मासूम से चेहरे की शिरकत से मची उफ़ तौबा love shayari,

On: April 19, 2025 5:21 PM
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मासूम से चेहरे की शिरकत से मची उफ़ तौबा love shayari,

मासूम से चेहरे की शिरकत से मची उफ़ तौबा love shayari,

मासूम से चेहरे की शिरकत से मची उफ़ तौबा ,

महफिलें लुटी लुटे दिलों के कारोबार लुटे न पेशानी पर सिकन न लबों से हुयी हाए तौबा ।

 

बड़े नाज़ुक से ख़्यालात हैं , दिल की दीवारों पर टंगी तस्वीरें बदल डालो,

वो जंगले बदल डालो वो रोशनी बदल डालो I

 

गम के दौरान मोहब्बतों से तौबा करके ,

सरे राह खड़े होकर आशिक़ों के बाजार में सोचते हैं वो गोया अब कोई और कारोबार करेगे ।

 

जितना खर्चता हूँ ये दौलत कम नहीं होती ,

मोहब्बत के गली कूचों में जैसे टकसाल चलते हो ।

 

वो आँखों की ज़राफत वो बातों का सादापन ,

देखकर होठों का तबस्सुम कोई क़तील भी इश्क़ कर ले ।

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कभी मेरे दुश्मन ए यार से पूछो फ़राज़ ,

बावज़ूद ए नफरत के वो मुझसे प्यार क्यों इतना करता है ।

 

इतनी नफ़रत तो न थी ज़माने भर में बदनाम करने के लायक ,

गोया हमारी शख्सियत ही ऐसी थी की हम गुमनाम रह न सके ।

 

खाट पर लेटो तो फलक पर चाँद नज़र आता है फ़राज़ ,

आंख बंद कर लो तो ख़्याल ए यार में दिन निकल आता है ।

 

खिलते नहीं हैं गुल बस शब् ए माहताब में ,

कुछ फूल हैं अंजुमन के जो तपती धूप में जलते हैं ।

 

तुमने पूँजी कमाई घर बनाया ,

यही दो चार हर्फ़ टूटे फूटे सुखन में हमने ज़िन्दगी का सारा आलम गंवाया ।

 

आज मोहब्बत बुझी बुझी सी है ,

सारा आलम धुंआ धुंआ सा है ।

 

हर उम्र के दौर में हाल ए दिल ज़ख़्मी ही रहा ,

कभी टूटा खिलौनों के लिए कभी इश्क़ में खिलौना समझ के तोडा गया ।

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आजकल घर के दरवाज़े पर दस्तक होती नहीं ,

दिल के दर ओ दीवार पहले ही मचल जाते हैं ।

 

जलता है तो जल जाए जहां सारा ,

हम तुमको दिल के नशेमन में चिलमन से छुपा के रखेगे ।

pix taken by google

Pushpendra Dwivedi

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