हर्फ़ दर हर्फ़ ज़हन को कागजों में उरेख रखा है urdu shayari in hindi,

On: April 22, 2025 5:23 AM
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हर्फ़ दर हर्फ़ ज़हन को कागजों में उरेख रखा है urdu shayari in hindi,

हर्फ़ दर हर्फ़ ज़हन को कागजों में उरेख रखा है urdu shayari hindi ,

हर्फ़ दर हर्फ़ ज़हन को कागजों में उरेख रखा है ,

ज़िल्द से कोई क़िताब ए दिल का खरीदार नहीं ।

 

वो बुतों पर इतिहास बनाने की बात करता है ,

मैं हर ज़बान पर तहरीर ए मोहब्बत लिखना चाहता हूँ ।

 

मीलों मील फैले नदी के दो पाट पर तैरती कुछ तितलियाँ ,

कुछ को मंज़िल ज्ञात है कुछ मृत्यु से अज्ञात हैं ।

 

वो जो नदियों को गुनगुनाते थे ,

आज भी साहिलों के सुर ताल से अनभिज्ञ हैं ।

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बेबाक ताक लेती है निश्छल निर्मल नदी,

बिना नज़रों के मन झाँक लेती है ।

 

वो पर्वतों को तोड़ झरनों में उतर जाती है ,

आ गयी जो वेग में भूल छमा शीलता प्रलय में बदल जाती है ।

 

कुछ तबीयत भी नासाज़ रहा करती है ,

कुछ दिल का साद ओ ग़म से वास्ता भी नहीं पड़ता ।

 

लिखेगे कभी फुर्सत में हाल ए दिल अपना ,

अभी नींद में कुछ सपनो के मोती पिरोने दो ।

 

अभी तो बैठो की शाम ढलने दो ,

अभी तो सिन्दूरी आसमान पर घटा बनके छाई है ।

 

रात का जश्न चलेगा चलने दो ,

दिल को टुकड़ों में आज जलने दो ।

 

हम दिल के टुकड़ों को हाँथ में लेकर ,

शब् ए माहताब आहें भरते रहे ।

 

हुश्न की तारीफ़ करना भी कोई काम है ,

जो समझते हैं बेरोज़गार हमें उन्हें ही बस काम काजी रहने दो ।

 

सुकून ए रूह का इंतज़ाम नहीं होता ,

गोया जब तक ज़माने में इश्क़ बदनाम नहीं होता ।

 

क़र्ज़ उतरे तो सुकून मिल जाए ,

क़ब्र तक बोझ तेरे नाम का उठाया नहीं जाता ।

 

मर गए लैला मजनू और सीरी फ़रहाद मरे ,

न मिला सुकून ए रूह मोहब्बत को ज़माने भर की बर्बादियों के बाद ।

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थमते नहीं किस्से महफ़िल ए रानाईयों के शहर में रात देर तलक ,

वीरानियों में भी शहनाईयाँ गूँजती रहती हैं ।

 

देर रात तक चलता है शेर ओ शायरी का दौर ,

दौर ए मुफ्लिशी में भी शहर बेफिक्र कभी होता नहीं ।

pix taken by google

Pushpendra Dwivedi

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