जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार hindi literature hindi,

On: April 17, 2025 8:02 PM
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जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार hindi literature hindi,

जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार hindi literature hindi,

जोश ए पतौखी का असर है बरखुरदार ,

या ऐरै लेमड़ी लटकाये बागते हो ।

तसमई परसूँ की प्योसरी सजाऊँ ,

बोल तेरे ख़्वाबों की तस्तरी में व्यंजन कहाँ से लाऊँ ।

ककहरा दुदुनिया अक्षर कारे न बाचत बने पहाड़ा,

मालिकिन फुसूंणा मारे अइसन जइसन पहाड़ पेले हो सारा ।

आज की सगळी शब् ए बज़्म तुम्हरे नामे ,

उठ बिहन्ने कलेबा में कलेजा छोड़ जाउगा ।

दोहनी मा सोंधे दूध के पाकब ,

जस जस भई अबेर न्यूना तरछन चट करि जैहै बिलारी सगळी ढेर ।

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न्यूना बचा न चासनी मट्ठा बची न छास ,

कटही बिलारी चट गयी दोहनी चढ़ के माच।

निछत्र कूटती न नज़र तेरी आवाजाही पर ,

किरचा भर भी सुबान होता अगर तेरी बेवफाई का ।

यूँ ही न दहनारद मचाता कोई ,

अगर लोग कॉल देकर लबरी न बोल जाते ।

मरी गे घर भर के ज्योनार भूखे पेट ,

रात सगळी खाना पकाना खेलें मा बीत गई।

पतीली के तरछन में बच गया होता ,

तो गली के पिल्लों को भी निवाला मिल गया होता ।

पटउहाँ में रख के सो जाते हो क्या ख़्वाब सारे ,

उठते ही खलीसा तलास करते हो सकारे ।

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ये जो दिन भर आँखों से आँसू टपकते हैं ,

दिल में ग़मो के मिर्च काहे खूथ रखे हो ।

उफ़ ये नज़रों की फेका फेंकी गब्भा भर के लपेटना ,

अदाओं से पेच डाल के बातों से काटना ।

अजहूँ न आये खसम सांझ रात को ,

कौन करिहैं कलेबा झूर बासी बात को ।

उच्छिन्न न मारो एक बात कह दूं ,

बालम तोहे जियरा में रख के उघन्नी दरिया में फेंक दूं ।

रात खटायेगी कैसे ,

सुबह तक के लिए चितचोर फिर से जाग गया ।

सारे लहज़े लरज़ गए उनके ,

सामने जिनके सेखी धरी सकाती थी नहीं ।

जल मत बराबरी के चक्कर में आगे बढ़ गया ,

थी निछट खाई में गिर के खुद को मुर्दा कर गया ।

pix taken by google

Pushpendra Dwivedi

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