सियासतदानों से ख़ास ओ आम तक funny political shayari ,

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सियासतदानों से ख़ास ओ आम तक funny political shayari ,
सियासतदानों से ख़ास ओ आम तक funny political shayari ,

सियासतदानों से ख़ास ओ आम तक funny political shayari ,

सियासतदानों से ख़ास ओ आम तक ,

बच्चे बच्चे को हिंदुस्तान की आज़ादी का मतलब समझना चाहिए ।

 

सियासत के नाम पर कितने ज़ुल्म सहे जाती है ,

हुक़ूमत ए अवाम बेज़बान जानवर तो नहीं ।

good night sms

जिस्म जलता है दोज़ख में रूहों को पनाह मिलती नहीं ,

वतन के आब ओ दाना का जिगर पर क़र्ज़ बाकी है ।

 

धरा के हर लाल पर सर ज़मीन का क़र्ज़ इतना है ,

वतन के वास्ते देकर भी क़ुरबानी रूहें फ़नाह हो सकती नहीं ।

 

जश्न एक रात का नहीं है आज़ादी ,

दिलों में शम्मा हर दम जलाये रखना है ।

 

सच था कड़वा ज़हर न था ,

इसलिए दुकानों में कोई ख़रीदार न था ।

 

बढ़ के लपक लूँ चाँद तारे वो हिम्मत न सही ,

बंद पलकों में शब् ए बरात सजाने की हिम्मत आज भी है ।

 

अभी भी उन बाज़ुओं का दम देखो ,

जो घर की सब्ज़ियों के साथ पोते का बस्ता भी ढोता है

 

फलों के बोझ से झुक गयीं डालियाँ दरख़्तों की ,

लोग समझे उम्र से पहले बृक्ष बुड्ढे हो गए होंगे ।

 

हदों में रह कर मोहब्बतें नहीं होती ,

सरहदों के पार भी मोहब्बतों का क़स्बा है

 

कोई ज़ुल्म कहे या समझे इश्क़ ए जूनून ,

बात निकली है ज़बान से तो दिल तक पहुचनी चाहिए

 

सारी सारी रात बेज़बानी में बयान बाज़ी ,

खामोशियों से दिल में हुए हर ज़ुल्म बता देती है ।

 

जितने ज़ुल्म थे हो गए पूरे ,

या मोहब्बत के नाम पर कोई रहम ओ करम बाकी है

 

लाख हों मज़बूरियाँ फिर एक धरा हो इक गगन ,

गुंचा गुंचा अंजुमन का ग़ुल ए गुलज़ार होना चाहिए

 

ज़र्द पत्तों को बक्स देना था ,

क्यों बेज़बानो को बटोरा सकेला जला के ख़ाक़ किया

 

बेज़बान पत्थरों से सुनो दास्तान ए वक़्त की ज़ुल्मत ,

जिसने हर घाव बुत बनकर सीने पर लिए हैं हँस कर ।

 

ग़म जितने भी ज़माने भर ने दिए ,

सबके सब तेरी ज़ुल्मत से कम निकले ।

2line attitude shayari 

क्या ज़ुल्म करती है क़लम घिस घिस कर ,

हर्फ़ दर हर्फ़ पन्नों पर बयान रो रो के होता है ।

pix taken by google