paying guest a erotic witch story ,

0
732
paying guest a erotic witch story ,
paying guest a erotic witch story ,

paying guest a erotic witch story ,

खंडाला की वादियों में दीपक की बाहों में बाहें डाले संध्या घूम रही थी , दोनों प्रेमालाप में इतने व्यस्त थे की समय का पता ही नहीं चल रहा था सूर्य अपनी लालिमा चारों और बिखेर रहा था , प्रेम में वशीभूत युगल जोड़ा एक दूसरे में समां जाने के लिए व्याकुल हो रहा था , वक़्त थमने का नाम नहीं ले रहा था , भावनाये आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हुयी जा रही थी , संध्या दीपक की बाहों में खोती चली जा रही थी दीपक की आँखों में आँखें डाल कर संध्या बोलती है जान तुम मुझे कभी धोखा तो नहीं दोगे न , दीपक कहता है कभी नहीं , यही सवाल जब दीपक संध्या की आँखों में आँखें डाल कर पूछता है तो संध्या नज़रें चुराने लगती है और हाँ में सर हिला देती है , अभी दीपक कुछ कह ही रहा था की अचनाक संध्या दीपक को अपने से अलग करके दूर फेंक देती है , क्यों की उसके अंदर छुपी हुयी चुड़ैल जाग्रत हो जाती है उसका मन करता है क्यों न दीपक को खंडाला की पहाड़ियों से नीचे फेंक दूँ मगर दीपक की मासूमियत पर उसे तरस आ जाता है , संध्या भी दीपक की सच्ची मोहब्ब्बत की गिरफ़्त में इस कदर फंस चुकी थी की चाहकर भी उसे जान से नहीं मार सकती थी , दीपक से अलग होकर संध्या दूर खड़ी हो जाती है दीपक कहता है क्या हुआ बेबी यूँ अचानक तुम्हारा मूड कैसे ऑफ हो गया , संध्या कहती है कुछ नहीं मुझे शादी के पहले किसी भी प्रकार का फिजिकल रिलेशन पसंद नहीं है , दीपक कहता है ओह कम ऑन कौन सी दुनिया में जी रही हो तुम हम इक्कीसवी सदी के युवा है आजकल तो ये सब कॉमन बात है , संध्या कहती है तुम्हारे लिए होगी मेरे लिए नहीं है , और ज़रा सी बहस के बाद दोनों वहाँ से रवाना हो जाते हैं ,

cut o ,

एक लड़का सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर के अंदर जाता है , फर्स्ट गेट में रेसेप्निस्ट सर्विस लिस्ट देती है , इसके बाद उसे अंदर के रूम में पंहुचा दिया जाता है , जहां दूसरी रेसेप्निस्ट मेनू कार्ड दिखाती है , लड़का फिर कहता है उसे फुल सर्विस चाहिए अब उसे सीधा थर्ड डार्क रूम में पंहुचा दिया जाता है जहां ५ लडकियां कतार में खड़ी हो जाती हैं और उनमे से चूज करने का ऑप्शन दिया जाता है लड़का दो लड़कियों को पसंद करता है और बाकी तीन लडकियां चली जाती है , मसाज सुरु होती है और थोड़ी ही देर बाद लड़के के नंगे बदन पर नरम नरम हांथों के स्पर्श जन्नत प्राप्ति की अनुभूति दिला रहा था बदन के ऊपरी हिस्से से जब हथेलियां नीचे की तरफ बढ़ती हैं उस वक़्त का अनुभव कुछ अलग ही होता है मगर उस नादान लड़के को क्या पता था की इस बार ऊपर से हाँथ नीचे नहीं आने वाले और एक कड़ाक की आवाज़ के साथ लड़के की गर्दन टूट जाती है सर को जिस्म से अलग कर दिया जाता है , इसी के साथ वहाँ पर मौजूद सभी लडकियां अपने असली चुड़ैल रूप में आ जाती है और गर्दन से बह रहे खून को एक लड़की बड़े से जार में भर लेती है तत्पश्चात सभी चुड़ैलों में एक एक ग्लास ताज़ा खून बाँट दिया जाता है सभी सैतान का शुक्रिया अदा करती हैं , और लड़के के मृत जिस्म को जंगल में फेंक दिया जाता है ,

सामने कुर्सी पर बैठी संध्या अपनी हांथों की लटकी हुयी मांस को लेदर जैकेट के अंदर ढकने की कोशिश कर रही थी गर्दन

से टपक रहे मांस के टुकड़े खुद खा लेती है , तभी एक असीसीटेंट जैस्मिन की नज़र उस पर पड़ती है वो कहती है दीदी बहुत दिनों से इंसानी मांस नहीं मिला आखिर कब तक हम रात भर गली के कुत्ते और अन्य जानवरों का सड़ा मांस खाकर जवान और खूब सूरत दिखेंगे , दीदी अब तो हमारे दांत और फेफड़े भी कुत्तों की तरह दिखने लगे हैं और स्पा में जितने भी कस्टमर बचे हैं सब के सब बी पी शुगर पेसेंट हैं और ५० प्लस हैं , अब हमारा जिस्म जवान मर्द का ताज़ा खून मांग रहा हैं , आपका क्या हुआ कल आप दीपक सर के साथ खंडाला गई थी न , संध्या कहती है कुछ नहीं हुआ क्या होगा वो प्यार है मेरा अब तुम सब की प्यास बुझाने के लिए क्या मैं अपने होने वाले सौहर का खून कर दूँ , जैस्मिन कहती है दीदी मैंने ऐसा कब बोला था मैं तो ये पूछ रही थी की शादी के बाद तो आप दीपक सर के साथ पुणे शिफ्ट हो जाएगी न , संध्या कहती है तो क्या हुआ मैं यहां आती जाती रहूंगी तुम सब लडकियां सनसिटी चलाते रहना , और इतना कहकर संध्या वहाँ से डी एस ए के ऑफिस के लिए रवाना हो जाती है , मुंबई ओशिवारा का इलाका सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर बाहर से देखने पर तो सब कुछ ठीक ठाक दिखाई देता था मगर इसके अंदर जो कुछ होता था , वो कल्पना से भी परे थे , कहते हैं आज़ादी के बाद से मुंबई कमाटी पूरा के लिए बदनाम था मगर ये रेड लाइट एरिया धीरे धीरे हर जगह फ़ैल रहे थे , और इस मकड़जाल में जो एक बार फंस जाता है वो कभी निकल नहीं पाता है , और अब ये मकड़ जाल पॉस इलाकों में भी फैलता जा रहा था , स्पा और ब्यूटी पार्लर के नाम से , सारे शहर में जो चीज़ें रात के अँधेरे में होती है सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर में भी वही सब दिन दहाड़े हो रहा था , बस किसी को नज़र नहीं आ रहा था ,

best horror short stories ,

बैंक का एच आर जिसके द्वारा संचालित डी एस ए चलता है और जिसमे फाइनेंस सेक्टर में कई लड़के लडकियां काम करते हैं , संध्या भी उन्ही में से एक है , कहने को तो संध्या दीपक की गर्लफ्रेंड है मगर एच आर के साथ भी उसके जिस्मानी ताल्लुक़ात होते रहते हैं , दीपक बहुत बड़ी रिच फॅमिली से बिलोंग करता है , उसके पिता जी पुणे के मेयर रह चुके हैं उन्हें दीपक और संध्या के अफेयर के बारे में पता है और वो नहीं चाहते की संध्या जैसी आवारा किस्म की लड़की का उनके खानदान के साथ नाम जुड़े पर कहते हैं न , दिल आया गधी पर तो परी किस काम की , यही हाल दीपक का भी था वो संध्या के हुश्न्जाल में इस तरह फंस चुका था की न चाह कर भी उसे छोड़ नहीं सकता था , और संध्या की फरमाइशें पूरी करने में लगा रहता था , इसी मोहब्बत के चलते उसने अपना एक बंगला संधा को दे रखा था जिसे संध्या डी एस ए और पार्लर के लड़के लड़कियों को रेंट में देती थी और अपना खर्चा चलाती थी , अब चूंकि संध्या का एच आर के साथ भी नाजायज़ सम्बन्ध था इसलिए एच आर चिन्मय ने सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर का मालिकाना हक़ संध्या को दे रहा था , वो सनसिटी की हेड थी ,

cut to ,

डी एस ए का ऑफिस कुछ नए लड़के लड़कियों की एंट्री हुयी हैं , रोहन राजेश सुमित मुंबई में अभी नए नए थे , रोहन संध्या के गाँव का ही था , गाँव से तात्पर्य अर्थात आप किसी भी शहर के क्यों न हो अगर आप मुंबई गए हो तो बाहर गाँव के ही बोले जाओगे , रोहन दीदी करके संध्या के बंगलो में पीछे साइड एक रूम क इंतजाम कर लिया था बाकी आगे साइड के बाकी कमरों में तीन लडकियां रहती थी ऊपर के फ्लोर में खुद संध्या रहती थी , दिवाली का वक़्त था , संध्या अपने गाँव गयी हुयी थी उसने घर की ज़िम्मेदारी रोहन को दी हुयी थी , रोहन घर में अकेले रहते रहते बोर हो चुका था वो राजेश और सुमित को फ़ोन करता है भाई पार्टी कहीं पार्टी एन्जॉय करते हैं , राजेश और सुमित भी इसी फ़िराक में थे घर खाली मिले और दारु पार्टी का लुत्फ़ लिया जाए , और तीनो मिलकर संध्या के बंगलो में दारू पार्टी एन्जॉय करते हैं , यहां संध्या की गैर मौजूदगी में आगे साइड रहने वाली तीनो लडकियां रूबी , रेहाना ,और स्टेला भी खूब पब और डिस्को पार्टी एन्जॉय करने में लग जाती है , डेली का डेली डिस्को पब जाना कोई रोकने टोकने वाला नहीं था , एक रात १ बजे का समय रूबी और स्टेला पब से लौटती हैं रेहाना की तबीयत खराब होने की वजह से वो आज रूम में फोन साइलेंट मोड में डाल कर सो रही थी , तभी मैन गेट में रूबी और स्टेला की एंट्री होती है वो पहले डोर बेल बजाती है , फिर रेहाना को कॉल करती हैं जब सैकड़ों रिंग डालने के बाद भी रेहाना दरवाज़ा नहीं खोलती है तब रूबी और स्टेला कहती हैं की फोन साइलेंट में डालकर सो गयी कमीनी अब सुबह तक बाहर ही रहना पड़ेगा , तभी स्टेला के मन में प्लान आता है वो करती है , क्यों न पीछे वाले रूम में जो लड़का रहता है हम उससे हेल्प लेले रात ही तो गुज़ारनी है और हम दोनों ने पी भी इतनी रखी है की रात में कहीं नहीं जा सकते , स्टेला की बात पर रूबी हामी भर देती है और दोनों बॉउंड्री वाल कूंदकर रोहन वाले रूम का दरवाज़ा खटखटाने लग जाती हैं , रूम के अंदर ज़बरदस्त दारू पार्टी चालू थी , दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ सुनकर तीनो शांत हो जाते हैं , राजेश और सुमित कहते हैं भाई लड़की की आवाज़ आ रही है तीनो के चेहरे ख़ुशी के मारे खिल जाते हैं , रोहन राजेश और सुमित को रूम में छुपने के लिए बोलता है और खुद दरवाज़ा खोलता है ,

दरवाज़ा खोलते ही नशे में धुत रूबी और स्टेला लड़खड़ाती हुयी रोहन से बोलती है , एक्सक्यूज़ मी प्लीज़ हेल्प कर दो

हमारी , रोहन पूछता है आखिर हुआ क्या है इतनी रात गए तुम लोग बाहर कैसे घूम रही हो , रूबी कहती है देखो हमारी एक रूम पार्टनर रूम के अंदर सो रही है हम दोस्त की बर्थडे पार्टी में चले गए थे इसलिए आने में लेट हो गए , वो दरवाज़ा नहीं खोल रही है सुबह होने में २ से ३ घंटे लगेंगे तब तक हमें अपने रूम में रुकने का मौका दे दो , रोहन कहता है अफकोर्स व्हाई नॉट अंदर आ जाओ वो आकर सामने रखे सोफे पर बैठते ही सोने लगती है , और धीरे धीरे सो जाती हैं , कुछ ही देर में सुमित और राजेश भी हॉल में आ जाते हैं वो दो लड़कियों को एक साथ देखकर ख़ुशी से उछल जाते हैं , राजेश कहता है भाई लडकियां दो और हम तीन क्या बोलता है खेल दें फिर रोहन कहता है कुछ हो गया तो तुम जानो हालाँ कि मन तो मेरा भी है बेसुध की वजह से रूबी की टॉप थोड़ा नीचे सरक गयी थी जो की किसी भी जवान लड़के को बहकाने के लिए पर्याप्त थे , राजेश से रहा नहीं जाता वो बढ़कर रूबी के जिस्म को स्पर्श करना सुरु कर देता है , रूबी कोई विरोध नहीं करती है इधर सुमित भी स्टेला के पैर से पैर रगड़ना सुर कर देता है , स्टेला का कोई जवाब नहीं मिलता है , सुमित का भी हौसला और बढ़ जाता है और कमोवेश में उत्तेजित सुमित स्टेला के होंठ पर होंठ रख कर चुम्बन लेना सुरु कर देता है तभी स्टेला उसे एक झापड़ जड़ देती है और दूर फेकती हुयी कहती है हाउ डेयर यू क्या समझ रकह है तुम लोगों ने बाजारू लड़की हैं हम जो चाहे वो कर लोगे थोड़ी देर ठहरने के लिए जगह क्या मांगी सीधा इज़्ज़त में हाँथ डाल दिए रेहाना चिल्ला चिल्ला कर तीनो को डाँटना सुरु कर देती है अभी पुलिस को बुलाती हूँ रेप एटेम्पट लगवा के थाने में बिड़वाती हूँ तभी रूबी की भी नींद खुल जाती है अपने अस्त व्यस्त कपडे को ठीक करती हुयी भी तीनो पर चिल्लाने लगती है,

real horror story in hindi, 

रूम में मचे हल्ले की आवाज़ से रेहाना की नींद खुल जाती है , वो भी वहां आ धमकती है , बात और समय की नज़ाकत को समझते हुए रूबी और स्टेला को शांत करवाती है , और तीनो लड़कों को वार्निंग देती है और कहती है संध्या दीदी को आ जाने दो , फिर मैं उनको सारी घटना बताउंगी वो बताएगी की क्या करना है तुम सबके साथ , इतना कह कर रूबी और स्टेला को खींचती हुयी अपने रूम में ले जाती है , दो दिन गुज़र जाते हैं तीसरे दिन संध्या आजाती है , तीनो लडकियां संध्या की दरबार में हाज़िर होती हैं , और रूम में हुए हंगामे से संध्या को अवगत करवाती हैं , तीनो की बात सुनने के बाद संध्या रोहन को बुलवाती है , संध्या डाँटती हुयी रोहन को कहती है , तुम मेरे गाँव के थे इसलिए मैंने तुम्हे रूम दिया और तुमने उसके बदले क्या किया , मेरे भरोसे को चकनाचूर कर दिया रोहन सर झुकाये सामने चुपचाप खड़ा था , संध्या एक बार फिर डांटती हुयी कहती है अगर अभी रूम में पुलिस आ जाती तो क्या होता मेरी इज़्ज़त का तुमने ये सोचा आस पास के लोग क्या सोचते होंगे मेरे बारे की मैं धंधा करवाती हूँ अपने घर मे मुझे अब ऐसी गलती दुबारा नहीं मिलनी चाहिए वरना फाइनेंस की जॉब तो जाएगी ही मुंबई में रहने लायक भी नहीं रहोगे , और तुम्हे मैंने अकेले रूम में रहने के लिए बोला था तुम दो और लड़कों को ले आये , मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है की मेरी गैर हाज़िरी में मेरे घर में कोई हंगामा हो , रोहन चुप चाप वहाँ से चला जाता है , इसके बाद संध्या रूबी रेहाना और स्टेला की क्लास लेती है , संध्या तीनो को झाड़ती हुयी कहती है , मेरी गैर हाज़िरी में क्या गुलछर्रे उड़ाए जा रहे थे , रोज़ डिस्को पब शराब ये सब क्या है तुम तीनो का भूखों मरने की स्थिति थी तुम सबकी मैंने तुम्हे सहारा दिया और तुम मुझे ही बदनाम करने में लग गयी रूबी कहती है दीदी मैं इन लड़को की हरकत के बारे में पुलिस में कम्प्लेन करूगी , संध्या कहती है कितनी बड़ी सती सावित्री हो तुम तीनो मुझे अच्छी तरह से पता है , एक तो सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर ठीक ढंग से चलाया नहीं जाता है , तुम लोगों से , तुझे क्या लगता है पुलिस आती तो तेरे बारे में पूछताछ नहीं करती और सारा काला चिटठा खोल के रख देती , और स्टेला तू बहुत बड़ी सरीफ बन रही है कितनी बार स्कूल में लड़कों के साथ बाथरूम में पकड़ी जा चुकी है , स्टूडेंट तो छोड़ उस बूढ़े प्रोफेसर पॉल सर के साथ भी तेरे बाप ने रंगे हाँथ पकड़ा था न तुझे जिसके चलते उसने आधी रात को घर से लात मार कर बाहर कर दिया था तुझे, तब तुझे मैंने सहारा दिया था , भूल गयी एहशान फरामोश , संध्या की बातें सुनकर स्टेला शांत हो जाती है , सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर का तुम लोगों को पता है न मैंने वकालत भी की है तुम लोगों को लॉकअप में बंद करवा के इतने डंडे मरवाऊँगी की सारी हेकड़ी धरी की धरी रह जाएगी , तुरंत निकलो यहां से मुझे पुलिस का नाम भी नहीं सुनायी देना चाहिए , तुम लोगों की ज़बान से , तीनो लडकियां संध्या के क़दमों में गिरकर गिड़गिड़ाने लग जाती है , और संध्या से कहती हैं दीदी हमें माफ़ कर दो , दुबारा ऐसी गलती नहीं होगी , संध्या कहती है अच्छे खासे शिकार फसे थे तुम्हारे हांथों में तुमने उन्हें भी जाने दिया , तीनो लडकियां कहती है सॉरी दीदी , संध्या कहती है अब सॉरी वोरी से काम नहीं चलेगा तीनो लड़को को गियर में लो मैं रोहन को बोल दूँगी वो तुम्हे उनसे मिलवा देगा , इसके बाद वो लडकियां वहाँ से चली जाती है , उनके जाने के बाद संध्या रोहन को फोन लगाती है और कहती अपने दोस्तों को बोल देना लडकियां उनसे मिलकर माफ़ी माँगना चाहती है और दुबारा मुझे कोई लफड़ा नहीं चाहिए , ओके दीदी बोलकर फोन रख देता है रोहन के चेहरे में स्माइल आ जाती है ,

urdu shayari in hindi font,

वो राजेश और सुमित को बताता है की फ़िक्र करने की कोई आवश्यकता नहीं है मैटर सलट गया है , स्टेला एक दिन खुद रोहन से मिलकर माफ़ी मांगती है और उसे कहती है गलती मेरी फ्रेंड्स की थी उस रात के बर्ताव के लिए मैं तुम तीनो से माफ़ी मांगती हूँ , मेरी फ्रेंड्स भी माफ़ी माँगना चाहती हैं , वो तुम्हारे दोस्तों से मिलना चाहती है तो बुलाओ किसी दिन बरिस्ता में साथ बैठ कर कॉफी पीते हैं , और कॉफी की मिठास के साथ दिलों के गिले शिकवे भी दूर हो जायेंगे स्टेला की बात सुनकर रोहन ख़ुशी से झूम उठता है वो फ़ौरन राजेश और सुमित को बताता है है भाई सेटिंग का जुगाड़ है नेक्स्ट सन्डे लडकियां बरिस्ता में मिलने वाली हैं , रोहन का ऑफर सुनकर राजेश और सुमित के चेहरे ख़ुशी से खिल जाते हैं , वो बोलते है न अब तो लडकियां भी तीन और हम भी तीन अब तो बस मज़ा आ जायेगा सन्डे के दिन का तीनो को बेशब्री से इंतज़ार होता है बरिस्ता में तीनो लड़कियों से मिलते हैं कॉफी के साथ देर तक गप सप इसके बाद फिर मुलाक़ात का दौर सुरु हो जाता है तीनो की दोस्ती कब प्यार में बदल जाती है समझ में ही नहीं आता है , फिर सुरु होता है लेट नाईट पार्टी का दौर करीबियां बढ़ती जाती वो उन्हें लेने और छोड़ने सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर तक जाने लग जाते हैं धीरे धीरे रोहन राजेश और सुमित सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर के अंदर भी जाने लगते हैं , तीनो का मन भी मसाज करवाने का करता है तीनो उन लड़कियों से कहते हैं , यार हमे भी जन्नत की सैर करवाओ कभी बॉडी में बड़ा पैन हो रहा है साला , तीनो लडकियां कहती हैं क्यों नहीं जानेमन तुम्हे तो हम अपने हांथों से जन्नत की सैर करवाएंगे , और तीनो को ले जाकर तीन अलग अलग केबिन में अंदर कर दिया जाता है फिर एक एक करके तीनो लडकियां उनके साथ केबिन में प्रवेश कर जाती है , पहले तीनो को एक एक करके निर्वस्त्र किया जाता है इसके बाद उन्हें सीधा लेटने को बोल दिया जाता है अब हर एक के ऊपर एक लड़की बैठ कर मसाज करती है तभी रूबी के खुले बाल राजेश के मुँह में घुसने लगते हैं , रूबी कहती है मेरे हाँथ में तेल लगा है प्लीज़ इन्हे अपने मुँह से हटा दीजिये , राजेश कहता है जानेमन अभी तो बाल ही अंदर गया है अब और न जाने क्या क्या अंदर जाने वाला है , राजेश की बात सुनकर रूबी कुटिल मुस्कान देती है और कहती ओह रेअली राजेश कहता है हाँ रूबी कहती है बड़ा भरोसा है अपने आप पर राजेश कहता है अपने आप पर नहीं तुम्हारे प्यार पर , तभी रूबी का चेहरा एक भयानक चुड़ैल के रूप में परिवर्तित हो जाता है , राजेश भौचक्का रह जाता है , वो कुछ समझ पाता इससे पहले रूबी के नुकीले दांत राजेश की गर्दन में पूरी तरह से पैबस्त हो चुके थे , और राजेश की चीख के साथ महौल शांत हो जाता है , बाजू वाले केबिन में मसाज का आनंद ले रहा सुमित भीतर ही भीतर प्रफुल्लित हो जाता है , और रेहाना से कहता है लगता है जन्नत में पहुंच गया राजेश ,

रेहाना कहती है तुम्हे भी जाना है और दूसरे ही पल रेहाना के पंजो से नुकीले नाखून निकलते हैं जिन्हे वो एक घुमा के

सुमित के गर्दन पर मारती है और दूसरे ही पल सुमित की गर्दन तड़पते हुए केबिन की फर्श पर जा गिरती है और रेहाना की तरफ देखती है जैसे वो उससे कहना चाह रही हो की मैंने तो तुमसे सच्चा प्यार किया था फिर क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा तभी मुंडी पर सैंडल से किक मारती हुयी रेहाना कहती है बेचारे को जन्नत भी नहीं मिली , राजेश और सुमित की चीख सुनकर रोहन घबरा जाता है , और स्टेला से पूछता है मुझे लगता है की कुछ गड़बड़ है, वो नग्न अवस्था में ही केबिन से बाहर की तरफ भागता है , तभी मौजूद वहाँ लेडी बाउंसर उसे खींच कर गैलरी की तरफ फेंक देती है जहां जन्मो से भूखी चुड़ैलें मरे हुए कुत्तों का सड़ा हुआ माँस खा रही थी हो हल्ला सुनकर संध्या वहां आ जाती है रोहन उसके कदमो में गिर कर रहम की भीख मांगता है और कहता है दीदी मुझे बचा लो मैं आपके गाँव का हूँ , संध्या कहती यही तो तू मेरे गाँव का था तो तुझे रूम दिया उसके ऐवज में तूने क्या किया साले तूने रूम में हंगामा खड़ा करवा दिया , जेल जाने की बंदोबस्त कर दिया था तूने अब मर , तभी स्टेला वहाँ आ जाती है और रोहन की टाँगे पकड़कर घसीटती हुयी एक बार पुनः केबिन के अंदर ले जाती है , और थोड़ी ही देर में रोहन की चीख भी सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर के अंदर घुट के रह जाती है , थोड़ी देर में सबके लिए एक एक ग्लास ताज़ा ब्लड लाया जाता है , वहाँ मौजूद सभी चुड़ैले ब्लड से अपनी जिह्वया की प्यास बुझाती हैं , तभी संध्या के फोन में रिंग बजती है संध्या फोन उठाती है चिन्मय सर कहते हैं डी एस ए के ऑफिस आ जाओ फाइनेंस सेक्टर के नए कस्टमर डील करने हैं , संध्या जी सर बोलकर फ़ौरन डी एस ए के लिए रवाना हो जाती है , ऑफिस जैसे ही संध्या प्रवेश करती है चिन्मय का चेहरा खिल जाता है वो अपनी सीट से उठ जाता है और संध्या के करीब आकर उसके पिछवाड़े में हाँथ फेरता हुआ कहता है , और बताओ कैसा है तुम्हारा नया आशिक़ दीपक सुना है खूब गुलछर्रे उड़ाए जा रहे हैं नए बॉयफ्रेंड के साथ कभी हमे भी मौका दो और इतना कहर अपने होंठ संध्या के कान पर घुमाना सुरु कर देता है , संध्या कहती है यहीं पर सब कुछ करेंगे क्या सर सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर में चलते हैं तभी चिन्मय कहता है अरे हाँ हमारी असली ऐशगाह तो वही है सुना है नयी नयी फुलझड़ियाँ आई हुयी हैं वहाँ पर सबसे के साथ सर्विस लूँगा संध्या कहती है , सर इस कनीज के होते हुए आपको किसी और की तरफ जाने की क्या ज़रुरत है , चिन्मय कहता है बूढी हो गयी हो तुम , अब तुम में वो बात नहीं , माँस लटक रहे हैं तुम्हारे जिस्म से कब तक फुल जैकेट पहन कर अपने जिस्म से लटकती माँस को छुपाओगी जाने मन , चिन्मय की बात सुनकर संध्या गुस्से को अंदर ही अंदर दबा कर कसमशा के रह जाती है ,

अपमान का घूँट पीकर संध्या मुस्कुराती हुयी चिन्मय की तरफ पलटती है और उसके सीने से अपने जिस्म को चिपकाती हुयी कहती है आप भी सर मज़ाक बहुत करते हैं , चिन्मय भी उसकी कमर में हाँथ डालता हुआ उसे अपनी तरफ खींच लेता है और दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए कार की तरफ बढ़ जाते हैं , कार सीधा सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर के बाहर जाकर रूकती है संध्या रिसेप्सनिस्ट से कहती है सर के लिए ख़ास वाला हॉल खुलवाओ और तुम सब लडकियां सर के लिए रेडी हो जाओ आज इन्हे ऐसी सर्विस प्रोवाइड करवाएंगे की सर ज़िन्दगी भर याद रखेंगे , तत्पश्चात चिन्मय सर ओनली अंडरवियर में एक बेड पर लेट जाता हैं , कई खूबसूरत हसीनाएं उसे चारों तरफ से घेर लेती हैं , एक लड़की चिन्मय के सीने के ऊपर बैठ कर आँख पर काली पट्टी बाँध देती है और जिस्म पर तेल की बूंदे टपका कर ऊपर से नीचे तक हाँथ फेरना सुरु कर देती है , थोड़ी ही देर में चिन्मय को उल्टा लेटने का आदेश दिया जाता है , इसके बाद उसके हाँथ पैर पर हंथकड़ी लगा दी जाती है , थोड़ी ही देर में संध्या चाबुक से चिन्मय को पीटना सुरु कर देती है , चिन्मय चिल्लाता हुआ कहता है आराम से करो जो भी करना लेकिन संध्या के चाबुक चलाने की रफ़्तार कम नहीं होती है वो चिन्मय को गाली देती हुयी कहती है हरामखोर मुझे कहता है बूढी हो गयी हैं तू क्यूं बे जब तेरी बीवी बीमारी से जूझ रही थी तब तेरे जिस्म की भूख मैं मिटाती थी , और आज मैं बूढी हो गयी हूँ और वहाँ मौजूद लड़कियों को आदेश देती है इसे इतना मारो की इसके जिस्म में हड्डियों के अलावा माँस का एक भी टुकड़ा दिखाई न दे, चिन्मय चिल्लाता हुआ उन लड़कियों की तरफ देखता है सभी चुड़ैलों का रूप धारण कर चुकी थी , सबके हाँथ पर चाबुक थे और सभी चिन्मय के जिस्म पर चाबुक बरसाए जा रही थी , और तब तक चबुक चलाना नहीं बंद कर देती हैं जब तक की चिन्मय का जिस्म कंकाल में नहीं बदल जाता है , उसके हड्डियों के ढाँचे को उसकी कार में डाल दिया जाता है , जिसे पुलिस दो चार दिन में बरामद कर लेती है , इधर दीपक के पिता की मौत के बाद दीपक पुणे का मेयर बन जाता है , और संध्या दीपक के साथ घर बसा लेती है मुंबई में डी एस ए का ऑफिस और सनसिटी स्पा एंड मसाज पार्लर अभी भी चालू है जिनको संध्या अभी भी ऑनलाइन ऑपरेट करती है और कभी कभी मुंबई आती जाती रहती है।

the end ,

pics taken by google ,