दरमियानी रात के दायरे में अँधेरा है बहुत dard shayari ,

0
605
दरमियानी रात के दायरे में अँधेरा है बहुत dard shayari ,
दरमियानी रात के दायरे में अँधेरा है बहुत dard shayari ,

दरमियानी रात के दायरे में अँधेरा है बहुत dard shayari ,

दरमियानी रात के दायरे में अँधेरा है बहुत ,

यही सोचकर शायद शब् ए फ़िराक शहर भर से दूर होती गयी ।

 

रास्ता ख़त्म हो जाता है एक मंज़िल एक बाद ,

बस इंतज़ार ख़त्म नहीं होता एक मुद्दत के बाद भी ।

 

शहर भर के कत्लगाहों के आज के अब के अभी नाम बदल डालो ,

हुश्न ए सरपरस्ती में दिलरुबा चाहे या जान ए जिगर रखवा लो ।

 

ज़िन्दगी के सफहों में पलटते फ़लसफ़े हैं ,

कुछ आह का फुवां है कुछ ख़्वाब मनचले हैं ।

 

यूँ नहीं की दिल ए नादाँ का दर्द ए मोहब्बत से सरोकार नहीं ,

ज़ख्म छुपा रखते हैं तहों में आह की नुमाइश करने वाला अपना किरदार नहीं ।

love shayari , 

कितनी उम्र ए ज़ाया की एक मुख़्तसर सी चाहत के वास्ते ,

हर दौर ए मोहब्बत का बस हिज़्र ए तन्हाई से वास्ता रखकर ।

 

रातों की भी क्या चलती फिरती तस्वीर हुआ करती है ,

गुज़रते हैं सभी नज़रों से ज़हन में किसी की ताबीर नहीं हुआ करती है ।

 

इन रास्तों पर मुशाफ़िर हर रोज़ मिलते हैं ,

मगर कुछ मुलाक़ातें हमेशा रास्तों के साथ चलती हैं ।

 

जाने कितने कारवां बनते बिखरते गए ,

ये राहें कल भी तन्हा थी ये राहें अब भी तन्हा हैं ।

 

राह ए मंज़िल ने रास्ता खुद ब खुद साफ़ कर दिया ,

किसी को गुनहगार कहा किसी को माफ़ कर दिया ।

patriotic poetry ,

रास्ते की आज़ादी कहें या फितरत में ढलना ,

कुछ दूर साथ चलना फिर साथी बदलना ।

 

कभी सोचा नहीं उस रास्ते में बढ़ते आगे ,

कितने सावन बीते होंगे किसी के कितनी रातें काटी होगी किसी ने तन्हा जागे ।

 

दिलों के दरमियाँ ये दायरे तो कम न थे ,

जो एक दूजे के ज़हन में सरहदी लक़ीर खींची गयी ।

 

दाद देता हूँ तेरी तस्वीर बनाने वाले को ,

हुश्न ए मुजस्सिम उतारा क्या कम था ,

एहसास ए ज़िन्दगी भी डाल देगा उम्मीद न थी ।

romantic shayari ,

pix taken by google ,