बंद करो , बहुत टाइम हो गया है , सभी अपने अपने घर चले जाते हैं , वो लड़का अकेला उस ग्राउण्ड में खड़ा रह जाता है ।

 

फिर वो भी अपने घर की तरफ मुँह लटकाये आगे बढ़ता है ,

अंदर जाता है उस तस्वीर को सज़दा करता है , फिर पढ़ाई करने बैठ जाता है ,

दीवार पर लगी घड़ी में समय का काँटा टिक टिक करते आगे बढ़ रहा है ,

७:३० बज जाते हैं लड़का दरवाज़े की तरफ देख रहा है , तभी दरवाज़े पर दस्तक होती है ,

लड़का दरवाज़ा खोलता है और चिल्लाता है अब्बू आ गए ,

बेटे को सीने से लगा लेट है बैग से चॉक्लेट निकालकर उसे खाने के लिए देता है , लड़का खुश हो जाता है ,

फिर अचानक तस्वीर की तरफ इशारा करता है ,

और पूछता है अम्मी हमेशा हमारी तरफ देखती है पर हमारे पास क्यों नहीं आती हैं ,

बाप कहता है बेटा वो हमसे बहुत दूर हैं , हमारे पास नहीं आ सकती । बेटा फिर मायूस हो जाता है ,

 

और पढ़ाई करने लगता है , बाप खाना बनाता है दोनों खाते हैं फिर सोने के लिए लेट जाते हैं ,

लड़का फिर पूछता है अम्मी हमसे कितनी दूर है ,

बाप कहता है बेटा वो हमसे बहुत दूर हैं हम उनके पास नहीं जा सकते हैं ।

फिर दोनों सो जाते हैं , दुसरे दिन सुबह होती है ।

बाप बेटे को तैयार करता है उसे नाश्ता खिलाता है स्कूल भेजता है, और ऑफिस चला जाता है ।

यही रूटीन उनका रोज़ का होता है , एक शाम लड़का स्कूल से आता है , वही डेली की तरह पढता हुआ बैठा रहता है ,

घड़ी के काँटे टिक टिक करते आगे बढ़ रहे हैं , घड़ी में ७:३० बज चुके हैं ,आज उसके अब्बू घर नहीं आते हैं .

लड़का दरवाज़ा खोलके बैठा बैठा वहीँ दरवाज़े पर सो जाता है , सुबह होती है मोहल्ले वाले पेपर पढ़ते हैं मुम्बई लोकल बम ब्लास्ट में हज़ारों की तादाद में लोग हताहत हुए , सैकड़ों मारे गए ।

मरने वालों की लिस्ट में उस लड़के के बाप का भी नाम होता है ।

 

वो उस लड़के के घर जाते हैं , लड़के को गोद में उठा लेते हैं खिलाते पिलाते हैं खूब लाड प्यार करते हैं ,

दो दिन हो जाते हैं लड़का बिना अपने अब्बू के बीमार होने लग जाता हैं , मोहल्ले वाले उसे अनाथाश्रम में देने की सोचते हैं , और उसे देने वाले ही होते हैं लेकिन तभी उसके अब्बू आ जाते हैं ,

अपने अब्बू को देखकर वो उनसे लिपटकर रोने लगता है , बाप बेटे को गले से चिपका लेता है ,

मोहल्ले वाले पूछते थे कहाँ थे अभी तक वो कहता है ऑफिस के काम से बाहर जाना पड़ गया था तभी मुम्बई लोकल ब्लास्ट हो गया जिसके चलते इस रुट की सभी ट्रेनें बंद हो गयी ,

यहां इन्फॉर्म करने की कोशिश भी की मगर मोबाइल नेटवर्क काम नहीं कर रहा था ।

किसी तरह आज पंहुचा , बाप को पाकर लड़का ठीक हो जाता है मोहाली वाले और अनाथाश्रम वाले भी वापस चले जाते हैं।

और बाप बेटे फिर आराम से रहने लग जाते हैं ।
हैप्पी एंडिंग

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pix taken by google