शराब मयकशी और मयख़ाना romantic shayari ,

शराब मयकशी और मयख़ाना romantic shayari ,

0
1206
शराब मयकशी और मयख़ाना romantic shayari ,
शराब मयकशी और मयख़ाना romantic shayari ,

शराब मयकशी और मयख़ाना romantic shayari ,

शराब मयकशी और मयख़ाना ,

साल दर साल खाली जामों की फ़ितरत क्या है ।

 

जब भी पैमानों से छलक जाती है ,

बात दिल की ज़बान पर आती है ।

 

गुस्ताख़ लगती है क़लम की सोहबत ,

ज़बान पर आने से पहले राज़ सारे दिल के खोल देती है ।

quotes life hindi 

कुछ ख़ास मौकों की तलाश रहती है ,

ख़ाली लबों को बस जाम की प्यास रहती है ।

 

साल दर साल यही हाल रहा ,

आशिक़ हर हाल में बद- हाल रहा ।

 

बीते साल के जुमले क्या कम थे , जो नया साल ,

साल दर साल दर पर मुँह उबाए खड़ा है ।

 

तेरी आँखों के पैमाने में डूब मरना क्या कम था ,

जो ज़ालिम ने सर ए महफ़िल हाँथो में जाम थमाया है ।

 

दुनिया के अजायब में बस जिस्मों का तमाशा है ,

रूह बेंचो अगर कोई ज़माने भर में ख़रीदार मिले ।

 

चंद सिक्कों में वज़ूद तौल देते हैं ,

क्या किसी का रूहानी किरदार रोक लेते हैं ।

 

उठते गिरते पर्दों सी खुले आम ज़िन्दगी ,

होता हर रोज़ तमाशा है बड़ी बद्नाम सी ज़िन्दगी

 

तूने तो फाड़े थे जिगर के टुकड़े मेरे ,

अब तेरे ख़त को जला कर अलाव हर रोज़ सेंकता हूँ ।

 

शीसे से उतरता है जो अक़्स धीरे धीरे ,

हो गर ज़बीं ए यार क़यामत भी सँवर जाए ।

 

हसरतें जितनी हैं बंद शीसे में ,

छन से शीसा जो चटक जाए तो बात बन जाए ।

 

तू मेरी रश्म ए उल्फ़त को हादसे का इल्ज़ाम न दे ,

बला अभी टली नहीं नए साल में तोहफा ज़रूर कोई लाऊँगा ।

 

दरूं ए इश्क़ से चिलमन हटा दो ,

की तमाम हसरतें बेज़ार लगती हैं ।

 

इश्क़ समझूँ या जराफत समझूँ ,

सुर्ख होठों के छलकते जाम को आतिश ए जाम समझूँ या आब ए जम जम समझूँ ।

 

मत पूँछ ग़ालिब की इश्क़ का हाल ए मुक़ाम कैसा है ,

तेरी तस्वीर से तेरा क़िरदार ढूँढ लाया हूँ ।

khatarnak bhoot 

आतिश ए जहाँ में सुकून नहीं ,

जिस्म को रूहों में फ़नाह होने दो ।

pix taken by google

Download Nulled WordPress Themes
Premium WordPress Themes Download
Free Download WordPress Themes
Download Nulled WordPress Themes
lynda course free download
download micromax firmware
Free Download WordPress Themes
udemy course download free

NO COMMENTS