दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले alfaaz shayari ,

दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले alfaaz shayari ,

0
5826
दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले alfaaz shayari ,
दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले alfaaz shayari ,

दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले alfaaz shayari ,

दो वक़्त की रोटी कभी दो वक़्त के लाले ,

गरीब की तक़दीर में क्या बोसा ए मोहब्बत क्या आरज़ू ए निवाले

 

इस तरह ज़मीर से रूह ओ जान में बसा है तू ,

जिस तरह मेरा हुब्ब ए वतन मेरा ख़ुदा है तू ।

 

घुस जाते हैं झरोखों से दस्तक दिए बगैर ,

दिल में रहने वाले मेहमान कुछ बेईमान हुआ करते हैं ।

hindi shayari

आफताब ए हुश्न को बेख़ौफ़ लपकने की जुर्रत ,

मौसमी सर्द हवाएं कनपटी झांझर कर रही हैं जैसे ।

 

अब तो बोसा ए गुल से रात कटती है ,

ख्यालों को तेरे तकिये के नीचे रख कर ।

 

कयामतों के बाद बोसा ए मोहब्बत का वादा नहीं करते ,

गोया जो कुछ भी हो यहां आज अभी हो ।

 

कितने मुद्दे हैं मेरे जज़्बों में ,

बस एक बोसा ए हुश्न का कोई जलवा ही नहीं ।

 

नज़र जमा के रखी थी झरते लफ़्ज़ों पर ,

जाने वो क्या समझे की कीक मार कर भरी महफ़िल से भाग गए ।

 

रात की तन्हाइयों के पहलू से सुबह के ओस की शबनमी बूंदों का बोसा लेने,

तह ए दिल की हसरतें तमाम चलीं ।

 

नर्म लहज़े से छेड़ती सरगम ,

झीने आँचल में कई तूफ़ान सजा रखी हैं ।

literature poetry 

जिस्मो की नुमाइश पर सारा ज़माना खड़ा है ,

दिल के जज़्बों का कहीं कोई खरीदार नहीं ।

 

बारिश की भीगी दीवारें तो सूख जाएगी सूरज की तपिश से ,

ग़म ए उल्फत जो भीतर हो दिल की कभी सीलन नहीं जाती।

 

ज़माने की रवायत में था दिल तोडना ,

हम कांच की तस्वीर में खोट ढूढते रहे ।

 

शहर भर के थे जो कभी नूर ए नज़र ,

आजकल हमारे इश्क़ का दाग दामन में छुपाये फिरते हैं ।

 

चढ़ रही है रात हिजाबों वाली ,

आज फिर कोई चाँद फलक पर क़यामत बनके नज़र आएगा ।

sad shayari 

बेबाक तकती है नज़र खिड़की के झरोखों से ,

जोरों की मोहब्बत है या खाली मोहब्बत ए एहसास है ।

pix taken by google

 

 

 

Premium WordPress Themes Download
Premium WordPress Themes Download
Download Nulled WordPress Themes
Download Premium WordPress Themes Free
lynda course free download
download karbonn firmware
Download WordPress Themes Free
free download udemy course

NO COMMENTS