रोती है रात तन्हा जब चाँद होता है अकेला ,

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रोती है रात तन्हा जब चाँद होता है अकेला ,
रोती है रात तन्हा जब चाँद होता है अकेला ,

रोती है रात तन्हा जब चाँद होता है अकेला ,

रोती है रात तन्हा जब चाँद होता है अकेला ,

भीड़ भाड़ वाले इलाकों में ये घुटन महसूस नहीं होती ।

मेरे शहर में मुशाफिरों की कदर बढ़ गयी ,

वो शहर से क्या गुज़रे नए मुशाफ़िरख़ाने खुल गए ।

यूँ ही जब तेरी याद आती है ,

तुझको भला बुरा बोल के दिल को तसल्ली दे लेता हूँ ।

रोने से क्या होगा फ़ायदा सोचता हूँ ,

फिर तकिये में मुँह छुपा के सुबक लेता हूँ ।

कभी तेरी बातों से गुल खिलते थे रातों को ,

अब तेरी यादों से रातों को गुलज़ार करता हूँ ।

 

 

मैं तुझको याद करता हूँ अब भी ,

तू मुझको भूल जा शायद ।

वो चादर वो बिछौने वो परदे वो दरीचे ,

अभी भी आती है खुश्बू उनसे जो कभी तूने छुए होंगे ।

बगीचे में उगे पौधे की टहनियों ,

पत्तों से फूलों से आती है तेरी ख़ुश्बू

भिगोने में तेरी याद निचोकर ,

बन्जर ज़मीन को सींचे होंगे ।

दिल धड़कता है मेरा जब भी तेरा नाम सुनता हूँ ,

कौन कहता है मुर्दा घरों में दिलों के धड़कने की आहटें महसूस नहीं होती।

 

 

रोड साइड रोमियो की मोहब्बत क्या मोहब्बत नहीं होती ,

माना की कुछ अब्वल दर्ज़े के वादे नहीं होते ,

गोया विसाल ए यार से टूटी फूटी ज़रूरतें नहीं होती ।

मर जाते कब का तन्हाइयों के अँधेरे में शायद ,

एक हमदर्द जला रहा है हर रोज़ दिल थोड़ा थोड़ा ।

शीशे से डरेंगे तो इश्क़ ए सियासत क्या करेगे ,

दिल में भरे तूफ़ान जवान कैसे ठण्डी आहें भरेंगे ।

तहज़ीब महफूज़ रखेगे हमारे नौ निहाल ,

फ़िज़ा में फैली खुश्बू ए इल्म से चमन गुलज़ार होता जायेगा ।

खुद के आब ओ दाना का जुगाड़ करते करते ,

अक्सर आदमख़ोर सियासी दूसरों का घरौंदा लूट लेते हैं ।

 

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घरों में फेकते हैं पत्थर वही जो अक्सर खानाबदोश हुआ करते हैं ।

मर गए खून का रंग सुफेद कहने वाले ,

माली जब लहू से सींचता है गोया चमन गुल ए गुलज़ार होता है ।

pix taken by google