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शहडोल से जबलपुर रोड पर एक लाल रंग की कार लगभग ८० की रफ़्तार में दौड़ी जा रही है , सामने फॉरेस्ट चौकी पर बैठा फॉरेस्ट गार्ड कहता है मरेंगे साले आज इनकी मौत इन्हे यहां खींच कर लाई हैं , अभी कार लगभग ५० किलो मीटर ही चली होगी और जंगल सुरु होते ही कार अचानक पंक्चर हो जाती है , कार में २ कपल सवार है , दोनों कपल कार से बाहर निकल कर देखते हैं , और कार की हालत देख कर कहते हैं ओह शिट उफ़ कार को भी अभी पंक्चर होना था , बोलकर टायर बदलने में लग जाते हैं , एक लड़की झाड़ियों में टॉयलेट के लिए चली जाती है , तभी एक चीख गूंजती है लड़की की चीख सुनकर सभी झाड़ियों की तरफ दौड़ते हैं सामने का दृश्य अत्यंत भयावह था , वहाँ लड़की की सर कटी लाश पड़ी होती है , सभी वापस आकर एक बार पुनः टायर बदलने में लग जाते हैं , तभी टायर बदल रहे लड़के के सर पर एक भयानक दरिंदा रॉड से हमला करता है हमला इतना तेज़ था की लड़के का सर फटकर वही तरबूज की तरह बिखर जाता है , बचा एक कपल जंगल की तरफ भागता है और उन दोनों की चीख के साथ सारा जंगल एक बार पुनः गुंजायमान हो जाता है ,

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शाम का वक़्त मायूसी से घिरा हुआ है गुटखा का पाउच हिलाता हुआ छुट्टन यही सोच रहा है की आजकल धंधा धेले भर का नहीं होता है , ऊपर से उधारी वाले देने का नाम नहीं ले रहे हैं , लोहा का दाम दिन दूना रात चौगुना चढ़ रहा है , लगन का सीजन भी बीता जा रहा है और इस बेरोज़गारी के आलम में शादी करेगा कौन बस इसी आस में दिन तो गुज़र जाता है मगर रात कटाये नहीं कटती है , ऊपर से रूस यूक्रेन का युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है कहीं विश्व युद्ध न हो जाए और उसकी हार्डवेयर की दुकान न बंद हो जाए बस इसी सोच में छुट्टन डूबा हुआ अभी गुटखा की एक पीक थूका ही था की , सामने ब्लैक कलर की डस्टर आकर रुक जाती है  ,

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जिसमे से उतरते हैं दादा राजवीर सिंह , और उनके साथ कुछ टुच्चे टाइप के गुंडे , जो दादा राजवीर अर्थात रज्जू भैया की जी हज़ूरी में हमेशा मसगूल रहते हैं , मजाल है की रज्जू दादा की शेरवानी तो छोड़ो मोजरी में गुटखे की पीक पड़ जाए रज्जू दादा के चमचे चम्मचा गिरी में इतने दक्ष थे की जूती भी जीभ से चाट कर साफ़ करने के लिए तत्पर रहते हैं , रज्जू दादा को देखते ही छुट्टन कुर्सी से उठकर खड़ा हो जाता है , और सलाम दादा करके किनारे खड़ा हो जाता है , छुट्टन दो कुर्सी उठाता हुआ रज्जू दादा के पास लाता है और रज्जू दादा के चमचे भी अपने लिए कुर्सियां जुगाड़ करने में लग जाते हैं , कुछ ही देर में रज्जू दादा के मोबाइल की रिंग बजना सुरु होती है सभी मित्र मंडली लोकेशन राइट करते हुए रज्जू दादा की सेवा में ठीहे पर पहुंचने लगते हैं और देखते ही देखते स्कार्पियो , बोलेरो, थार , फॉर्चूनर,  सफारी की लाइन लग जाती है , तभी बात आगे बढ़ती है और बात ही बात में पार्षदी के चुनाव का प्रशंग छिड़ जाता है , तभी रज्जू का एक चमचा मक्खन पॉलिश करता हुआ कहता है , रज्जू दादा की जीत निश्चित है , रज्जू दादा कहते हैं बकवाश बंद करो बे क्षेत्र में काम करना पड़ेगा मोहल्ले का विकाश करना पड़ेगा , पहले बुजुर्गों के सामान के लिए एक सभा का आयोजन करना पड़ेगा , उसमे उन एक श्रीफल और एक एक शॉल का वितरण किया जायेगा , और इस सबकी व्यवस्था लल्लन और उनकी प्रॉपर्टी डीलिंग वाली गैंग करेगी , और हाँ इस बार लौंडिया बाज़ी वाला कोई मैटर नहीं होना चाहिए पिछली बार महिला सम्मान के आयोजन में कितनी मालबाज़ी किये थे तुम लोग मुझे पता है , तभी एक चमचा कहता है , इलाहाबाद से पतुरिया मगाएगे दादा , रज्जू कहता है हाँ मादर,,, इसके बाद बस मुजरा होना बाकी रह गया है , दारु के अलावा कुछ भी नहीं होगा ,

पार्षदी का चुनाव लड़ रहे हैं , कोई एम् एल ए या विधायक का नहीं , इतना खर्चा तो मंत्री जी चार बार विधायकी का

चुनाव लड़ने में भी नहीं किये होंगे , तुमको का हुआ बे छुट्टन काहे मुँह लटकाये बैठे हो , अपने एक छर्रे मोनू की तरफ़ इशारा करते हुए रज्जु भैया कहते हैं तुम छुट्टन को झुका के इसकी गां ,,,, में एक लात नहीं मार सकते हो का बे , मोनू कहता है छोटा भाई है अपने भाई के साथ कोई ऐसा करता है दादा , रज्जु भैया उठते हैं और छुट्टन को अपने गले लगाते हुए कहते हैं , यही प्रॉब्लम तो हमारे साथ भी है की छुटटन को हम अपनी जान से ज़्यादा चाहते हैं , और छुट्टन के गाल में प्यार भरी थपकी देते हुए कहते हैं , ये हमारा छुट्टन बड़ा हरामी है वो तिवारी की बिटिया को लाइन मारता है , और तिवारी को ही चमका दिया लौंडिया तो अंडरग्राउंड हो गयी तिवारी का रास्ते से निकलना भी मुश्किल कर रखा है छुट्टन ने , छुट्टन मुस्कुराता हुआ कहता है , कैसी बात करते हैं रज्जु भैया वो हमारे लिए गुंडे लेकर आई थी बहन ,,, रज्जु कहता है लड़की को गाली काहे देते हो बे जिसकी गां ,,, में दम होगा वो पटा के ले जायेगा वैसे भी तुम्हारी लौंडिया बाज़ी के चक्कर में कितने लौंडों की बजा चुके हैं हम , छुट्टन कहता है आप क्या बजाये हो रज्जु भैया बजाए तो हमारी प्रभु दयाल ने है , १ लाख लेकर कब से बैठा है देने का नाम नहीं ले रहा है , रज्जु दादा फ़ौरन प्रभुदयाल को फोन लगा देते हैं , और प्रभु को बोलते हैं न बे प्रभु इलाके में तुम दो दो प्रॉपर्टी बेच दिए और हमारा कमीशन अभी तक हमारे पास नहीं पंहुचा देखो कल होली है या तो तुम आजाओ हमारे पास चुप चाप रूपया लेकर नहीं तो अगर हम आये तुम्हारे पास तो बहुतै बुरा होगा , फटी के आलम में प्रभुदयाल कहता है जी दादा कल हम खुदई आपकी सेवा में हाज़िर हो जायेगे , रज्जु दादा पूछते हैं कितने समय तक आ जाओगे प्रभुदयाल कहता है दादा दोपहर तक , रज्जु दादा ठीक है बोलकर फोन काट देते हैं , और छुट्टन को कहते हैं अब देखो कैसे हम इनकी मैया ,,, हैं कल , और तुम्हारा भी हिसाब किताब करा देंगे हाँथो हाँथ ,

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दोपहर का वक़्त होली का दिन छुट्टन की दुकान के सामने रज्जु दादा के पुलिस के साथ चमचों का जमावड़ा लगा हुआ है , जाम पर जाम छलक रहे हैं , तभी रज्जु दादा प्रभुदयाल को फोन लगा देते हैं , और कहते हैं कैसे हो बेटा प्रभुदयाल तुम्हे कहे रहे न आज हमारी सेवा में हाज़िर होना है प्रभु कहता है जी दादा बस आही रहा हूँ रास्ते में हूँ , रज्जु दादा कहते हैं तुम जहां हो वहीँ रुको हम अभी आते हैं और हॉकी रोड लेकर मुस्टंडे डस्टर में सवार हो जाते हैं , प्रभुदयाल रास्ते में ही मिल जाता है और गाड़ी खड़ी करते ही प्रभु दयाल के ऊपर दो चार डंडे पड़ जाते हैं कराहता हुआ प्रभु दयाल सड़क पर लोटने लगता है , रज्जु दादा उसे मारने के लिए आगे बढ़ते हैं मगर छुट्टन बीच में ही रज्जु दादा को रोक लेता है। और कहता है जाने दीजिये बेचारे को भाई है अपना , प्रभुदयाल भी हाँथ जोड़ता हुआ फ़ौरन रज्जु दादा का कमीशन जेब से निकालता है , और उनके हाँथ में रख देता है रज्जु दादा कहते हैं ये तो हमारा पैसा हुआ और छुट्टन का भी एक लाख तुम पेले हुए बैठे हो वो कौन लौटाएगा बे , प्रभुदयाल फटी के आलम में फ़ौरन छुट्टन का अकाउंट नंबर लेकर पैसा ट्रांसफर करता है , छुट्टन कहता है यही काम अगर प्रभु भैया आप प्यार से कर देते ये मार पिटाई की नौबत ही नहीं आती , और प्रभुदयाल के ऊपर थूकते हुए सभी वहाँ से निकल जाते हैं , कार में बैठने के बाद रज्जु दादा कहते हैं आज बहुत माल आ गया है अब बस मालबाज़ी की जाएगी , छुट्टन कल तुम सुबह तैयार रहना हम शहडोल जायेगे फिर हम वहाँ से जबलपुर चलेंगे , छुट्टन कहता है कोई ख़ास व्यवस्था है क्या दादा रज्जु कहता है तुम देखते जाओ बस , और मुस्कराहट के साथ गाड़ी आगे बढ़ा देते हैं। सुबह सुबह का वक़्त छुट्टन फ़ौरन तैयार होकर रज्जु दादा के गेट पर हॉर्न बजाना सुरु कर देता है , रज्जु दादा आंख मीजते हुए दरवाज़ खोलते हैं और छुट्टन को बोलते हैं रात भर नींद नहीं आई का बे छुट्टन , जवाब में छुट्टन मुस्कुरा देता है , और बेंच पर पड़ा हुआ अखबार पढ़ने में व्यस्त हो जाता है , इधर रज्जु दादा भी तैयार हो जाते हैं , और रज्जु दादा की गाडी शहडोल के लिए रवाना हो जाती है , रास्ते में रज्जु दादा दोनों लड़कियों को फोन लगाते हैं , और जबलपुर में होटल के दो कमरे बुक करते हैं , लगभग ४ घंटे की यात्रा के बाद दोनों शहडोल पहुंच जाते हैं , थोड़ा देर रुकने के बाद रज्जु और छुट्टन अपनी अपनी आइटम के साथ जबलपुर के लिए रवाना हो जाते हैं ,

अगली सीट में रज्जु के साथ सुमन और पिछली सीट में छुट्टन के साथ मोनिका टच लेती है , गाड़ी ८० से ११० की रफ़्तार

में शहडोल से जबलपुर के लिए रवाना हो जाती है , लगभग ५ से ६ घंटे के सफर के बाद कार जबलपुर पहुंच जाती है , दोनों आज जबलपुर घूमने के मूड में नहीं है डिनर के बाद दोनों होटल के अपने अपने रूम में घुस जाते हैं , रूम ख़ास कपल के लिए डेकोरेट किया गया है बेड पर जाते ही सुमन जन्मों की भूखी शेरनी की तरह रज्जु पर टूट पड़ती है , रज्जु दादा भले अपने रीवा रियासत के शेर रहे हों मगर शहडोल की जंगली शेरनी के सामने आत्मसमर्पण कर देता है , इधर थका हुआ छुट्टन भी जवानी के खेल की बाज़ी में हार नहीं मानता है , मगर अभी मोनिका भी कमज़ोर खिलाड़ी नहीं थी वो छुट्टन जैसे सुकुमार कोमलांगी नवयुवक का शिकार करने में बेहद माहिर थी रात के २ राउंड के गेम के बाद छुट्टन का थका हुआ जिस्म जवाब दे देता है , अब वो और यौवन के खेल खेलने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर कर देता है , और थक हार कर बिस्तर में लेट जाता है , मोनिका फिर भी ज़बरदस्ती उसके जिस्म को नोचती खसोटती रहती है और इसी कश्मकश में रात गुज़र जाती है , सुबह जब आँख खुलती है तब दोनों जोड़े अपने आपको तरो ताज़ा महसूस करते हैं और तगड़े जिस्मानी मिलाप के बाद शॉपिंग उसके बाद भेड़ाघाट जाने की प्लानिंग बनती है , रास्ते में लंच होता है भेड़ाघाट के खूबसूरत नज़ारों के बीच दोनों कपल तरह तरह के पोज में फोटो शूट करते हैं , कुछ रोमांटिक किसिंग सीने के वीडिओज़ बनाये जाते हैं इसी तरह मौज मस्ती में लगभग शाम के ४ बज जाते हैं ,

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इसके बाद वो वहीँ से सीधा शहडोल के लिए रवाना हो जाते हैं , लगभग २ घंटे की यात्रा के बाद घनघोर जंगल सुरु होता है जहां पर मोबाइल में नेटवर्क मिलना बंद हो जाता है जिसके कारण कार का जी पी एस सिस्टम काम करना बंद कर देता है , और कुछ ही देर में गाडी का एक टायर धड़ाम की आवाज़ के साथ फूट जाता है , डर के मारे मोनिका छुट्टन के सीने से चिपक जाती है छुट्टन भी मौके का पूरा फायदा उठाते हुए मोनिका को अपनी बाहों में कसके जकड लेता है इधर सुमन का भी मन करता है की लपक कर रज्जु की बाहों में सिमट जाए , मगर रज्जु की ड्राइविंग सीट में बैठे होने की वजह से गियर लीवर बीच में आ जाता है , और सुमन अपने अपने आप में तड़प कर रह जाती है , मोनिका कहती है छोड़ो भी जीजा जी औरजीजी देख लेंगे तो क्या कहेगे मगर रज्जु मोनिका की बात सुन लेता है और छुट्टन को बोलता है तुम साले कार में भी बस चूमा चाटी करोगे या गाड़ी से उतर कर टायर बदलने में भी मदद करोगे , चलो डिग्गी से टायर निकालो जल्दी , छुट्टन मजबूरी में मोनिका को अपनी आगोश से अलग करता हुआ जी दादा बोलता है और डिग्गी के पास जाकर एक ज़बरदस्त जोहाई लेता है तभी कार की डिग्गी के ऊपर से एक हिरण का कटा हुआ सर धड़ाम से गिरता है , छुट्टन की चीख निकल जाती है , रज्जु फ़ौरन टॉर्च और रिवॉल्वर लेकर छुट्टन की तरफ दौड़ता है और डिग्गी पर हिरण का कटा हुआ सर देखकर ऊपर पेड़ पर टॉर्च की लाइट मारता है ऊपर तेंदुआ टॉर्च की लाइट के प्रकाश के कारण गुस्से से गुर्राता है वो रज्जु पर झपट्टा मारता उसके पहले ही रज्जु उस पर गोली दाग देता है गोली की आवाज़ सुनकर तेंदुआ कूंद कर जाने कहाँ झाड़ियों में गुम हो जाता है ,

अभी चारों कार में बैठे ही थे की मौसम अचानक बिगड़ जाता है , चरों तरफ तेज़ तूफ़ान के साथ घनघोर बारिश सुरु हो

जाती है , रज्जु दादा जैसे तैसे कार स्टार्ट कर चलना सुरु करता है , तभी एक पेड़ की डाल टूटकर कार के बिल्कुल सामने आकर गिरती है रज्जु कहता है ये क्या है बहन चो,,, छुट्टन कहता है दादा अब हमें यही चुपचाप कार में बैठ कर तूफ़ान थमने का इंतज़ार करना पड़ेगा , इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है , रज्जु कहता है वो तो ठीक है मगर खुदा न खास्ता अगर हांथियों का हमला हुआ तो कार के साथ साथ हमारा भी कचूमर बन जायेगा , अभी तो फिलहाल तूफान के थमने का इंतज़ार करने के अलावा कोई रास्ता है , कार के अंदर दुबकी मोनिका छुट्टन को देखकर मुस्कुरा रही थी , वो धीरे धीरे अँधेरे का फायदा उठाते हुए छुट्टन की जांघ पर हाँथ रख देती है और धीरे धीरे हाँथ को ऊपर की तरफ बढ़ाना सुरु करती है , तभी रज्जु दादा कहते हैं लाइटर तुम्हारे पास है न छुट्टन , छुट्टन जी दादा कहता है और मोनिका का हाँथ हटाता हुआ ज़रा रुक जा हवस की पुजारिन जीन्स की जेब से लाइटर निकाल कर रज्जु दादा को देता है , रज्जु कार में ही सिगरेट के छल्ले उड़ाना सुरु कर देता है ,

थोड़ी देर में तूफ़ान थम जाता है , रज्जु और छुट्टन कार से उतर कर पेड़ की डाल को किनारे करते हैं , तभी जंगल से कुछ भयानक आवाज़ें सुनायी देती हैं , कुछ ही दूरी पर सामने से एक लड़की दौड़ी चली आ रही है और उसके पीछे बहुत सारे भेड़िया पड़े हुए हैं ये लड़की लाल वाली कार से निकल कर जंगल की तरफ भागे कपल वाली लड़की है , रज्जु आव देखता है न ताव भेड़ियों के झुण्ड पर तड़ा तड गोली चलाना सुरु कर देता है २ -३ भेड़िये वहीँ ढेर हो जाते हैं रज्जु और छुट्टन फ़ौरन उस लड़की को कार के अंदर बिठा देते हैं और कार को चारों तरफ से लॉक कर देते हैं , भेड़ियों का झुण्ड गुस्से से उन्हें घूरता रहता है कार चालू होने की वजह से कोई कार के पास आने की हिम्मत नहीं कर पाता है , लड़की अपनी आप बीती सुनाती है की कैसे उसके साथियों को एक एक करके मार डाला गया , और वो ये भी कहती है की गाडी तुरंत यहां से निकाल लो , वरना यहां के वहशी कबीले हम सब को मार डालेंगे , उनके पास कई नर भक्षी सैतान भी हैं जो इंसान को ज़िंदा खा जाते हैं , लड़की की बात सुनकर मोनिका और सुमन की सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है उनका जोश ए जवानी का भूत जाने कहाँ ग़ायब हो जाता है , अभी कार कुछ दूर ही आगे बढ़ी थी की कबीले के कुछ सदश्य उन्हें घेर लेते हैं , और हो हो की भयानक आवाज़ें निकालने लगते हैं , रज्जु का दिमाग घूम जाता है रज्जु कार की स्पीड बढ़ा देता है और कबीले की सदस्यों को उडाता हुआ आगे बढ़ता जाता है , तभी एक सदश्य कार के बोनट पर चढ़कर लकड़ी के डंडे पर बंधे कटीले हथियार से कार के सीसे पर वार करता है , कार का सीसा चटक जाता है , रज्जु का भेजा और गरम हो जाता है , रज्जु अपनी रिवॉल्वर एक बार पुनः लोड करता है और उन लोगों पर फायरिंग सुरु कर देता है , कार की तेज़ रफ़्तार में अचानक ब्रेक लगने से बोनट पर बैठा हुआ सदश्य उचक कर रोड के किनारे जा गिरता है , रज्जु कार की रफ़्तार फिर बढ़ा देता है,

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तभी जाने कहाँ से एक नरभक्षी कार के ऊपर आ जाता है , और दरवाज़ा खोल लेता है , और ज़ख़्मी लड़की को बाहर खींचने की कोशिश करने लगता है मगर तभी रज्जु कार को एक पेड़ से सटा कर निकालता है और नरभक्षी उस पेड़ की चपेट में आजाता है और एक ही झटके में सीधा कार से दूर जा गिरता है इधर छुट्टन लड़की को कार के अंदर खींचता हुआ कार का गेट लॉक कर देता है , रज्जो कार की रफ़्तार फुल कर देता है और कुछ ही मिनटों में जंगल का एरिया ख़त्म हो जाता है , कार के जंगल से निकलते ही जंगल में एक बार फिर भयानक चीख गूँज उठती है , और चमगादड़ों का झुण्ड उड़ कर किसी और दिशा की ओर पलायन कर जाता है ,

इस घटना के बाद कार सीधा फॉरेस्ट चौकी पर जाकर रूकती है , सुबह के चार बज चुके थे आसमान में पंक्षी चहचहाने लगे थे , चौकी का गार्ड घोड़े बेचकर सोने में व्यस्त था , रज्जु और छुट्टन कार से उतर कर चौकी का गेट खटखटाते हैं , लग भग १० मिनिट की मशक्कत के बाद गार्ड आँख मींजता हुआ गेट खोलता है , और पूछता है क्या हुआ भाई रात भर जंगल में फंसे रहे क्या , रज्जु कहता है हाँ , गार्ड एक बार पुनः बोलता है और ज़िंदा बच गए , तभी उसकी नज़र कार में बैठी लड़कियों पर पड़ती है , गार्ड कहता है कोई लड़की वड़की का चक्कर है क्या राजू कहता है तुम अपने काम से काम रखो , गार्ड कहता है वो तो मैं रखूँगा ही तुम्हारी कार काली है इस लिए बच गए जंगल के कबीले वाले काल देव के पुजारी हैं इसलिए काली गाड़ी वालों को जान से नहीं मारते तुम लोग बहुत भाग्यशाली हो जो ज़िंदा बच कर आगये अभी कुछ दिन पहले एक लाल कार गयी थी, मगर जंगल में कहाँ ग़ायब हो गयी उसका आज तक कोई पता नहीं चला , रज्जु कहता है पानी मिलेगा क्या , गार्ड एक जग में पानी लेकर आता है , छुट्टन अपने पास रखी बोतल में पानी भरता है , और दोनों कार की तरफ बढ़ने लगते हैं गार्ड एक बार पुनः चौकी का गेट बंद करके अंदर सोने चला जाता है , रज्जु कहता है, घंटा काली कार की वजह से बचे हैं हम लोग , और अपनी रिवॉल्वर पर हाँथ फेरता हुआ कहता है अगर मेरी जाने मन न होती तो आज हम भी न होते , गार्ड झूठ बोलता है मादर,,,, और कार स्टार्ट करके वहाँ से रवाना हो जाते हैं । छुट्टन कहता है दादा अगली बार हम पचमढ़ी चलेंगे मोनिका और सुमन को लेके रज्जु कहता है चुप करो भोस,, अभी मरते मरते बचे हैं , अभी हो जाती जन्नत की सैर अब और कहीं नहीं मनाने जाना हनीमून जो होगा अब बस रीवा में होगा , और मोनिका और सुमन को शहडोल में उतार कर ज़ख़्मी लड़की को ले जाकर रीवा के हॉस्पिटल में भर्ती करा देते हैं।

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