fearsome journey by ghost train a short horror story in hindi ,

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आज वास्तविक घटना से प्रेरित कल्पना से परे हम एक ऐसी अजीब कहानी सुनाने जा रहे हैं , जो सुनने में अजीब मगर महसूस करने में रौंगटे खड़े कर देने वाली है , तो सुरु करते हैं कहानी जबलपुर मध्यप्रदेश रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर ५ जहां से मुंबई के लिए एक ख़ास ट्रैन बनती है , जिसका नाम हमने घोस्ट एक्सप्रेस रख दिया है , कहानी में दो किरदार हैं चन्टू और बंटू , बंटू को जबलपुर में रहने वाली एक खूब सूरत लड़की मोना से बेइंतेहा प्यार है , और मोना की जॉब मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में लग गयी हैं , बंटू जबलपुरिया टपोरी लड़की ने हंस के बात क्या कर ली कम्बख्त दिल पर ले बैठा ,थोड़ा लड़की को घुमाया फिराया लड़की चालू थी बंटू की जेब पर ही हमला बोलती कुछ ही रोज़ में साथ जीने मरने के वादे खा लिए , बंटू मोना के हुश्न के मायाजाल में इस तरह से गिरफ्त था की उसे भी मोना विश्वसुंदरी से भी बढ़कर लगती थी मोना थी ही क़ातिलाना , जब वो मटक के कमर हिला के चलती थी किसी नागिन से कम नहीं थी , फिर तो बंटू बेचारा अभी छोटा सा सपोला ही था इश्क़ के मामले में जिसे मोना रुपी हुश्न की नागिन ने अपने वश में कर लिया था ।

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जान तुम मुझे छोड़ने मेरे साथ मुंबई चलोगे न , बस ये बोलना था की बंटू तुरंत तैयार अब गर्लफ्रेंड को मुंबई छोड़ने जाना है उसके लिए ए. सी . के टिकट का इंतज़ाम और रास्ते के खर्चा का पैसा कैसे आएगा , तभी चन्टू बोला भाई बाइक है न गिरवी रख दे किस दिन काम आएगी लोग बाग़ मोहब्बत के लिए ज़मीन जायदाद बेच देते हैं फिर तो ये बाइक है , बंटू बोला मगर डैड को पता चल गया तो लात मारकर घर से भगा देंगे , चन्टू के पास इस बात का भी हल था , उसने तपाक से बोला भाई हम बाइक बेच थोड़े न रहे हैं , हम तो गिरवी रख रहे हैं , बंटू बोला हाँ कहता तो तू ठीक है , अब तो मोना भी कमाने लगी है बस उसकी विदाई का आखिरी खर्चा है इसके बाद अपना खर्चा वही चलाएगी , चन्टू बोला हाँ भाई गोद ले लेगी हम दोनों बेरोज़गारों को , बंटू बोला दोनों को क्यों गोद लेगी गर्लफ्रेंड है मेरी , साला हमेशा मेरे साथ अपने जुगाड़ में लग जाता है , तालाब खुदा नहीं की लगे मगरमच्छ तैरने , चन्टू बंटू की बात सुनकर नाराज़ हो जाता है , बंटू पूछता है चलेगा न भाई मेरे साथ मुंबई मोना को छोड़ने दोनों रास्ते में खूब ऐश करेंगे , चन्टू हम्म कहता हुआ चला जाता है , किसी तरह बाइक बेचकर मुंबई के लिए किराए और रास्ते के खर्चे का इंतज़ाम हो जाता है ।

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जबलपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर ५ शाम के ७ बज चुके हैं , यात्री प्रतीक्षालय से निकल कर चन्टू बंटू प्लेटफार्म की बेंच पर बैठे मोना का इंतज़ार कर रहे हैं , थोड़ी ही देर में एक सीधी सादी सलवार शूट में मोना की एंट्री प्लेटफार्म में होती है सारा का सारा प्लेटफार्म जैसे मोना का स्वागत करने के लिए व्याकुल था , मगर जब मोना आकर चन्टू बंटू के पास रुकी हाय हेलो किया तो सब की सुलग गयी , खैर ये उनका आपसी मैटर था अपन आते हैं कहानी के मुख्य पृष्ठ पर , चन्टू बंटू टी . सी . से पूछकर अपना बोगी नंबर क्लियर करते हैं , मगर दुर्भाग्यवश कहे या सौभाग्यवश चन्टू बंटू की सीट मोना की बोगी से अलग थी । खैर कपार्टमेन्ट अलग होने से क्या है जबलपुर के छोरे हैं सारे रास्ते ट्रैन का जायज़ा न लिया तो क्या किया । चन्टू बंटू को अशोका फिल्म के दौरान शूटिंग में बीच में कूदने का खूब एक्सपीरियंस था बहुत लट्ठ बजाये थे पुलिसवालो ने पिछवाड़े में ।

ट्रैन जबलपर का स्टेशन छोड़ देती है , बंटू चन्टू बंटू हर १० मिनिट में जाकर मोना की फरमाइशें सुनकर चले आते हैं , चूंकि मोना का कम्पार्टमेंट अलग है रात का टाइम है तो वो उसे ज़्यादा डिस्टर्ब नहीं करते हैं , चन्टू बंटू अपने बर्थ पर बैठे हैं , तभी कम्बल तकिया देने वाला आता है , चन्टू बंटू की बातें वो ध्यान से सुनता है , और समझ जाता है ये जबलपुरिये टपोरी हैं रात हो गयी है अब इन्हे कुछ नहीं बस दारू चाहिए , बेड सीट वाला पूछता है क्या भाई लोग माल चाहिए क्या १००० का माल १२०० में मिलेगा , चन्टू बोलता है चलेगा बंटू बोलता है पैसे कहाँ है बे अभी वापस भी लौटना है इसी ट्रैन से चन्टू बोलता है भाई है अपुन तेरा तू अपने को क्या फक्कड़ समझता है , , बेड सीट वाला बोलता है ये भाई लोग जल्दी क्लियर करो अपने पास टाइम नहीं है , और वो वहां से चला जाता है , चन्टू उसके पीछे हो लेता है जहां बेड सीट का स्टॉक है वहीं से पेपर में लपेट कर एक बोतल वो चन्टू को देता है और पैसे चुपचाप दबाकर चन्टू को वहाँ से कल्टी कर देता है ,

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चन्टू वहीँ पेप्सी लेता है और आधी बोतल शराब उसमे डाल देता है बाकी , बचा के रख लेता है , अभी दो दो घूँट पिए ही थे की , कम्पार्टमेंट में टी , सी . (टिकट चेकर ) आ जाता है , वो पूछ लेता है चन्टू बंटू से वो मैडम के साथ तुम दोनों हो , बंटू चन्टू बड़ा गौरवान्वित महसूस करते हैं , तभी टी. सी. बोलता है ये जो तुम लोग कर रहे हो न बहुत गलत कर रहे हो अभी फाइन मारूँगा सब होशियारी निकल जाएगी , चन्टू बंटू बोलते हैं सॉरी सर , टी . सी. दबी आवाज़ में पूछता है सब पी गए या अभी कुछ बची है चन्टू बंटू के चेहरे खिल जाते हैं , वो बोलते हैं हाफ रखी है मगर बर्फ का इंतज़ाम नहीं है , टी . सी . बोलता है रुको मैं अभीबर्फ़ और ग्लास का इंतज़ाम करता हूँ , और चन्टू को अपने साथ लेकर चला जाता है , और जब लौटता है उसके हाँथ में बर्फ और चन्टू के हाथ में तीन चमचमाती ग्लास , बंटू बोलता है आप ग्रेट हैं सर , टी. सी. बोलता है बस सब जुगाड़ है अपना , तीनो के पैग बनते हैं , चन्टू बंटू अपना लिटिल लिटिल पैग बनाते हैं और टी . सी . के लिए लार्ज पटियाला पैग बना देते हैं टी . सी . पीने के बाद अपनी राम कहानी बताना सुरु करता ही है की , ट्रैन के कम्पार्टमेंट में हड़कंप मच जाता है की कोई बुड्ढा आदमी टॉयलेट में घुस कर सारे लॉक बंद कर लिया है अब उसे खोलना नहीं आरहा है ,चन्टू बंटू पूछते हैं चलती ट्रैन में बर्फ कहाँ से मिल गयी सर , टी . सी . बोलता है डेड बॉडी का एक बॉक्स रखा है उसी से , अब तुम्हारे लिए ट्रैन में फ्रीजर तो लगवा नहीं सकता , चन्टू बंटू बोलते हैं आप बहुत मज़ाकिया हैं सर , टी . सी . वहीं से चिल्लाता हुआ बढ़ता है ,   जाने कहाँ से गाँव के लोग ट्रैन में चले आते हैं जिन्हे बाथरूम भी जाना नहीं आता , और वो ये कहते वहाँ से चला जाता है , ट्रैन अभी ५ मिनिट ही हुए थोड़ा आगे बढ़ती है की ,

उसके जाने के ५ मिनिट के अंदर ही एक दूसरा टी . सी . आता है , वो चन्टू बंटू की टिकट चेक करता है उसमे तो पहले से टिकट चेक का निशान देखकर टी. सी. बोलता है खुद ही टिकट चेक कर लिए क्या चन्टू बंटू बोलते हैं नहीं सर अभी एक टी . सी . आया था उसी ने चेक किया है , टी. सी .बोलता है शराब पिए हो क्या अभी फाइन मार दूँगा समझ में आजायेगा , चन्टू बंटू कुछ नहीं बोलते हैं , और वो टी . सी. भी वहां से चला जाता है , चन्टू बंटू की इसी कश्मकश में रात गुज़र जाती है , की आखिर जिसके साथ शराब पी आखिर वो था कौन , इटारसी के पहले दूसरा टी . सी . चढ़ेगा भी नहीं , सुबह नींद खुलती है कल्याण स्टेशन आने वाला है सभी उतरने वाले यात्री अपनी तैयारी बना चुके थे , मोना भी अपने पारम्परिक भारतीय परिधान सलवार शूट से जीन्स टॉप में आ चुकी थी एक ज़बरदस्त चिंघाड़ के साथ ट्रैन के ब्रेक लगते हैं , मोना आखिरी स्माइल देती हुयी बाय करती है और प्लेटफार्म में उतर जाती है , तभी मोना का मुंबई वाला बॉयफ्रेंड आजाता है और मोना उससे पहले हाँथ मिलाती फिर गले लग जाती है , इतने में ट्रैन की सीटी बज जाती है और छुकछुक करती ट्रैन आगे निकल जाती है , ये मंज़र बंटू की आँखों से हटता ही नहीं है चन्टू , बोलता है भाई कोई बात नहीं लडकियां होती ही बेवफा हैं , उदास बंटू बोगी के दरवाजे पर खड़ा कल्याण स्टेशन की तरफ घूरता रह जाता है , और ट्रैन सी . एस . टी . अर्थात छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पहुंच जाती है ,

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चन्टू बंटू को दोपहर फिर इसी ट्रैन से लौटना था तो दोनों कहीं नहीं जाते हैं वहीँ प्लेटफार्म में ट्रैन के पास ही खड़े रहते हैं तभी लगेज बोगी से एक डेड बॉडी बॉक्स से निकाली जाती है , और थोड़ी ही देर में कुछ लोग रोते बिलखते इकठ्ठा हो जाते हैं शायद उस लाश के परिवार वाले थे , एक औरत दहाड़ मार मार के रोना सुरु कर देती है , उससे लग रहा था शायद वो शख्स की पत्नी थी , बहुत ज़िद के बाद बॉक्स में बंद बर्फ से ढकी लाश के चेहरे से चादर हटाई जाती है , चन्टू बंटू भी बड़ी उत्सुकता के साथ लाश का चेहरा देखते हैं और चेहरा देखते ही शॉक्ड रह जाते हैं , चन्टू बोलता है भाई ये तो वही टी . सी . है न जिसने कल रात हमारे साथ शराब पी थी , बंटू बोलता है हाँ भाई , बड़ा नेक आदमी था बेचारा चलती ट्रैन में बर्फ का जुगाड़ कर दिया था , तभी बाजु से टी. सी . गुज़रता है , बंटू चन्टू उससे पूछते हैं सर ये टी . सी . साहेब कैसे ख़त्म हो गए , बड़े नेक इन्शान थे टी, सी. बोलता है बेवड़ा था साला लीवर खराब थे फिर भी शराब पीना बंद नहीं किया था , कल यहीं से इसी ट्रैन में ड्यूटी लगी थी जबलपुर जाना था इटारसी से पहले ही मर गया , अब बीवी बच्चे बचे हैं , रोयेंगे इसके नाम को , चन्टू पूछता है सर मगर ये तो हमारे साथ ही आये है रात में , टी. सी . दोनों की शक्ल देखता है तुम दोनों भी येडे हो क्या लाश नहीं दिख रही है सामने , इतना सुनते ही चन्टू बंटू वहाँ से खिसक लेते हैं , और दोनों बस यही सोचते हैं की एक भूत के साथ दारू पार्टी कर ली और बर्फ उसी की लाश का था । इस सदमा के आगे मोना की बेवफाई का ग़म और बाइक के बिक जाने का दुःख बहुत काम था ।

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