बज़्म में आ बैठे वो ,

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बज़्म में आ बैठे वो ,
बज़्म में आ बैठे वो ,

बज़्म में आ बैठे वो ,

बज़्म में आ बैठे वो ज़ुल्फ़ें बिखेर कर ,

कुछ नज़्म टूटती सी कुछ गज़लें समेट कर ।

चरागों के उजाले सा सफ़र तन्हा ,

मैं अंधेरों में बहुत दूर चला जाता हूँ ।

कुछ सियासी दौर से गुज़री कुछ सिक्कों के वज़न से दब गयी ,

गोया इस तरह खस्ता से मोहब्बत हाल ए खस्ता होती गयी ।

भू धरा इंसान बिका ईमान भी मिल जायेगा ,

अब लहू तो आम है भगवान् न बच पायेगा ।

तुल गए गौरी गणेश संग महेश तुल गए ,

विशिष्ठ गण के माल में मैले कुचैले गणवेश धुल गए ।

 

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बुझे बुझे से चरागों का सफक जल जाना ,

तेरी ज़ुल्फ़ों के हटने से बुझे चेहरों का खिल जाना

दूर से आते राहगीरों की पदचाप सुनो ,

मुमकिन है सफ़र में कोई राहगीर मिले ।

जो बन सको तो बनो हमसफ़र मेरे ,

राह में मील के पत्थरों के बाद मंज़िलें और भी हैं ।

तेरी ज़ुल्फ़ में उलझे हैं लतीफे कैसे कैसे ,

कुछ पण्डित क़ाज़ी मौलवी कहकशाँ बन कर ।

हम तेरी ज़ुल्फ़ों तले शहर बसा लगे ,

बस तू पलकें झुकाकर के अँधेरा कर दे ।

 

 

ये जो नगीने जड़े हैं तेरी ज़ुल्फ़ों में ,

शब् ए महताब को भी आफ़ताब करते हैं ।

जी करता है तेरे हुश्न पर ग़ज़ल लिखूँ ,

तेरे काजल को क़यामत तेरी ज़ुल्फ़ों को क़हर लिखूँ ।

अल्लाह बचाये हुश्न ए जमाल से ,

नागिन सी डसती ज़ुल्फ़ से कभी लहरा के चलती बयार से ।

तेरी ज़ुल्फ़ों में उलझे कितने क़ाफ़िर इमान ओ दीन ,

जो बच गया वो बुत था जो फंस गया वो हो गया हबीब

नाख़ुदा भी एक ख़ुदा तलाश लेता है ,

हो जाती है दुआ बे असर जब वो बद्दुआ तराश लेता है ।

 

 

शहर भर की रवायत में रूठना मनाना ही नहीं ,

देखो तुम हमसे दूर जाने की ज़िद को छोड़ दो ।

चल रहे हैं लोग शहर भर में सूरत ए फ़िराक़ बदल बदल ,

कभी आदम कभी खभी खादिम नक़ाब बदल बदल ।

pix taken by google