fictitious horrible story in hindi maut ka tapoo ,

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अंधमहासागर का एक टापू जो की अंग्रजों के हथियारों के आयात का प्रमुख स्थान हुआ करता था , उस समय पुलिस की एक टुकड़ी अंग्रेजों ने यहां पर लगाई थी मगर देश की आज़ादी के बाद यह टापू अलग हो गया इस टापू पर किसी देश का कोई कब्ज़ा नहीं रहा ना ही किसी देश ने इस द्वीप पर कोई दिलचस्पी दिखाई धीरे धीरे वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने इस पर खुद अपना कब्ज़ा जमा लिया और अपना नियम कानून चलने लगे , धीरे धीरे गैर कानूनी कामो जैसे ड्रग्स , मानव तस्करी , मानव अंगों के कारोबार का ये प्रमुख अड्डा बन गया , दुनिया के बड़े बड़े देशों के लिए यहाँ से मानव तस्करी की जाती है ।

मरुस्थल के मैदानी भाग में इंसानो की खरीद फ़रोख़्त का गोरख धंधा बखूबी कायदे से चल रहा है , दुर्जन अपने दाहिने हाँथ दुर्दांत के साथ मिल कर विदेशी कस्टमर के साथ मानव अंगों और मानव तस्करी की डील में व्यस्त है , और पुलिस उनके प्रोटेक्शन में लगी हुयी हैं , तभी ऊंची पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी से लगातार गोली की फायरिंग होने लगती है , गोली बारी में कुछ मानव तस्कर और कुछ पुलिस कर्मी वहीँ ढेर हो जाते हैं , तभी एक पुलिस कर्मी पहाड़ी की तरफ इशारा करते हुए कहता है , गोलियां ऊपर काली पहाड़ी से चल रही है , पुलिस की कुछ बाइक्स और जीप तुरंत रवाना होते हैं , पुलिस को आता देख वहाँ मौजूद बाइकर्स तुरंत वहां से भागते हैं वो एक बाइक में मात्र तीन लोग थे , पुलिस की जीप और बाइक्स उनका पीछा करते हैं , तभी शूटर्स की बाइक एक पत्थर से टकरा जाती है , तीनो ज़मीन की ढलान में गिरते हैं और वहां से भागते हैं , तभी पीछे वाले को एक पुलिस वाला गोली मार देता है और वो वहीँ ढेर हो जाता है , शूटर्स और तेज़ भागते हैं दूसरा शूटर्स भी पुलिस की गोली खाकर खाई में गिर जाता है खाई एक भयानक चीख से गूँज जाती है , तभी पुलिस वालों के साथ तस्करों की एक टोली भी बचे एक शूटर के पीछे लग जाती है , शूटर भाग रहा है ।

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मगर ये क्या ये तो महज़ १६ साल का टीनेज लड़का है , पीछे से ताबड़ तोड़ गोलियां चल रही है वो लड़का भाग रहा है , और भागते भागते वो मार्केट के उस भाग में पहुंच जाता है जहां से मानव अंगों की तस्करी होती है , मार्केट कस्टमर्स से भरा पड़ा है , तभी माइक में अनाउंस होता है ,मार्केट में एक अंजाना वायरस फ़ैल चुका है , सभी दुकानदारों की सूचित किया जाता है की तुरंत दुकाने बंद कर दें ,प्रशासन दंडात्मक कार्यवाही करेगा कानून का पालन नहीं करने वालो को किसी तरह से नहीं बक्शा जायेगा मार्केट तुरंत खाली कर दें अन्यथा होने वाले जान ओ माल के नुकशान की जवाबदेही आपकी स्वयं की होगी , सभी दुकानों के शटर सटा सट गिरने सुरु हो जाते हैं , मगर फुटपाथ के बासिन्दे अपनी जान बचा के भागे तो भागे कहाँ , वो लड़का उसी मार्केट की सुनशान गलियों में जूतों की ठप्प ठप्प की आवाज़ के साथ दौड़ रहा है , चारों तरफ नशे में लिप्त फुट पाथ के बासिन्दे उसे देख रहे हैं , कुछ सोच रहे हैं अच्छा शिकार आया है मार्केट में वो उसे अपने पास बुलाने का इशारा करते हैं , मगर वो लड़का उनके पास नहीं जाता है , तभी वो एक अँधेरी सी गली में घुस जाता है , वहाँ उसे एक शक्श उसे अपनी तरफ खींच लेता है , लड़का कुछ बोल पाता उससे पहले ही वो उसके मुँह को अपनी हथेलियों से दबा देता है और कम्बल में ढँक कर एक गुमनाम जगह की और ले जाता है ।

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और जब लड़के की आँख खुलती है तब वो अपने आपको एक अँधेरी कोठरी में पाता है , तभी लड़के को बचा के लाने वाला

शख्स दियासलाई से चिमनी जलाता है , लड़का घबराहट में पूछता है कौन हो तुम मुझे इस अँधेरी कोठरी में क्यों लेकर आये हो मुझे बाहर जाना है , वो अनजान शख्स अपने चेहरे से कम्बल हटाता है , और लड़के को बोलता है मैं चमनवा आहूँ नहीं पहचाने मोहीं मैं साहेब के बंगला मा काम करत रहे आहूँ , तुम अउरै बहुत छोट छोट रहे हये , लड़का उस शख्स से चिपक जाता है चमनवा की आँखे डबडबा जाती हैं , लड़का कहता है किसने किया तुम्हारा ये हाल , चमनवा सारी कहानी का वृत्तांत बताने लगता है ।

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साहेब बहुत अच्छे इंसान रहे मगर जब से दुर्जन आया था तब से काली पहाड़ी के गाँव मानव तस्करी का अड्डा बन गए थे , उस दिन चंडी माता की मंदिर में काली पूजा हो रही थी , पूजा के समय जब माता रानी की माला आपके गले में पड़ी थी तबै से सब गाँव वालन का भरोसा होइगा ते की हमार तारणहार अवतरित होइ गओ है मगर दुर्जनवा से या न देखि गा वा काली पूजै में गोली चलवा दिहिस , ते बहुत सारे गाँव वाले मारे गे ओहिन मा हमार सहबौ सहीद होइगे , इतना बोल कर चमनवा फफक फफक कर रोने लग जाता है , वो रोते हुए उस लड़के से पूछता है , तोहार बहिनी और अम्मा कहाँ गयी बेटवा वो लड़का जवाब देता है पिता जी की मौत के बाद दुर्जन के आदमी गाँव आये थे , अम्मा और बहिन दोनों को गोली मार दी मैं किसी तरह जान बचा के भाग गया उस जगह से , और जंगल में आदिवासियों की टोली जो अपने अधिकारों के लिए सरकार के खिलाफ लड़ रही है उन्ही के साथ लड़को की एक अपनी गैंग बना लिया हूँ ,

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घने जंगल के सन्नाटे को चीरती, सियार, गीदड़ और लोमड़ी की आवाज़ें इसी बीच जंगल में डर्ट बाइक्स की आवाज़ सुनायी देती है , और सारा माहौल एक बार फिर शांत हो जाता है , अलग अलग दिशाओं से आकर बाइकर्स एक जगह पर एकत्र होते हैं , सब बाइकर्स अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित हैं , तभी एक बाइकर बोलता है आज काली पहाड़ी के पास वाले मरुस्थली मैदान पर दुर्जन मानव तस्करी की बहुत बड़ी डील करने वाला है , हमारा लक्ष्य ये हैं की किसी भी सूरत में ये मानव की खेप समुन्दर में खड़े शिप तक नहीं पहुंचने चाहिए , इसके लिए हमे अपनी जान की बाज़ी लगानी पड़े तब भी हम अपनी जान की परवाह किये बिना इस मकसद को अंजाम तक पहुचायेगे , सभी सहमति में हामी भरते हैं और जीत का नारा लगाते हुए वहाँ से चले जाते हैं । और फिर हमने मिल कर आज दुर्जन की फ़ौज पर हमला कर दिया दुर्जन के बहुत से साथियों को मार गिराया है हमने , वही वो हमारा पीछा कर रहे हैं मेरे दो साथियों को मार गिराया है दुर्जन के आदमियों ने मगर कोई बात नहीं हम उनकी मौत का बदला ज़रूर लेंगे और इतना कह कर वो कोठरी के बाहर निकलने लगता है , तभी चमनवा उसे भीतर की ओर खींच लेता है , लड़का थोड़ा भड़कता है फिर शांत हो जाता है और कहता ही की क्या मैं अपने दोस्त की मौतों को जाया जाने दूँ , नहीं छोडूगा मैं दुर्जन को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी दुर्जन को , चमनवा  कहता है अभी खतरा टला नहीं है , दुर्जन के आदमी यहां चप्पे चप्पे में फैले हुए हैं , तुम्हे देखते ही जान से मार देंगे , हम उसे मारेंगे सही समय का इंतज़ार करो , साहेब की मौत अभी भूला नहीं हूँ मैं दुर्जन का ख़याल आते ही मेरे रोम रोम में आग लग जाती है , दिल में बदले की आग शोलों का रूप धारण कर लेती है , और वो लड़का शांत हो जाता है , दोनों कोठरी का एक एक कोना पकड़ कर शांत बैठ जाते हैं और माहौल के शांत होने का इंतज़ार करने लगते हैं , तभी वो लड़का चमनवा से पूछता है , तुम तो पिता जी के साथ थे न फिर कैसे बच गए दुर्जन के आदमियों से , चमनवा बताता है , साहेब की मौत के बाद दुर्जन का अत्याचार बढ़ गया था उसने छोटे मोटे ड्रग्स सप्लायर को भी नहीं बख्सा सबको चुन चुन कर मारना सुरु कर दिया प्रशासन उसके हाँथ में था जो उसकी तरफ मिल गए उनको वो रहने दिया मगर जिन्होंने उसका विरोध किया उसे उसने जान से मार दिया ,

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साहब की मौत के बाद मुझ पर भी मानव तस्करी का आरोप लगा दिया गया , मेरी नौकरी चली गयी , कुछ दिन जेल में

रहा मगर कोई पुख्ता सबूत मेरे खिलाफ न मिलने की वजह से मुझे जेल से रिहा कर दिया पेट पालने के लिए मैंने ड्रग्स मार्केट में एक छोटी सी दुकान खोल ली धंधा अच्छा चलने लग गया था , मगर दुर्जन के आदमियों को मेरी भनक लग गयी और एक दिन उन्होंने मेरी दुकान पर हमला बोला मेरे चेहरे पर एसिड फेका जिससे मेरा चेहरा बुरी तरह से जल गया , और मुझ पर ताबड़ तोड़ गोली की बौछार कर दी मैं वहां से बचते बचाते अपनी बाइक में भागा , वो पीछे पीछे थे मैं आगे आगे गोलिया ताबड़तोड़ चल रही थी , मै मौका पाकर बाइक से कूद गया , और मेरी बाइक एक गहरी खाई में गिर कर जल गयी , दुर्जन के आदमियों ने समझा की मैं मर गया और , कुछ दिन बाहर रहने के बाद मैं गूंगा बनकर फिर वापस आगया , और इन्ही के बीच भीख मांगकर गुज़र बसर करने लग गया हूँ , बदले में कुछ मांस के टुकड़े और कभी कभी एकाद ब्रेड मिल जाती है उसी पर ज़िंदा हूँ , मेरा चेहरा जला होने की वजह से कोई मुझे पहचान नहीं पाता है , और गूंगा बहरा बना हूँ ताकि लोगों को शक भी न हो ।

लेकिन गुलामो की इस बस्ती में कुछ लोग ऐसे हैं जो दुर्जन को नापसंद करते हैं , वो खुल कर सामने तो नहीं आ पाते हैं मगर उनकी आपसी बातों से यह स्पष्ट झलकता है की वो दुर्जन से नफरत करते हैं उसकी हाँ में हाँ मिलाने की वजह सिर्फ दुर्जन का ख़ौफ़ है, और डर की एक वजह दुर्जन की नरभक्षी सेना भी है जिसे उसने इंसानी गोस्त का आदी बना दिया है , दुनिया के तमाम हॉस्पिटल्स में इंसानी अंगों की सप्लाई के बाद जो मांस बचता है उसे वो इन्ही पालतू नरभक्षियों को दे देता है पहले इसने इन्हे ड्रग्स एडिक्ट किया जब पैसे ख़त्म हो गए तब उन्हें उनके अंगों के बदले ड्रग्स दिया अब वो ड्रग्स के नशे में इंसानो को खाने से भी परहेज़ नहीं करते हैं , लड़का चमनवा से पूछता है ये नरभक्षियों की टोली रहती कहाँ है , जवाब में चमनवा बताता है की सुदूर काली पहाड़ी के पूर्वोत्तर भू भाग में नरपिशाचों का डेरा है वहीँ उनकी फैक्टरी भी है , जिन्हे दुर्जन का विश्वसनीय दुर्दांत ही चलाता है , और सबसे खतरनाक है दुर्जन के फ्लाइंग डोंग्स जिन्हे जंगली कुत्तों और चमगादड़ों के डीएनए से तैयार किया गया है , जिसे पहले दुर्जन की लैब में विदेशी वैज्ञानिको के सानिध्य में बनाया गया था अब ये खुद अपनी वंश वृद्धि में सक्षम हैं , ख़ास बात इन कुत्तों की यह है की रात में भी देख सकते हैं और इनकी गिरफ्त से शेर का बच पाना भी मुश्किल है , इनसे हमें ख़ास सतर्कता बरतनी पड़ेगी , उसके लिए हमें चाहिए जंगल में तेज़ रफ़्तार से दौड़ने वाली फास्टेस्ट डर्ट बाइक्स , तभी लड़के के वाकी टाकी पर वॉइस कॉल आती है , चार्ली अल्फ़ा २०३ तुम कहाँ हो , हमारे बाकी साथी मारे गए हैं , कबीले के सरदार को रिपोर्ट दो , वरना हम अभी दुर्जन की हवेली पर हमला बोल देंगे , लड़का जवाब देता है चार्ली अल्फ़ा टू अल्फ़ा हम अभी दुर्जन की हवेली पर हमला नहीं कर सकते हैं हमे जो जानकारी मिली है वो गलत है वो हमारी सोच से ज़्यादा मज़बूत है हमे नयी रणनीति तैयार करनी पड़ेगी हमें फास्टेस्ट डर्ट बाइक्स चाहिए , जंगल में फ्लाइंग डॉग्स भी है , हमे उनसे हर हाल में बचना होगा उसके लिए हमे फायर गन भी चाहिए , मैं शाम को ६ बजे जंगल के बीचो बीच मिलता हूँ ओवर ओके बोलकर और वाकी टाकी कट हो जाता है ।

लड़का और चमनवा वहाँ से निकलते हैं , थोड़ी दूर पर दोनों घोड़े पर बैठ जाते हैं , और जैसे ही मार्केट से होकर निकलते हैं , सब लड़के को देखकर चिल्लाने लग जाते हैं , हमारा तारणहार आगया , दुर्जन के गुर्गे लड़के का वाकी टाकी की फ्रीक्वेंसी ट्रैक कर लेते हैं, वो उन दोनों का पीछा करते हैं मगर जब तक वो उन्हें पकड़ पाते तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पलक झपकते ही लड़का चमनवा के साथ घने जंगल में गुम हो जाते हैं , और पीछा करते हुए दुर्जन के आदमियों को मिलती है मौत की सौगात , सामने खड़े मिलते हैं लड़के और उसके साथी , दो चार बेस बाल के बल्ले के शॉट पड़ते ही वो वहीँ ढेर हो जाते हैं , मगर वो दुर्जन के आदमियों को जान से नहीं मारते वो उनका उपयोग नरभक्षियों के लिए चारे के रूप में करने के लिए अपने पास रखते हैं । और उनके पालतू फ्लाइंग डॉग्स को फायर गन से जला डालते हैं ,

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एक एक करके सभी फ्लाइंग डॉग्स कुकुआते हुए वहीँ जला कर मार दिए जाते हैं ,तत्पश्चात चमनवा और लड़के के साथी

कबीले के सरदार के पास पहुंचते हैं , सरदार पहले लड़के को डाँट लगाता है की कबीले की अनुमति के बिना तुम कैसे दुर्जन के ऊपर आक्रमण करने चले गए , इसके लिए तुम्हे पहले सरदार से अनुमति लेना अनिवार्य था , खैर जो हुआ सो हुआ अब आगे की जानकारी दो , ताकी हम सुनियोजित तरीके से वार करके दुर्जन के आतंक का इस द्वीप से खात्मा कर सके , चमनवा और लड़को की गैंग कबीले के सरदार के साथ मिलकर योजना को मूर्त रूप प्रदान करने की योजना बनाते हैं , तत्पश्चात आक्रमण का समय सुबह सुबह का निर्धारित किया जाता है , पहले मिशन में दुर्जन के गुर्गों का नरभक्षियों को पहुंचाने की योजना बनाई जाती है , ताकी ज़्यादा से ज़्यादा गुर्गे नरभक्षियों के हांथो मारे जाए , यही होता भी है सर्वप्रथम पकडे गए दुर्जन के गुर्गों को एक खुले ट्रक में बिठाया जाता है , और धीमी रफ़्तार से नरभक्षियों के सामने ले जाया जाता है सभी नरभक्षी इंसानो से भरे ट्रक का पीछा करने लगते हैं और दुर्जन की फैक्ट्री के अंदर पंहुचा कर ड्राइवर्स और लड़के ट्रक से कूद जाते हैं और आर . डी . एक्स . के धमाके से ट्रक को उड़ा दिया जाता है , और दुर्जन का दाहिना हाँथ कहा जाने वाला दुर्दांत ब्लास्ट में मारा जाता है जिससे दुर्जन को बहुत ज़्यादा जान ओ माल का नुकशान होता है ,

लेकिन फैक्ट्री की निगरानी करने वाले सेक्योरिटी गार्ड्स लड़कों को अरेस्ट कर लेते हैं , और दुर्जन के सम्मुख प्रस्तुत कर देते हैं , दुर्जन कहता है , अच्छे दामों में बिकेंगे , इनके अंग दुकड़े टुकड़े कर दो सालों के , तभी चमनवा की बाइक का पीछा कर रही नरभक्षियों की टोली दुर्जन की हवेली में हमला बोल देती हैं और दुर्जन के एक एक आदमी को चीड़ फाड़ डालते हैं , चमनवा लड़कों को छुड़ाता है , और तभी कबीले का सरदार अन्य सदस्यों के साथ  भयानक धमाके के साथ दुर्जन की हवेली को उड़ा देता है , और एक एक दुर्जन के गुर्गों,  नरभक्षियों और फ्लाइंग डॉग्स को मार दिया जाता है , और दुर्जन के अंत के साथ काली पहाड़ी से मानव तस्करी का गोरख धंधा ख़त्म हो जाता है , सभी अपना जीवन यापन करने के लिए खेती बाड़ी और मतस्य उत्पादन पर निर्भर हो जाते है धीरे धीरे बाहरी दुनिया से उनका मेल जॉल बढ़ता है और अंततः सरकार भी इस अनजाने टापू पर ध्यान देने लगती है ।

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