मादर ए वतन की मिटटी जब गंधाने लगे funny political shayari ,

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मादर ए वतन की मिटटी जब गंधाने लगे funny political shayari ,
मादर ए वतन की मिटटी जब गंधाने लगे funny political shayari ,

मादर ए वतन की मिटटी जब गंधाने लगे funny political shayari ,

मादर ए वतन की मिटटी जब गंधाने लगे,

समझो गुलामी की घड़ी आने वाली है ।

लगने लगे जब हिंदी उर्दू जानवरों की ज़बाने ,

समझो तहज़ीबें लड़खड़ाने लगी हैं।

मेक इन इंडिया से भारत का निर्माण होता हैं ,

सर ज़मीन पर सर झुकाने से धरा का सम्मान होता हैं ।

भारत निर्माण बोलने मात्र से नहीं , करके दिखाना होगा ।

बे आवाज़ की धरती को, एक सुर लगाना होगा ।

जिस देश की खुद की कोई राष्ट्र भाषा नहीं , वो क्या चाइना से टकराएगा ।

अंग्रेजों की बैशाखी के दम पर , कितना दौड़ पायेगा ।

दफ्तरों से दुकानों तक जिसका कब्ज़ा है ,

भिखारी भी छुट्टा टैली में माँगता है

नेता नवनिर्माण का भाषण ,

लाल किले के प्राचीर से देता है ।

जो गौरव बनते मात्र भूमि का ,

वो धरा के लुक़्मे उड़ाते हैं ।

 

hindi shayari 

गगन के इस ओर वसुंधरा की रज रज सजती संवरती है

सुनहरी नीर का कलरव निशा के गोद भरती है ।

अधर व्याकुल धरा गंभीर रज तज कर गगन का

रोम रोम से उठी है विरह वेदना सृजन श्रृंगार करने को ।

उठे भारत फिर गगन में एकाकी चेतना बनकर ।

न यूपी हो न साउथ हो न हिन्दू हो न मुस्लिम हो ।

वो जो भी हो मादर ए वतन का लाल बस हूबहू हो ।

उठाये शीर्ष पर गौरव पुनह इतिहास दोहराये

 

urdu shayari 

खजूर की नोटों वाले बाबा की महिमा अपरम्पार i

गीता के श्लोकों में तुम क़ुरआन की आयतों का सार तुम्ही ।

बिन तुम्हरे प्रभुवर जगत में कोई न नर नारी न नारायण

सुर असुरन का संताप तुम्ही , तुम्ही जग के करता धरता ।

तुम मानव जग पालक, तुम ही जग के हितकारी

तुम शुभचिंतक सब निजजन के , तुम ही जातक प्रलयंकारी

तू आफत हो तुम विपति निदान , नवगण में तुम ही सर्वव्याप्तमान

तुम दिवाली के पूजन में , तुम ईदन में तुम तीजन में

तुम सहस्त्र बाहू बन जोजन के , तू लोगन में तुम भोगन में ।

तुम बिन ब्रह्माण्ड अधूरा है , तुम सा न प्रभु कोई दूजा है

तुम ग्वालन में तुम बालन में , ऊपर से तुम नीचे से तुम ।

जो कष्ट न प्रभुवर हर पाते , तुम्हरे नेरे आके थर्राते ।

तुम नॉटेन में तुम वोटन में , तुम दही हांड़ी के लोटन में ।

तुम जादू में तुम टोने में , तुम कलयुग जीके सोने में

प्रभु तुम्हारी लीला अपरम्पार , तुम मानव निर्मित जीवन का हो आधार

बस नाम लिए कष्ट हरते हो , सो जन जन के मन में बसते हो ।

हो राम तुम्ही हो रहीम तुम्ही , तुम्हरे बिन मिथ्या रचना है ।

तुम ओंकार तुम अलंकार , छण भृंगुर तुम्हारी महिमा है ।

pix taken by google