dark life quotes in hindi जुस्तजू ए नौबहार की आरज़ू दिल में रख कर ,

On: July 5, 2026 2:47 PM
Follow Us:
dark life quotes in hindi जुस्तजू ए नौबहार की आरज़ू दिल में रख कर ,

dark life quotes in hindi जुस्तजू ए नौबहार की आरज़ू दिल में रख कर ,

जुस्तजू ए नौबहार की आरज़ू दिल में रख कर ,

खिज़ा ए गुल को भी मैं अश्क़ों से पुरनम किये जाता हूँ ।

 

शेर ओ सुखन से संवरती हैं महफ़िलें जिनकी ,

चाँद तारे भी दीदा ए यार के तलबगार नज़र आते हैं ।

यूँ ही नहीं बेज़ार हुआ है ये दिल ,

बुतनुमा लोग भी गुनहगार नज़र आते हैं ॥

 

रंग और भी निखरेगा रंग ए हिना का साहब ,

बाद मेंरे जब इसमें मेरा खून ए जिगर मिलाओगे ।

 

कभी दिल के सेहराओं से होकर गुज़रो ,

इल्म होगा सर्द हवाओं में आग कैसे जलती है ।

good morning shayari in hindi

सोचता हूँ तेरे दामन में चाँद तारे सजा दूँ ,

मगर अफ़सोस तेरे आफ़ताबी हुश्न के आगे मेरी साँसे टूट जाती हैं ।

 

राख से चिंगारियां निकालो ,

सोये हुए आदम को जहान मुर्दा समझ बैठा ।

 

बहुत पढ़ते हो नज़रों को कभी कुछ लिख भी दिया करो हम पर ,

मिजाज़ शायराना रखते हो ग़ज़ल ही कह दिया करो हम पर ।

 

चांदनी से खलल पड़ती है दो नज़रों की जुस्तजू में ,

चाँद से कोई कह दे बेशरम बदलियों में जाकर कहीं छुप जाए ।

 

सज़र के पत्ते जल गए शायद ,

कोई परिंदा शब् भर वहाँ पर रोया था ।

 

ज़िन्दगी मुक़म्मल थी जिस दहलीज़ को पाकर ,

आज उसी दर से रुखसती पर शर्मशार हम हुए ।

 

ऐसा नहीं की याद अब उनकी कभी भी नहीं आती ,

बस अपना हाल ए दिल हम हर किसी को सुनाया नहीं करते ।

 

वज़ूद आता नहीं नज़र किसी को वो मेरे दिल में रहता है ,

चलो इसी बात के चलते कम्बख्त दिलों की दुश्वारियां तो ख़तम हुयी ।

 

मोहब्बत रूहानी हो तो साद ओ ग़म का मज़ा आता है ,

जिस्म की हवस का सामान तो बाजार में भी मिल जाता है ।

 

कुछ तो है जो बाद ए मोहब्बत के भी दिल में कसकता है ,

महज़ कहने से सुनने से कहीं ज़्यादा रहा होगा ।

 

तबाही ए मंज़र दो दिलों तक ही नहीं ये जो उठे हैं इश्क़ ए शरारे ,

ज़मीन ओ फ़लक़ दो जहान जला के ख़ाक करेंगे ।

 

आजकल सुर्खरू हैं ख़्यालात से जज़्बात उनके ,

फ़िज़ा में संदली खुशबू ये कहाँ से आई है ।

 

ये मेरी आँख का धोखा है या कानो का भरम ,

वादियों में उनकी सरगोशियों से सदा आयी है ।

 

तबाह करेगी तुझे भी कहाँ कोई तलबग़ार बचा है ,

ये आतिश ए मोहब्बत है साहब कोई कितना भी बड़ा फ़नकार रहा है ।

mohabbat bhari shayari hindi me,

कुछ पंक्तियों में सिसक के रह गए अल्फ़ाज़ अब तो ,

जिनके कहकशां से सफ़हे कभी खनकते थे ।

किताब ए वरक़ तक जमी है गर्द अब भी ,

गोया आज के हुकुमरान देखकर के भोले बनते हैं ॥

 

हम उनको पढ़ने में मशरूफ थे इस कदर ,

वो हमारे सर से गुज़र जाते रहे ।

जब भी पलटे हैं बाद ए वरक़ के सफ़हे हमने ,

किस्से खुद बा खुद खिल्लियां उड़ाते रहे ॥

 

ख़्वाब पलकों पर सजाकर दिल के अरमान बेचता हूँ ,

बच्चों के खिलौने में सीसे का मकान बेचता हूँ ।

 

लोग दिल की लगी को शायरी कहते हैं ,

हम भी कब हर जगह दिल्लगी करते हैं ।

 

मैं खुद को क़ामिल शख़्सियत समझा नहीं कभी ,

फिर भी बिछड़ के तुमसे अधूरा सा रह गया ।

 

आग सुलगा के निकल जाते हो ,

मकीन न सही इस शहर में मकान तेरा है ।

 

बहारे सहरा में आईं आके चली भी गयीं ,

बदनसीबी थी इस कदर कोई जमाल ए यार की बस नज़र का मुन्तज़िर ही रहा ।

 

जिसकी खुशबू से सुरमई थी सुबहें ,

उनकी यादों से अब रातें ग़ज़ल होती हैं ।

 

आज लगन है यही यही तो ठगन है ,

कोई लूट रहा बाजार में कोई दिल हार कर भी मगन है ।

 

तन्हा बस्तियां वीरान सा मंज़र साहिलों की रेत् पर उसके निशाँ ढूढ़ती लहरें ,

जैसे किसी अजीज़ की तलाश में दर बदर भटकता प्यासा समन्दर ।

 

वो जिनके दम से महफ़िलें गुलज़ार हुआ करती थी ,

न जाने आजकल वो किसके इंतज़ार में रहा करते हैं ।

 

रोज़ मिलता है मुझसे अजनबी बनकर ,

मेरा साया भी फरेबी हुआ जाता है ।

 

ज़मीन में चलती है कहाँ आसमान में उड़ती है ,

तेरे सुरखाब ख़्याली में शायरी जब भी ढलती है ।

 

शाख से टूटे पत्तों सी मोहब्बत थी अपनी ,

हवा के झोकों सा आलम ए पुरज़ोर रहा ।

न मिली लौट कर टहनी न सफ़र था क़ामिल ,

बाद मुद्दत के भी ये कहकशां हर और रहा ॥

 

मेरे शहर में जब सब बेवफ़ा थे ,

रूह ने ही जिस्म छोड़ दिया क्या गुनाह किया ।

 

दुआ भी क़ामिल हो जब बद्दुआ थी मुक़म्मल ,

दुश्मन ए यार ने दोस्ती का भी फ़र्ज़ अदा कर डाला ।

 

शहर भर में कहकशां सा है ,

आजकल मैं बेज़बान सा हूँ ।

गुज़र रहा हूँ लापता सा वज़ूद से अपने ,

धुंआ धुंआ सा चारसू रवां रवां सा हूँ ॥

 

सूखे दरख़्तों से न पूछो शहर ए मौसम का मिजाज़ ,

सज़र से टूटे पत्तों ने भी बिरहा के गीत गाये हैं ।

 

खून खराबा की खबरों से हर अखबार सराबोर रहा ,

दिल मुतासिर था इत्तेला ए यार का मुतासिर ही रहा ।

 

एक उम्र गुज़र जाती है अपनों की अज़ीज़ियत समझने में ,

बुज़ुर्गियत के साये में ही ये तालीम ओ तरबियत नसीब होती है ।

 

मैं अपनों से लहू का रिश्ता निभाता रहा तमाम उम्र ,

कोई गैर मुझको खून का कर्ज़दार कर गया ।

 

गैरों की ठोकरों पे दम निकला तो समझ में आया ,

बस उम्रें तबाह कर दी हमने अपनों को आज़माने में ।

 

हिक़मत ए तरतीब से लबरेज़ है हुनर ,

सोये पड़े हुक़्क़ाम को हम चैन से सोने नहीं देंगे ।

 

साथ जीने का तक़ाज़ा ही अलग होता है ,

लोग बस ज़िन्दगी में साथ साथ चलते हैं ।

 

दर्द क़ामिल है तेरा हो या मेरा हो ,

लोग बस फ़ितरतन अपना पराया सोच लेते हैं ।

 

हल्की फुलकी दवा दारू से इश्क़ का मर्ज़ नहीं जायेगा ,

लाइलाज है बीमारी किसी उस्ताद हक़ीम का ही नुस्खा काम आएगा ।

 

तेरे अंदाज़ ए लर्ज़िश का भरम बनाये रखते हुए ,

मैंने हर दुआर की गुफ्तगू ए ग़ज़ल को यूँ ही बस चलने दिया ।

 

लूट के माल औरों का खुद की तिजोरी भरते हैं ,

ये दौर ए वक़्त के हुकुमरान मुर्दों पर सियासत करते हैं ।

 

बस इसी उम्मीद में जीते रहे अभी सरकार बदलेगी ज़ुल्म बदलेगा ,

हर दौर ए सियासत में इश्क़ के मारों का हाल शुभानल्लाह क्या कहिये ।

 

बाद ए इश्क़ की तबाही ए मंज़र बारहां ये रहा ,

धड़कने चलती रही दिल के हाल ए मुक़ाम का बस पता न रहा ।

 

ये जो बिखरे पड़े हैं शब् ए बज़्म नज़्म के टुकड़े ,

किससे पूछें कब किसका दिल कहाँ पर टूटा है ।

 

बदस्तूर था हवाओं के रुख पर तेरा ज़ुल्फ़ें लहराना ,

बस इसी बदगुमानी की दिल को अब भी हरारत सी रहा करती है ।

 

दम निकलता है एक सज़दे में ,

तेरे दर पर हम शब् ओ रोज़ आँख क्या पुरनम करते ।

 

जो इक सरारा था ज़मीन से उठा था ,

फलक धुंआ सा था ।

रात दर्द ओ ग़म से पोसीदा थी ,

जाने किस बला की फुर्ती से सारे चिलमन जला गया वो कैसे ॥

 

ताज्जुब नहीं है मुझको तेरा सूरत ए हाल देख कर ,

फ़क्र इस इस बात का है मैं देखता ही रहा तू जाने कब ज़मीन के ज़र्रे से फलक का आफ़ताब हो गया ।

 

इन शोख़ निगाहों का जो एहतेराम करे हैं ,

क्या इल्म नहीं उसको ये सर ए बाजार क़त्ल ए आम करे हैं ।

 

एक से एक फ़नकार हैं शान ए महफ़िल में ,

चाक जिगर जो पुरसुक़ूत दे किसी में बात नहीं ।

 

शब् ए बज़्म चाँद उतर आये तो कोई बात बने ,

फिर इस रात की सेहर हो न हो ख़ुदा ख़ैर करे ।

 

वक़्त की रफ़्तार के साथ धड़कने भी बेलग़ाम हुयी जाती हैं ,

अब इस दौर ए उम्र में भी यही हसरत है कोई अहल ए दिल को थाम ले ।

 

जाम ए मैक़शी से तौबा किया तो क्या किया ,

गर खता ए इश्क़ से बचते तो गुनहगार न बनते ।

 

कभी कभी तो लिखते हो मियाँ माज़रा क्या है ,

अभी अभी तो गुज़रे हो उनकी गलियों से सिलसिला क्या है ।

 

हम तो मोहब्बतों की तहज़ीब से हैरान हैं ,

अंजुमन का हर एक गुंचा ए गुल अपने आप में वीरान है ।

 

मैं हरदम इल्तेज़ा ए दिल की सुनता हूँ ,

तभी तो दुश्मन ए जान को भी अपनी जान समझता हूँ ।

 

मुर्दों के शहर में लाशों की तफ़्तीश नहीं करते ,

गर रूबरू हो सियासी इब्लीस किनारा करके निकलने में भलाई है ।

 

अभी उम्मीद है वो शब् ए बज़्म कुछ शेर ओ सुखन भी लाएंगे ,

बस यूँ ही हाल इ दिल बयानी में दाद हम नहीं देते ।

 

कितना तंज़ किया करते हैं ,

लरज़ते लफ्ज़ तेरे बवाल बनके जाने कितने सवाल किया करते हैं ।

 

जीने दे अब तू मुझको मेरे ही हाल में ,

जैसी भी है अच्छी ही है ज़िन्दगी की रहगुज़र मेरी ।

bhoot pret ki kahani hindi,

ज़मीन जल रही है आसमान जल रहा है ,

फिर भी इक सरारा दरमियान दोनों के बेख़ौफ़ चल रहा है ।

 

हसरत ए नाकाम से जब डर जाता हूँ ,

माँ के नक्स ए पा में ही मिलती है मुझको जानत मेरी ।

 

जिस राह से गुज़रा वो सज़र जल के ख़ाक हो गया ,

रूबरू ए जमाल ए यार समंदर भी आफ़ताब हो गया ।

 

कुछ गरूर था अकड़ का दरख़्त के सूखे काँटो को ,

टपकी जो लब से शबनम वो भी गुल ए गुलज़ार हो गया ।

 

अभी ज़िक्र साया का किया है उसके ,

कहीं पैदल न चल दे साहिल खिदमत में उसके यारों ।

pix taken by google ,

Pushpendra Dwivedi

Welcome to the official website of Pushpendra Dwivedi. Here, you will find the sweetness of Hindi Shayari, the depth of inspirational stories, the expression of life through poems, and emotional writings filled with thoughts. Our goal is to give voice to your feelings and connect hearts through the power of literature. Whether you are a reader, a writer, or someone who just wants to feel—this blog is for you. Every creation here is an emotion that reaches straight to the heart.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Join Instagram

Join Now

Leave a Comment