tapish islamic heart touching love story in hindi ,

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कहने को नवाबों का शहर था लखनऊ मगर अंग्रेज क्या गए अपने साथ शहर के नवाबों की सारी नवाबी भी साथ लेते गए , मगर कुछ घरानो की रगों में अभी भी नवाबों का रुआब देखने को मिल जायेगा , हमारी कहानी एक ऐसे ही घराने के बिगड़ैल नवाब की है , जो की दौलत के नशे में इतना मगरूर है की हर इंसान को इंसान नहीं अपना गुलाम समझता है , ट्राफिक जाम का माहौल था , सड़क के बीच ओ बीच दिलावर के बेटे ने अपनी जिप्सी लगा रखी थी , शहर में बड़ा ख़ौफ था दिलावर के बेटे का जिसका नाम नवाब था , वो सड़क के बीच में जीप खड़ी करके सिगरेट पी रहा था , तभी एक अंकल अपनी नब्बे के दसक की खटारा स्कूटर का हॉर्न टीटियाते हुए कुछ चिल्लाते हैं मगर नवाब उनकी बात को अनसुना कर देता है अपनी सिगरेट की कश लगाने में मशगूल हो जाता है , तभी स्कूटर वाले अंकल नवाब के पास आकर कहते हैं बेटा गाड़ी किनारे कर ले ट्रैफिक जाम लगा है लोगन को जान नू परेशानी होवै सै एम्बुलेंस भी फंसी है पीछे नवाब तुरंत अपने जींस के पैंट में फंसा तमंचा निकाल कर हवा मे लहराता हुआ अंकल की कनपटी में धर के तान देता है , और कहता है तू बड़ा सयाना बन रहा है बड़ी फ़िक्र हो पड़ी है तेरे को ज़माने की ,

तभी नवाब के गाल पर एक तमाचा खींच के जड़ दिया जाता है नवाब की कनपटी झांझर हो जाती है और झापड़ मारने

वाली कोई और नहीं खुद बुजुर्ग की बेटी नशरीन होती है , झापड़ पड़ते ही नवाब की अकल ठिकाने आ जाती है नशरीन नवाब को ज़बरदस्त झाड़ती हुयी नसीहत देती है और कहती है , शक्ल से तो खानदानी लगते मगर बात करने की तमीज रत्ती भर की नहीं है तुममे घर वालों ने यही तालीम दी है तुम्हे अपने बुजुर्गों से इसी तरह से बात की जाती है , यही तहजीब है तुम्हारी यही तालीम ओ तरबियत मिली है तुम्हे , शर्म आनी चाहिए तुम्हे एक तो बीच सड़क में गाड़ी खड़ी करके रखे हो ऊपर से राहगीरों के साथ बदतमीजी कर रहे हो , इतना कह कर वो अपने अब्बू को सम्हालती हुयी वहां से चली जाती है , नवाब को नशरीन का झापड़ गाल पर नहीं दिल पर लगा था , नवाब बस नशरीन को देखता हक्का बक्का रह जाता है और इसी के साथ नवाब की जीप बीच सड़क हट है जाती है और सड़क का ट्रैफिक चालू हो जाता है , इसी के साथ कैमरे का फोकस ज़ूम आउट होता हुआ आसमान की तरफ चला जाता है , नशरीन का थप्पड़ नवाब के गाल पर नहीं उसके दिल पर पड़ा था उसकी बातें नवाब के दिल पर घर गयी थी वो चाह कर भी नशरीन के चेहरे को अपने ज़हन से मिटा नहीं पा रहा था , दिन रात सोते जागते अब बस नशरीन , नशरीन को हासिल करना उसकी ज़िन्दगी का मकसद बन गया था , वो हर हाल में नशरीन को पाना चाहता था , रात भर नशरीन का चेहरा नवाब की आँखों में छाया रहा वो सो नहीं पाया और सुबह होते ही नशरीन के घर की सामने वाली गली में नशरीन का इंतज़ार इसके बाद कॉलेज तक उसका पीछा इसके बाद दिन भर नशरीन का कॉलेज से निकलने का इंतज़ार करना और शाम को उसके पीछे पीछे घर तक जाना नवाब का इस तरह रोज़ पीछा करना नशरीन को नागवारा गुज़र रहा था , मगर वो नवाब को कुछ बोल नहीं पा रही थी , इधर नशरीन के अब्बू भी नवाब की हरकतों से खुश नहीं थे , नशरीन का एक रिश्तेदार था नदीम जो की नशरीन को दिल ओ जान से पसंद करता था , मगर नशरीन ने कभी उसे भाव नहीं दिया , नदीम भी नशरीन का पीछा करता था मगर जब उसने अपनी मोहब्बत के रास्ते में नवाब को देखा तो उससे रहा नहीं गया और वो नवाब को रोक लिया नवाब ने जब तरीके से समझाया तो नदीम खुद बा खुद किनारा कर लिया ,

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नवाब का इकतरफा इश्क़ सातवें आसमान पर था इधर वो अपना काम धंधा छोड़कर बस नशरीन के ख्यालों में खोये हुए थे उधर नशरीन के कान में जूँ तक नहीं रेंग रही थी , नवाब सारा सारा दिन घर से लापता रहता है घर वालों धीरे धीरे ताल्लुक़ात ख़त्म होते जा रहे थे अपने लड़के की ये बेरुखी नवाब के अब्बूजान दिलावर को नागवारा गुज़र रही थी अपने बेटे की मसरूफियत की वजह जानने की उनकी दिली तमन्ना थी , उन्होंने इसके लिए अपने मुस्टंडे मुश्ताक़ को ये काम सौंपा , मुश्ताक़ ने बखूबी अपने काम को ईमानदारी के साथ अंजाम दिया और दिलावर को नवाब की मशरूफियत की वजह से रूबरू करवाया,  वजह जान कर दिलावर के पैरों के नीचे से ज़मीन सरक जाती है , दिलावर गुस्से से आग बबूला हो जाता है वो कहता है उस दो टके की लड़की की ये औक़ात वो किसी भी सूरत में हमारे नवाब खानदान की बहू नहीं बन सकती , आनन् फानन में दिलावर मुश्ताक को आदेश देता है की किसी भी सूरत मे नशरीन की मौत की खबर सुननी है , मुझे नशरीन और उसका परिवार पूरे लखनऊ में नहीं दिखना चाहिए , इसके लिए तुम्हे उन्हें बम से उड़ाना पड़े या गोली चलानी पड़े जो करना पड़े वो करो , मुश्ताक़ अपने आका का हुकुम कैसे टाल सकता है और एक दिन भरे बाजार में नशरीन के ऊपर गोली चला दी जाती है , भीड़ बहुत ज़्यादा थी बाजार में भगदड़ मच जाती है और इसी भीड़ का फायदा उठाकर नशरीन किसी तरह वहाँ से जान बचा के भाग निकलती है, नशरीन पर हुए जानलेवा हमले के चलते नशरीन का परिवार दहशत में आ जाता है और नशरीन के अब्बू किसी तरह से नशरीन को लेकर रातों रात लखनऊ से बाहर निकल जाते हैं ,

रातों रात नशरीन के अब्बू उसे साथ लेकर लखनऊ से बाहर चले जाते हैं वो कहाँ चले जाते हैं इस बात की खबर किसी को

नहीं होती है , नवाब नशरीन को बिना देखे बेताब हो जाता है , दिन गुजरने लगते हैं नवाब को किसी तरह पता चलता है की नशरीन पर हमला करने वाला कोई और नहीं उसके बाप का गुर्गा मुश्ताक़ ही था , जिससे की उसके दिल में अपने बाप दिलावर के लिए नफरत और बढ़ जाती है अब नवाब को नशरीन के साथ साथ मुश्ताक़ की भी तलाश रहती है इधर नवाब को अपने अब्बू के बिजनेस के काम से कानपुर जाना पड़ता है,  वहीँ उसे अचानक बाजार में मुश्ताक मिल जाता है जिसे देखते ही मुश्ताक उसके पीछे लग जाता है और थोड़ी ही देर में धर दबोचता है , और एक सॉलिड पिटाई के बाद मुश्ताक़ सारे राज़ खुद बा खुद उगल देता है , वो बताता है की उसके बाप ने ही नशरीन को जान से मारने के लिए भेजा था ताकि नशरीन तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर चली जाए , मुश्ताक़ ये भी बताता है की नशरीन और उसके अब्बू अब कानपुर में ही रहते हैं , नवाब नशरीन का पता लेता है और उसके साथ वही शादी करता है और उसे उसके अब्बू के साथ लेकर  लखनऊ चला आता है , नशरीन पर हुए हमले में अपने बाप का हाँथ पाकर नवाब अपने बाप से बेहद नाराज़ होता है , नशरीन पर करवाए गए जानलेवा हमले में दिलावर का हाँथ होने की बात को लेकर बाप बेटे के बीच झड़प भी होती है नवाब अपनी बेगम नशरीन के साथ अलग किराए के मकान में रहने लगता है , और अपना अलग व्यवसाय सुरु कर लेता है नशरीन और नवाब की शादी से नशरीन के अब्बू भी खुश नहीं थे , वो अपने पुस्तैनी मकान में अकेले ही रहते हैं उनका पुराना रिश्तेदार नदीम उनकी सेवा करता है , बेटी के साथ हुए अन्याय का सदमा उन्हें बर्दास्त नहीं होता है , और एक दिन अचानक उन्हें हार्ट अटैक आ जाता है , उन्हें तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ता है , नदीम फ़ौरन नशरीन को इस बात की ख़बर पहुँचाता है और नशरीन को बताता है की डॉक्टर कल ऑपरेशन करेगा लगभग ४ लाख का खर्चा आएगा पैसे का इंतजाम करना पड़ेगा , नशरीन नवाब से कहती है अब्बू हॉस्पिटल में एडमिट है नवाब कहता है ठीक है कल सुबह ९ बजे हॉस्पिटल चलेंगे , आप परेशान न हो नशरीन किसी तरह रात गुज़ारती है , और सुबह पहर जाने कब उसकी नींद लग जाती है और जब उठती है तो सुबह के ८ बज चुके थे , बिस्तर पर नवाब को न पाकर उसका दिमाग ठनकता है वो घर में नवाब को चारों तरफ ढूंढती है मगर कहीं उसका पता नहीं चलता है है वो तैयार हो जाती है सोचती है की नवाब कहीं आस पास ही होगा हॉस्पिटल जाने के टाइम तक आ जायेगा मगर नवाब नहीं आता है , वो उसे कॉल करती है मगर नवाब फोन भी नहीं उठाता है ,

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दोपहर के १२ बज चुके थे गुस्से से आगबबूला नशरीन अकेली ही हॉस्पिटल के लिए रवाना होती है , हॉस्पिटल पहुंचकर देखती है अब्बू उसके सामने बेड पर सकुसल लेते हुए हैं , नदीम बताता है अब्बू का ऑपरेशन हो चुका है , नशरीन को डॉक्टर बताता है की नवाब ने टाइम में पैसे जमा कर दिए थे जिसके चलते ऑपरेशन समय पर हो सका , नवाब के प्रति नशरीन के दिल में भरी नफ़रत मोहब्बत में तब्दील होने लगती है , वो जब घर लौटती है तब नवाब भी घर आ चुका होता है , नशरीन का नवाब को देखने का अंदाज़ आज कुछ और था नवाब के प्रति नशरीन का दिल मोहब्बत से लवरेज़ था , वो नवाब से पूछती है सुबह सुबह कहाँ ग़ायब हो गए थे बिना बताये , नवाब कहता है वो बिजनेस के सिलसिले में ज़रा मशरूफ हो गया था , और बताएं कैसे हैं अब आपके अब्बू तबीयत तो ठीक है न उनकी, गहरी ठंडी सांस भरती हुयी खिड़की की तरफ मुँह किये खड़े नवाब को नशरीन पीछे से जकड लेती है और कहती है अच्छा जी ऐसे अनजान बन रहे हैं जैसे कुछ जानते ही नहीं आज आपकी वजह से मेरे अब्बू ज़िंदा है , आपने बिना किसी को बताये हॉस्पिटल की फीस भर दी अगर समय पर पैसों का इंतज़ाम न होता तो आज शायद मैं अनाथ हो जाती ये बोलते बोलते नशरीन की आँखें डबडबा जाती हैं , नवाब नशरीन के कंधे को पकड़ कर अपने सामने लाता है और उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में भरता हुआ उसके आंसू पोछता है , और उसे कहता है मैंने तो बस अपनी मोहब्बत का फ़र्ज़ अदा करने की कोशिश की है क्या तुम्हारे अब्बू मेरे अब्बू नहीं हैं , नवाब की बात सुनकर नशरीन की आँखें ख़ुशी से छलक जाती हैं , वो नवाब की चौड़ी छाती और बलिष्ठ भुजाओं में खुद को सिमटने से रोक नहीं पाती है , नवाब नशरीन के माथे को चूमता है और उसे अपनी बाहों में भर लेता है नशरीन नवाब की पनाहों में जन्नत का सुख महसूस करती है , उसे लगता है दोनों जहां की तमाम खुशियां उसकी बाहों में हैं और वो चाह कर भी अपने आपको नवाब की बाहों से जुदा नहीं कर पाती है ,

धीरे धीरे दिन गुजरने लगते हैं दोनों मिलकर अच्छी सेवा करते हैं नशरीन के अब्बू बीमारी से रिकवर होकर अपने घर चले

जाते हैं , नवाब कहता है अब्बू अब आप हमारे साथ ही रहिये लेकिन वो मना कर देते हैं , उनके दिल में नवाब के लिए कोई मलाल नहीं था , वो अपनी ज़िन्दगी को नवाब की दी हुयी सौगात समझने लगते हैं , सब कुछ ठीक ठाक चलने लगता है , नशरीन नवाब के बच्चे की माँ बनने वाली है,  ये बात जानकर नवाब बेइंतेहा खुश होता है , इधर नवाब का बिजनेस लखनऊ के बाहर भी बड़े बड़े शहरों में फ़ैल रहा था , और कहते हैं न जब सब कुछ सही चलने लगे तो समझ जाना चाहिए की अब कुछ न कुछ गड़बड़ होने वाला है , एक दिन नवाब बिजनेस के सिलसिले में बनारस गया हुआ था लौटने में काफी रात हो गयी थी नशरीन बार बार नवाब को फोन लगा रही थी , मगर नेटवर्क न मिलने की वजह से नवाब का फोन नहीं लग रहा था , राह देखते देखते नशरीन की न जाने कब आँख लग जाती है और जब सुबह नशरीन का फोन बजता है तब पता चलता है की कोहरे की वजह से कार और बल्कर की भयानक टक्कर में नवाब की मौत हो गयी हैं डेड बॉडी लखनऊ दोपहर तक पहुंच जाएगी , खबर सुनते ही वो धड़ाम से फर्श पर गिर पड़ती है , और जब उसे होश आता है तब वो अपने आपको नवाब की मैय्यत के सामने खड़ा पाती है पर नवाब की मौत का सदमा नशरीन को अंदर तक तोड़ के रख देता है उसे लगता है नवाब की मौत के साथ वो खुद को भी खत्म कर ले मगर उसे पेट में पल रहे नवाब के मोहब्बत की निशानी को सम्हाल कर रखने की ज़िम्मेदारी का ख्याल आत्महत्या करने से रोक लेता है , नवाब की मौत के बाद नशरीन अपने अब्बू के घर में जाकर रहने लगती है वो किसी पर बोझ न बने इसलिए आगे की पढ़ाई चालू कर देती है नौकरी के लिए आवेदन फॉर्म भर्ती रहती है , इधर नवाब और नशरीन के मोहब्बत की निशानी एक बेटा पैदा होता है नशरीन उसका नाम छोटे नवाब रखती है कहते हैं न कभी ख़ुशी कभी ग़म , कभी धूप कभी छाँव हर रात के बाद सवेरा ज़रूर आता है और नशरीन की तक़दीर में भी वो दिन लौट आता है , एक दिन नशरीन की मेहनत रंग लाती है और वो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्त हो जाती , दिन गुजरने लगते हैं तभी एक दिन नशरीन के पास एक रजिस्ट्री आती है जिसमे दिलावर अपनी वसीयत में तमाम ज़मीन जायदाद नशरीन और उसके बेटे के नाम कर देता है , मगर नशरीन दिलावर की वसीयत ठुकरा देती है और जवाब में लिखकर भेजती है मैंने नवाब का दिल देखकर उनसे शादी की थी आपकी ज़मीन जायदाद से मुझे कोई लेना देना नहीं है , आपकी मिलकियत आपको मुबारक हो , नशरीन का जवाब पढ़कर दिलावर की आँखें शर्म से झुक जाती हैं । दोनों हांथो को पीछे किये हुए दिलावर निरुत्तर सा घर के लॉन में टहलने लगता है इसी के साथ कैमरे का फोकस आसमान की तरफ जाता हुआ ज़ूम आउट हो जाता है , नशरीन छोटे नवाब को एक बेहतरीन परवरिश देने में जुट जाती है इसी के साथ कहानी ख़त्म हो जाती है ।

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pics taken by google ,