love shayari अरमान जितने थे बेलिबास हुए ,

On: April 18, 2025 6:40 PM
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love shayari अरमान जितने थे बेलिबास हुए ,

love shayari अरमान जितने थे बेलिबास हुए ,

अरमान जितने थे बेलिबास हुए ,

हटा के रुख़ से ज़ुल्फ़ें जो वो बेनक़ाब हुए ।

 

रुख़ से उनके नक़ाब हट जाए तो ग़ज़ल होती है ,

वो शाम ए बज़्म में दबे पाँव उतर आएं तो ग़ज़ल होती है ।

 

कभी लब पर तबस्सुम सजाकर कभी आँखों के आँसू मिटाकर ,

न निकलो खुली धूप में बेपर्दा तुम ,

तुम में कितने अरमानो को किसी ने पाला है ।

sad shayari

इश्क़ वालों को हुश्न की तलाश बाकी है ,

नक़ाब ए हुश्न को तह ए दिल इश्क़ की प्यास बाक़ी है ।

 

कमी नहीं थी मरीजों के दवाख़ाने में ,

शाम ए बज़्म सजती गयी और फ़नकार बनते गए ।

 

इश्क़ के मरीजों का हाल हमसे न पूछो ग़ालिब ,

कुछ तो है बेहोश जो बचे हैं बेमौत मरे हैं ।

 

ये इश्क़ बस लाइलाज़ हुआ जाता है ,

मरीज़ ए दाना की ख़बर अब हम उनसे बताएँ क्या ।

 

ग़र्मी में ख़ुराक़ घटती गयी ,

लोग समझे मरीज़ ए इश्क़ है इश्क़ में बीमार होता गया ।

 

ये इश्क़ तिलिस्म सा है ,

बुझा बुझा सा है मगर जला जला सा है ।

 

ज़र्रे ज़र्रे में तेरा चर्चा है ,

कूचे कूचे में तेरे मरीज़ ए दाना है ।

 

इश्क़ ए मुफ़लिश भी ग़र गुमराह हुआ ,

फिर यूँ न हो कोई क़ाफ़िर नमाज़ी हो जाए ।

 

मर गए लोग बेखुराकी से ,

सबने समझ सच्चा आशिक़ रहा होगा ।

 

मस्त झोकों को झाँकते चितवन ,

अबके सावन भी लगे बिरहा है ।

 

वक़्त भर देता ग़र ज़ख्म सारे ,

एक तेरे साथ गुज़ारा लम्हा न ताउम्र डसता।

 

कोई एक अकेला गुनहगार नहीं होता ,

मरीज़ ए दाना की बर्बादी में ज़माने भर की ज़िम्मेदारी है ।

romantic shayari 

क़यामत तो तब थी क़यामत वो अब है ,

कुछ और निखर आया मरीज़ ए दाना इश्क़ ए नज़र के बाद ।

 

तुम्हे तो गुफ़्तगू ए तलब ,

शाम ओ सेहर साल दर साल ,

लबों की प्यास रही बाकी रूबरू ए बहरहाल ।

 

ग़र्मी सर्दी में सफ़र करते नहीं ,

खुद ब खुद सजते हैं सुख़नवर जब शमा ए बज़्म रोशन होती हैं ।

pix taken by google

Pushpendra Dwivedi

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