रूहें न जला दे कहीं ये ज़ौक़ ए आतिशी तेरी romantic shayari ,

0
464
oरूहें न जला दे कहीं ये ज़ौक़ ए आतिशी तेरी romantic shayari , ne line thoughts on life in english,
रूहें न जला दे कहीं ये ज़ौक़ ए आतिशी तेरी romantic shayari ,

रूहें न जला दे कहीं ये ज़ौक़ ए आतिशी तेरी romantic shayari ,

रूहें न जला दे कहीं ये ज़ौक़ ए आतिशी तेरी ,

ख़ामोशी से ही सही ये आदम ए बुज़दिल गुनाह क़बूले खड़ा है

 

रूहानियत को ख़ुदा बक्शे अपनी बला से ,

शहर भर में आदम ही आदम का गोश्त लुटे पड़ा है

 good morning shayari

वक़्त काटने के लिए वो आके बैठा पहलू में ,

बातों बातों में दिल ही लूट गया कुछ पता न चला ।

 

वक़्त के साथ तहज़ीबों ने तरक्की कर ली ,

दिल तोड़े दर ओ दीवारें कई खाली कर ली

 

वक़्त सिखा जाता है नज़ाक़त समंदर को भी ,

पत्थरों से टकरा कर के लहरें नहीं टूटा करती ।

 

वक़्त ने सिलवटें डाल दी जिस्म में गोया ,

हमारे जमाल ए यार जैसा कोई महज़बीन न था ।

 

राजा रंक हो या पीर फ़क़ीर ,

वक़्त की सियासत का मारा हर एक बंदा है ।

 

मैं एक अनजान मंज़िल का मुशाफिर ,

वक़्त बेलगाम घोड़े पर सवार दौड़ता सरपट

 

औक़ात बता देती है टकशाल में बनी घुड़शाल वाली असरफियाँ ,

हर वक़्त ए हुक़ूमतों का सरताज वही था ।

 

ख़ामोशी साँप बनके डसती है ज़हर की तरह ,

शहर भर की मीनारों में हर वक़्त बस रूहानियत रवां है

 

तू दूसरी दुनिया में खुश रहना मेरे दोस्त ,

की अब ये दुनिया इंसानो के रहने के क़ाबिल नहीं रही ।

 

वक़्त की बिसात अच्छी अच्छी बुनियाद हिला देती है ,

तुम अफशानो की इमारतों को कब तलक ख़्याली जामा उढ़ाओगे ।

 

बात अब तेरे वज़ूद पर जा अटकी है ,

सब गुनाह क़बूल कर या दिल ए मामला रफा दफा ।

 

ऐ क़ाफ़िर ज़रा मज़हब बता अपना ,

क्या मरने के बाद भी सियासी ख़ुदा के सज़दे में जायेगा ।

 good night sms

ज़र ज़र इमारतों में सुराख़ कैसे कैसे हैं ,

ख़ाक ए जबीन होने की मुनियाद अभी बाकी थी ।

 

आसमानी ख़ुदा तो सबके एक जैसे हैं ,

ऐसी क्या सियासी ग़फ़लत है की लोग साथ इबादतें भी नहीं कर सकते ।

 

लोग मर जाते हैं ज़िंदा क़ब्रों के पास रहकर के भी ,

तुम कैसे जी लेते हो मुर्दों के क़फ़न छीनकर के भी ।

pix taken by google