क़त्ल गाह बनाम सरकारी हस्पताल funny political shayari ,

On: April 19, 2025 6:18 PM
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क़त्ल गाह बनाम सरकारी हस्पताल funny political shayari ,

क़त्ल गाह बनाम सरकारी हस्पताल funny political shayari ,

क़त्ल गाह बनाम सरकारी हस्पताल ,

क़त्ल गाहों में जानवर कटते हैं ।

सरकारी हस्पतालों में इंसान मरते हैं ,

बिस्तर पर पड़ा कोई कोई चौगान नापे है ।

ये निर्मोही हस्पताल बड़ा कर्कश सा लागे है ,

न ढंग के डॉक्टर न हक़ीम कोई ।

hindi shayari 

जितने मिले हैं सबके सब क़ातिल लगे मोही ,

मुँह दबा के मारता है कोई ,

कोई इंजेक्ट करके मारता है ।

चूरण चटा के मारता है कोई ,

कोई चूने की गोली खिला के मारता है ।

बड़ा भौसा खाता है ,

मज़बूर ही सरकारी हस्पताल जाता है ।

गायनी वार्ड तक गायनकी के पहुचने से पहले ,

हो गया प्रसव डॉक्टरनी के पाँव धरने से पहले ।

जो बच गया जच्चा तो बच्चा मर गया ,

कभी कभी कुछ अवतार निकल जाते हैं ।

मरीज़ को इलाज़ से पहले ,

प्राइवेट नरसिंग होम में शिफ्ट कराते हैं ।

मर गया बेमौत जिसकी औक़ात न थी ,

लूट लिया मौज जिसकी ठाठ थी बड़ी ।

मुर्दे निकलते हैं हस्पतालों से जुलूसों की तरह ,

होता है हुज़ूम लाशों का जलसों की तरह ।

कौन कैसे मर गया किसी को ख़बर नहीं लगती ,

अंधों के राज में कानो को कौन सुनाये आप बीती ।

कदमो में नहीं ज़ोर बस ज़बान लरज़ती है ,

सड़सठ साल के वतन को पल्स पोलियो की खुराक लगती है ।

गिर गिर के सम्हलता है या सठिया गया है क्या ,

या घुटनो में इसके गठिया बात है या साटिका है क्या ।

एक हाँथ दे हिन्दू तो दूजे में मुसलमान चाहिए ,

जो अब भी न चले तो क्या हरिजन कल्याण चाहिए ।

पगडंडियाँ जोड़ती हैं शहरी रिहाइशों को ,

गाँव के खेतों को भी किशान चाहिए ।

आबादी बढ़ा के क्या घुड़शाल बनाना है ,

उम्दा नश्ल के धावकों की भरमार चाहिए ।

क्या सोचा होगा बापू जो संत था बड़ा ,

मिड डे मील वाला हिंदुस्तान आगे होगा खड़ा ।

कुनबे कुनबे में बिकेगी शराब ,

क्या स्कूल के बाहर भी बियर बार चाहिए ।

लुट जाता है जहाँ आदमी मज़हब के नाम पर ,

क्या ऊपर से नीचे वाला तक बेईमान है नहीं ।

बँट रहा है देश टुकड़ों में नफरत के नाम पर,

रोटी नहीं है पास भिखारी को कौन सा इंक़लाब चाहिए ।

जाने कैसे सीना ताने फिरते हैं सियासी ,

whatsapp status 

जब अवाम ए हिंदुस्तान की बहु बेटियां न घर में हो सुरछित ।

क्या फिर से कोई एक अवतार चाहिए ,

तीन बंदरों का पाठ क्या पढ़ाया सबके सब नकलची हो गए ।

मर गया ऐक्सीडैण्टियल रोड पर ,

पथिक रफू चक्कर होगये ।

तन पर वस्त्र नहीं फिर भी खूब उड़ता है ,

ये गाँधी का मुलाज़िम सबकी ख़िदमत में रोज़ मिलता है ।

pix taken by google

Pushpendra Dwivedi

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