ghost protocol a short horror story hindi ,

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ओबरॉय कॉम्प्लेक्स का १८ वीं मंज़िल का एक फ्लैट शाम के ७ बज चुके हैं , टेलीवीजन स्क्रीन पर मुंबई में अभी के हुए

ताज़ा हमलों की खबर चल ही रही थी , तभी फ्लैट के ड्राइंग रूम में रखे फ़ोन की रिंग बजती है , एक शख्स आगे बढ़ता है

फ़ोन उठाता दूसरी तरफ से आवाज़ आती है काम हो गया है साहेब , और ये शख्स बोलता है बाकी का पेमेंट रात को तुम्हे

मिल जायेगा , और फ़ोन कट हो जाता है , फिर वो शख्स व्हिस्की का ग्लास उठाता है और एक ठंडी आह भरता है , पर

उसका फेस दिखाई नहीं देता है ।

 

cut to

रात का सन्नाटा महानगर की सड़कों में चलते इक्का दुक्का गाड़ी वाहन , धारावी के झोपड़ पट्टी से सटा एक मॉल जिसके

अन्दर कुछ और ही चल रहा था , रामदीन जो की पिछले चौकीदार की हार्टअटैक से मौत के बाद उसकी जगह लिया था

, उसके साथ एक और चौकीदार था , दोनों आराम से नीचे हाल में गप्पे लड़ा रहे थे की तभी मॉल की लाइट लप्प लुप्प

होने लगती है , रामदीन कहता है लो लगता है शार्ट सर्किट हो गया है , वो तुरंत पावर हाउस की तरफ बढ़ता है , पीछे

पीछे दया शंकर भी दौड़ लगा देता जो पुराना चौकीदार है , सीढ़ियों से दोनों ऊपर जाते हैं पावर हाउस के स्विच चेक करते

हैं सब कुछ सही रहता है , दयादीन बोलता है ये इस मॉल का रोज़ का नाटक है , कल रात भी यही हुआ था , ऐसे ही

लाइट लप्प लुप्प कर रही थी , फिर जब चौकीदार को अटैक आया तो सब ठीक हो गया , तभी टॉयलेट की तरफ से चीख

की आवाज़ सुनायी देती है , रामदीन टॉयलेट की तरफ दौड़ता है , टॉयलेट का दरवाज़ा खुला हुआ है ,अन्दर सारे के सारे

नल की टोटियों से पानी बह रहा है , रहा है जबकि मॉल की सारे नल की टोटियां ऑटो मैटिक हैं , उनमे सेंसर लगा है ,

 

रामदीन जैसे ही टॉयलेट के अंदर घुसता है , दरवाजा सटाक से बंद हो जाता है , दयादीन अवाक देखता रह जाता है , वो

दरवाजा खटखटाता है रामदीन को आवाज़ देता है , मगर कोई हरकत समझ में नहीं आती है , वो सिक्योरिटी हेड को

फ़ोन लगाता है , तुरत सिक्योरिटी हेड और कर्मचारियों के साथ मॉल पहुंच जाता है , वहाँ दयादीन सारी आप बीती

सुनाता है , पुलिस बुलवाई जाती है , टॉयलेट का दरवाज़ा अपने आप खुल जाता है , टॉइलट में रामदीन फर्श पर अचेत

डला हुआहै शायद वो मर चूका था , उसे हॉस्पिटल ले जाया जाता है जहां डॉक्टर उसे मृत घोषित कर देते हैं , पोस्टमॉर्टेम

रिपोर्ट में उसके मौत की वजह हार्ट फ़ैल पाया जाता है , ये मॉल में इस हफ्ते की दूसरी चौकीदार की मौत थी ,

 

सारा मॉल स्टाफ और सिक्योरिटी इंचार्ज सकते में था । सी . सी , टी वी फूटेज भी खंगाला गया जिसमे ऐसा कुछ नहीं

दिखा जो जो गलत था उसमे सब कुछ व्यवस्थित था , अब मॉल के हेड द्वारा दूसरी सिक्योरिटी सर्विस लेने का निर्णय

लिया जाता है , नए चौकीदार के रूप में जोजेफ की नियुक्ति की जाती है जोजेफ क्यूंकि नया है , इसलिए कुछ दिनों के

लिए उसके सहयोग के लिए दयादीन को भी साथ में रखा जाता है , सब कुछ ठीक चला रहा था एक हफ्ते तक कोई

अप्रिय घटना फिर नहीं हुयी ,

 

रामदीन की मौत के १० दिन बाद दयादीन और जोज़ेफ़ मॉल के हाल में आराम फरमा रहे थे ,की तभी टॉयलेट की तरफ

से बेहद तीव्र वेग से चीखने की आवाज़ सुनायी दी , दयादीन गहरी नींद में था जोज़ेफ़ ने उसे उठाना उचित नहीं समझा ,

वो अकेला ही टॉयलेट की तरफ भागता है , उसे लगत है कोई बच्चा शायद टॉयलेट में छूट गया होगया होगा , वो जैसे ही

टॉयलेट के अंदर जाता है , लाइट्स ऑन करता है , दरवाजा सड़ाक से बंद हो जाता है , लाइट्स लपलुप करती हैं तभी

सीसे में खून से लतपथ एक शख्स दिखाई देता है मगर जोज़ेफ़ डरता नहीं है वो आगे बढ़ता है , आईने से वो शख्स ग़ायब

हो जाता है , तभी जोज़ेफ़ की नज़र दूसरे सीसे में पड़ती है जिसमे एक खून से लतपथ बच्ची का अक्स दिखाई देता है

उसकी नज़रें जोज़ेफ़ की नज़रों में इस तरह से झांकती हैं जैसे कुछ कहना चाहती हों तभी दरवाज़े पर दयादीन आजाता है

, और वो धड़ाधड़ दरवाज़ा खटखटाता है , तभी आईने से वो अक्स ग़ायब हो जाते हैं , और जोज़ेफ़ दरवाज़ा खोलता है ,

दयादीन पूछता है तू ठीक तो है न यार मुझे लगा तुझे भी कहीं हार्ट अटैक की बीमारी तो नहीं लग गयी , जोज़ेफ़ जवाब

में हँसता हुआ बोलता है , तू भी न यार जब भी सोचता है गलत ही सोचता है , चल सोते हैं आराम से , जोज़ेफ़ का

व्यवहार इस तरह का था जैसे आज रात मॉल में कुछ हुआ ही नहीं ।

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मगर आज रात जोज़ेफ़ सोया नहीं जैसे तैसे सुबह नींद लगी ही थी की , तभी दूसरे शिफ्ट के कर्मचारी आ गये , दिन भर

मॉल में चहल पहल के बाद आखिर रात का वक़्त आ ही गया जब मॉल में जोज़ेफ़ और दयादीन थे , दयादीन के सोते ही

जोज़ेफ़ ने तुरंत ही टॉयलेट का रुख किया , वो अंदर आगया लाइट्स ऑन की , मगर अभी तक वैसा कुछ हुआ नहीं ,

जैसा कल हुआ था , जोज़ेफ़ आज फुल प्लान में था की वो आज इस रहश्य के बारे में जानकार रहेगा , मगर कोई हरकत

न देख वो टॉयलेट से उलटे कदम लौटने ही वाला होता है की , एक बार फिर दरवाज़ा सटाक से बंद हो जाता है , लाइट्स

लपलुप करने लगती हैं , तभी सब फव्वारे एक साथ चालू हो जाते हैं , और खून से लथपथ बच्चे उस फब्वारे में नहा रहे

होते हैं , यही मंज़र सारे मॉल के टॉयलेट का है , तभी सभी फब्वारे बंद हो जाते हैं और एक बच्ची की आत्मा दिखाई देती

है , जो जोज़ेफ़ की तरफ हाँथ बढाती है , जोज़ेफ़ भी उसकी तरफ हाँथ बढ़ाता है , और वो जोज़ेफ़ बीते हुए समय में ले

जाती है , जब उस मॉल की जगह धारावी की झोपड़ पट्टी थी ।

वहाँ वही बच्चे के अक्स जो मॉल के टॉयलेट के आईने में खून से लथपथ दिख रहे थे , सामने खेलते कूदते नज़र आ रहे

थे , कोई अपने माँ बाप के साथ स्कूल जा रहा था , तो कोई को दोस्तों के साथ खेल रहा था , सब मस्त थे अपनी मस्ती

में सारा का सारा धारावी क्रिसमस की तैयारी में जुटा हुआ था ,

वो बच्ची उसे उस चर्च में ले जाती है जहां प्रेयर चल रही होती है , सभी हाँथ में कैंडल लिए हुए झूम रहे हैं , जैसे ही वो वो

उस चर्च से बाहर निकलता है एक भुडूम की आवाज़ के साथ विस्फोट होता है , और जोज़ेफ़ टॉयलेट की फर्श पर धड़ाम से

गिर जाता है , वहाँ ऐसा कुछ नहीं था , बच्ची गायब थी न चर्च न बच्चे न खून न धारावी का चॉल। वो चुप चाप उठता है

, और वहाँ से नीचे हाल में चला जाता है , दयादीन के बगल में लेट जाता है , और सोचने लगता है , की आखिर ये सब

हुआ कैसे , मगर वो इस घटना का किसी से ज़िक्र नहीं करता है ।

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अब जोज़फ़ का एकमात्र उद्देश्य था मॉल के भीतर छुपे इस राज़ को जानना उसने धारावी के उस इलाके से रिलेटेड सारी

जानकारी एकत्रित की आस पास के लोगों से उस जगह के बारे में पुछा तो लोगों ने बताया की यहाँ पहले एक चर्च था ,

जब मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुए थे तो दो ब्लास्ट यहां भी हुए थे जिसमे की चर्च के साथ साथ आस पास के इलाके के

हज़ारों घर भी तबाह हो गए थे , सैकड़ों बच्चे यतीम हो गए हज़ारों माओं की कोख उजड़ गयी , न जाने कितनी औरतें

बेवा हो गयीं , आज भी बहुत से लोग अपाहिज हैं इस इलाके के जो उस धमाके के चपेट में आये कोई नहीं बचा , उस

धमाके के दर्द की टीस आज भी धारावी का हर रहने वाला महसूस कर रहा है , ये सब सुनकर जोज़ेफ़ की आँखें छलक

जाती हैं , वो पूछता है नेताओं ने कुछ नहीं किया , तो जवाब मिला की मरने वालों को बीस बीस हज़ार और घायलों को

पांच पांच हज़ार की सहायता राशि दी जाएगी , मरने वाले तो मर गए बेटा जो बचे हैं वो इस लायक नहीं की कुछ बोल

सकें वो भी नेताओं के आदमियों ने हज़म कर ली ।

seen change

जोज़ेफ़ को ये जानकर बड़ा दुःख हुआ , वो वहाँ से चुप चाप मुँह लटकाये वापस आ जाता है , रात का वही प्रहर सब कुछ

सून शान आज जोज़ेफ़ मॉल में अकेला ही था दयादीन की ड्यूटी टेम्पेरोरी ड्यूटी खत्म हो चुकी थी , आज से सारा का

सारा कार्यभार जोज़ेफ़ के हांथों में था , रात का वही दो बजे का टाइम तभी पीछे से आवाज़ आती है आप उदास क्यों हो

अंकल आज आप अकेले ही हो , पहले जोज़ेफ़ कुछ सोचता है फिर बोलता है , मैं लाचार हूँ चाह कर भी तुम्हारी मदद नहीं

कर सकता , तभी बच्ची बोलती है आप बहुत कुछ कर सकते हो अंकल , और वो साया जोज़ेफ़ से लिपट कर जाने कहाँ

विलुप्त हो जाता है ।

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क्रिसमस की तैयारी एक बार फिर धूम धाम से चल रही है सारा का सारा दुल्हन की तरह सजा जगमगा रहा है , मॉल को

भी बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया है , जिसमे शहर के बड़े बड़े लोग आमंत्रित हैं , , जिसमे शहर के मेयर साहेब से

लेकर मंत्री विधायक सपरिवार उपस्थित थे , मॉल सारा का सारा लोगों के हुजूम से भरा हुआ था , तभी मॉल की दीवारों

में अपने आप दरारें पड़ना सुरु हो जाती हैं , मंत्री विधायकों को जेड प्लस सिक्योरिटी के बीच रखा जाता है और लोगों को

हिदायत दी जाती है कृपया मॉल खाली कर दें , सभी मॉल से बाहर भागते हैं तभी लाइट गुल्ल हो जाती है , रात का

समय है तभी न जाने कहाँ से मॉल के हाल में पानी भरने लगता है सब जान बचाकर भागते हैं रात भर यही चलता है ,

सुबह का नज़ारा कुछ और ही था सब लोग रास्ते में खड़े बेचारे जेड प्लस सिक्योरिटी के जवान रोड में बेहोश डले ऊँघते

हुए , जैसे किसी ने रात भर जमकर पिटाई की हो , और अपने अपने नेताओं को ढूढ़ते हुए , मगर नेताओं का कहीं कोई

पता नहीं चल रहा , मॉल भी जस का तस खड़ा है बिल्कुल सूखा हुआ , ऐसा लग रहा है जैसे पिछली रात कुछ हुआ ही

नहीं ,

सारा दिन न्यूज़ चैनल में नेताओं और विधायकों की गुमसुदगी की खबर चली और उन्हें सत्ता और विपक्ष ने मगरमक्ष

वाली अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की कुछ हफ़्तों तक नेताओं की गुमसुदगी का रोना मीडिया और न्यूज़ चैनल में छाया रहा

फिर सब धीरे धीरे इस घटना को भूल गए ।

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रात का फिर वही सन्नाटा , जोज़ेफ़ उस बच्ची के साथ बात करता हुआ , बैठा हुआ है की तभी टॉयलेट से चीखने आवाज़ें

आती हैं , जोज़ेफ़ उस बच्ची के साथ दौड़ता हुआ टॉयलेट के अंदर घुसता है मगर इस बार सीन कुछ चेंज था नेताओं और

विधायकों के भूत को धारावी वाले भूत बांधकर लात जूतों से जमकर धुनायी कर रहे थे , तब जोज़ेफ़ और बच्ची ताली

देकर खूब हँसते हैं , धारावी के भूत जिन नेता भूतों की पिटाई कर रहे हैं वो भी कोई और नहीं भाऊ सा और उसके चमचे

हैं एक तो भूत ऊपर से पिटाई भूतों की तो शक्ल वैसे भी पहचानना मुश्किल होता है फिर इस तरह की बेदम पिटाई के

बाद वो खुद की शक्ल भी नहीं पहचान पाते हैं और खुद की शक्ल देख देख कर खुद ही डर जाते हैं ।

story in flash back,

ओबेरॉय बिल्डिंग की १८ वीं मंज़िल पर जब फोन की रिंग बजती है और जो शख्स फोन उठाता है वह कोई दूसरा नहीं वहाँ

का नामचीन नेता भाऊ सा था जिसे फोन पर उसके चमचे बता रहे थे आतंकवादिओं ने जो ५ बम ब्लास्ट किये थे उसके

साथ में दो बम ब्लास्ट हमने कर दिए ताकि धारावी की झोपड़ पट्टी हटा कर मॉल बनवाया जा सके ।। क्रिसमस की रात

मॉल की जो लाइट गुल होती है वो जोज़ेफ़ ही करता और ,  पर्दा गिरता है इसके साथ ही खेल खत्म पैसा हज़म ।

pix taken by google

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